Vandana Kataria,Tokyo-Olympics-2021
Tokyo-Olympics-2021

मूलनिवासी दयाराम PPI(D)

हरियाणा राज्य की रानी रामपाल महिला हॉकी टीम की कैप्टन एक तांगा चलाने वाले गरीब की बेटी के नेतृत्व में हरिद्वार उत्तराखंड की वंदना कटारिया ने अफ्रीका की टीम पर तीन गोल कर भारत का नाम रोशन किया। महिला टीम की शेष खिलाड़ी भी किसान और गरीब की बेटीयां है जिन्होंने महिला हाकी टीम को सेमीफाइनल तक पहुंचाने का गौरव प्रदान किया। किंतु महिला हाकी टीम फाइनल तक नहीं पहुंच सकी। हरिद्वार उत्तराखंड में वंदना कटारिया के घर के सामने कुछ लोगों ने हार का जश्न बनाया और वंदना कटारिया के ऊपर हार का ठीकरा यह कहकर फोड़ा की हार इसलिए हुई कि आरक्षण कोटे की युवती को टीम में शामिल किया गया।

वंदना कटारिया के लिए जातिसूचक शब्दों का भी प्रयोग किया गया। हरिद्वार जिले के एक भाजपा विधायक जो अपने आप को चमार साहब कह कर गर्व महसूस करते हैं और एक ऐसा संगठन जो अपने कार्यक्रमों में ग्रेट चमार का बैनर लगाकर कार्यक्रम करता है उन्हें वंदना कटारिया के अपमान का दर्द बहुत खला। वे वंदना कटारिया के घर तक न्याय दिलाने के लिए पहुंच गए। यानि दारु के नशे में धुत लोग ही यदि लोगों को नसीहत देने लगे कि दारु पीना गलत है। फिर उनकी बात कोन मानेगा।

पूर्वी उत्तर प्रदेश में एक कहावत है “एक तो छिनरा वह भी डोली के साथ” प्रश्न यह खड़ा होता है कि क्या वे युवक दोषी हैं जिन्होंने वंदना कटारिया के साथ जाति सूचक शब्दों का प्रयोग किया या वह सामाजिक व्यवस्था दोषी है जिसने जाति प्रथा को जन्म दिया जिसके कारण जातिप्रथा के भुक्तभोगी समाज के लोग भी अपने आप को ग्रेट चमार, चमार साहब, ग्रेट गुर्जर अथवा  ग्रेट द जाट कहकर अपना सीना चौड़ा करते हैं। फिर ऐसे लोग  वंदना कटारिया को क्या न्याय दिला पाएंगे।

हॉकी टीम के कैप्टन रानी रामपाल कुम्हार जाति से संबंध रखती है उसके लिए रामचरितमानस के उत्तरकांड में लिखा है “जे बरनाधम तेलि कुम्हारा, स्वपच किरात कोल कलवारा।।” अर्थात वर्ण व्यवस्था में सबसे अधम और नीच तेली ,कुम्हार,कोल और कलवार है। आज नहीं तो कल रानी रामपाल के विरोध में भी कुछ लोग इसलिए जातिसूचक शब्द का प्रयोग करेंगे क्योंकि जाति के वायरस आज भी समाज में विद्यमान है क्योंकि रानी रामपाल भी ब्राह्मण धर्म की धार्मिक धारनाऔ में अधम नीच और जंगली है समाज सुधारक महर्षि दयानंद सरस्वती जो घोर जातिवादी थे वे लोगों की दृष्टि में महान समाज सुधारक आज भी बने हुए हैं। इसलिए लोग उन्हें सम्मान देते हैं और मूलनिवासी बहुजन समाज के लोग उनके झांसे में आकर आर्य समाजी बन गए।

महर्षि दयानंद के जातिवादि होने का प्रबल प्रमाण उन्हीं की साहित्य संपदा में आज भी विद्यमान है आर्य समाज की पुस्तक शास्त्रार्थ संग्रह के भाग-3  निर्णय के  तट पर पृष्ठ संख्या 235 पर आर्य समाजी  सनातनी ब्राह्मणों का शास्त्रार्थ दिया हुआ है। आर्य समाजी सनातनीयो के समक्ष उन्हें जातिवादी होने का  प्रमाण प्रस्तुत  करते हैं कि सनातनी जातिवादी है। उस पुस्तक में  एक आदिवासी संथाल के मुख से एक संदेश दिया गया है

 “अशुद्धो शुद्धताम जाति नाति शुद्धति किलवीसम”

 “न गंगा न गया काशी जाति गंगा गरीयशी”।।

अर्थात गंगा और काशी में  स्नान करने तथा गया कि  यात्रा करने से कोई  शुद्ध नहीं हो जाता बल्कि  जातिरूपी गंगा में डुबकी लगाने से ही अशुद्धता दूर हो सकती है अर्थात जाति में जियो और  जाति को मरते दम तक जिंदा रखो।  30 जनवरी 1948 को नाथूराम गोडसे नाम का एक महाराष्ट्रीयन ब्राह्मण युवक ने गांधी जी की गोली मारकर हत्या कर दी। महाराष्ट्र मैं गैर ब्राह्मण जातियां ने महाराष्ट्र के ब्राह्मणों पर हमला बोल दिया जिससे‌ महाराष्ट्र में हिंसा का वातावरण व्याप्त हो गया।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक गोलवलकर बाबा साहब डॉक्टर अंबेडकर के पास पहुंचे। उस समय डॉक्टर अंबेडकर भारत के कानून मंत्री थे। डॉ अंबेडकर बड़ी आसानी से समझ गए कि जो व्यक्ति गैर ब्राह्मणों की हत्या या उनके साथ अत्याचार होने पर कुछ नहीं बोलता और जो जाति का जहर फेलाने में माहिर है,वह गोलवलकर उनके पास क्यों आया? डॉक्टर अंबेडकर ने उनसे सवाल पूछा कि गोलवलकर आज हमारे पास आने की क्या जरूरत पड़ गई? गोलवलकर ने बताया कि महाराष्ट्र में ब्राह्मणों की हत्याएं हो रही है आप उन्हें बचाने के लिए कोई सख्त कदम उठाए।

डॉक्टर अंबेडकर ने उनसे कहा कि वह स्थिति पर कड़ी नजर रखे हुए हैं किंतु गोलवलकर आप मुझे यह बताओ कि वह कौनसे कारण है जिनकी वजह से ब्राह्मणो की हत्याएं हो रही हैं। हम देश के किसी भी नागरिक की हिंसा के पक्ष में नहीं हैं । गोलवलकर ने जवाब दिया कि गांधीजी की हत्या के कारण ब्राह्मणों पर हमले हो रहे हैं। डॉक्टर अंबेडकर ने  पुनः कहा कि गोलवलकर आपकी बातों में कोई सच्चाई नजर नहीं आ रही है। यह सब जाति व्यवस्था के कारण हो रहा है। जिसके जन्मदाता आपके पुरखे है आपके लिए मेरा एक सुझाव है कि आप एक संगठन के मुखिया हो। आप जाति प्रथा के विनाश के लिए राष्ट्रहित में कार्य करना शुरू कर दो फिर ब्राह्मण क्या देश के किसी भी नागरिक की हत्या नहीं होगी।

इसलिए जिन लोगों ने वंदना कटारिया के लिए जातिसूचक शब्दों का प्रयोग किया उन्हें दोषी नहीं ठहराया जा सकता। बल्कि अपनी-अपनी जाति पर मूंछ एंठने वाले लोग जो अपने आप को चमार साहब, द ग्रेट चमार कहकर सीना चौड़ा करते है। वहीं जाति को प्रबल बनाते हैं जिसके कारण जातिवादी लोगों के होंसले बुलंद होते हैं फलत: ऐसे लोग ही दूसरे लोगों पर जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हैं। देश के बुद्धिजीवी वर्ग को ऐसे लोगों की खबर लेनी चाहिए जो समाज में जातिप्रथा का जहर फैलाकर वहीं लोगों को न्याय दिलाने का राग अलापते है  जिन्होंने डॉक्टर अंबेडकर द्वारा लिखित पुस्तक “जातिभेद का उच्छेद” नहीं पढ़ा है,उसे पढ़ने की जरूरत है अन्यथा जो लोग ऐसे लोगों का समर्थन करते हैं वही सबसे ज्यादा दोषी है और यदि उन्हें राष्ट्रद्रोही या समाज द्रोही  कहा जाए तो गलत नहीं होगा।


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