अखण्ड हिन्दू राष्ट्र ,राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ,आरएसएस,RSS,Akhand-Bharat
Akhand-Bharat

अखण्ड भारत का लक्ष्य राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपने नए नए भर्ती बच्चो के दिमाक में डालता है। हाफ चड्डी गैंग को मौका मिला है, तालिबान पर हमला करके अखण्ड हिन्दू राष्ट्र का सपना पूरा करने का।

#डरपोक_RSS

फिर यह प्रतिज्ञा करते हैं कि हम भारत को फिर से अखण्ड हिन्दू राष्ट्र बनाएंगे और सारी जिंदगी यह अपने सीने पर हाथ रखकर अपनी उस प्रतिज्ञा को दोहराते हैं। अब भारत में आरएसएस की सरकार है और अफगानिस्तान में राजनैतिक उथल-पुथल है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को आगे बढ़कर अफगानिस्तान को तालिबान से बचाना चहिए, ऐसा चांस फिर कहां मिलेगा।

“मौका है मौसम है दस्तूर भी है”

Himansu kumar

नोट:

  • यह समझ मे नही आता ये भक्त इतने मासुम क्यो है??
  • एक तरफ तो अखंड भारत फिर से बनाना है, दूसरी तरफ अफगानिस्तान को बचा भी नहीं रहे है। ऐसे कैसे चलेगा भक्तों??
  • अखंड भारत के लिए सबको साथ लेकर चलना होगा ।
  • वैसे ये भक्त पाकिस्तान तक ही सीमित रहते है। चीन कब्जा करता जा रहा है, उससे इनको कोई मतलब नही है। RSS ने अपना दुश्मन जान बूझकर कमजोर को चुना है। अगर भक्तों मुकाबला ही करना है तो चीन और तालिबान से करो, फिर अक्ल ठिकाने आये।

अफगानिस्तान पर तालिबान का कब्जा लगातार बढ़ रहा है और अब वे पूर्ण नियंत्रण पा लिए हैं। तालिबान के अफगानिस्तान पर कब्जा के बाद RSS क्या करेगा, RSS का अखण्ड हिन्दू राष्ट्र का सपना टूट जायेगा ?

तालिबान के प्रति देशों का रवैया पल-पल बदल रहा है। संयुक्त राज्य अमेरिका, यूरोप, चीन समेत कई देशों ने फैसला किया है कि वे अफगानिस्तान में हथियारों की मदद से आने वाली किसी भी सरकार को मान्यता नहीं देंगे और इसके बीच खबर यह भी है कि चीन तालिबान को मान्यता देने पर राजी हो गया है।

दोहा में एक क्षेत्रीय सम्मेलन के बाद कतर और कई अन्य देशों ने घोषणा की कि अफगानिस्तान में किसी भी सैन्य अधिग्रहण को मान्यता नहीं दी जाएगी। रिपोर्ट के अनुसार, 10 अगस्त को दोहा में एक बैठक में चीन और पाकिस्तान उन देशों में शामिल थे जिन्होंने कहा कि वे किसी भी हिंसक अधिग्रहण को मान्यता नहीं देंगे।

10 अगस्त को दोहा में अमेरिका, चीन, उज्बेकिस्तान, पाकिस्तान, ब्रिटेन, संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय संघ के साथ बैठक की, इसके बाद 12 अगस्त को भारत, जर्मनी, नॉर्वे, ताजिकिस्तान, तुर्की और के प्रतिनिधियों के साथ एक और बैठक की। दोनों बैठकों में, सभी प्रतिनिधियों ने अफगान सरकार और तालिबान से आग्रह किया कि वे विश्वास पैदा करने के लिए कदम उठाएं और जल्द से जल्द एक राजनीतिक समाधान और एक सामान्य युद्ध विराम तक पहुंचने के प्रयासों में तेजी लाएं।

अफगानिस्तान में तालिबान के बढ़ते दखल के बाद भारत ने गुरुवार को कतर में आयोजित क्षेत्रीय सम्मेलन की बैठक में भाग लिया। नई दिल्ली में अधिकारियों ने कहा कि विदेश मंत्रालय (MEA) के पाकिस्तान-अफगानिस्तान-ईरान डिवीजन के उप सचिव जे पी सिंह ने भारतीय पक्ष से बैठक में भाग लिया। भारत ने कहा कि अफगानिस्तान की स्थिति चिंता का विषय है और उस देश में हिंसा को समाप्त करने के लिए व्यापक युद्ध विराम की उम्मीद है।


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1 COMMENT

  1. आपकी बात सही है यही हो रहा है और लोग सोच नहीं रहे हैं sc.st.obc कैसे जिएंगे कैसे अपनी रोजी-रोटी चलाएंगे आज के युवा नहीं समझ रहे आज के लोग नहीं समझ रहे हैं

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