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स्कूल की किताबो में हमें विज्ञान पड़ने को मिलता है और इसके विपरीत धर्मशालाओ में धर्मग्रंथ, अन्धविश्वास और धार्मिक गुरुओ का उपदेश सुनने को मिलता है, जिसका फायदा वह अपने मतलब के लिए करते है (उदाहरण:-आसाराम, राम रहीम..आदि )।

इसी का परिणाम है कि एक शिक्षित व्यक्ति भी मूर्ख की तरह व्यवहार करता है। सोनू सातवीं कक्षा का छात्र है। उनके गाँव में यज्ञ हो रहा था। यज्ञ में आए धर्मगुरु अपने उपदेश में बता रहे थे कि भगीरथ ने गंगा को स्वर्ग से धरती पर लाए शिवजी के जटाओ के जरिये।

भाषण के अंत में, सोनू ने महात्मा जी से पूछा “मैंने किताब में पढ़ा है कि गंगा हिमालय में गंगोत्री ग्लेशियर से निकलती है।” इस पर महात्माओं ने कहा कि अब जब वे बच्चे हैं, तो वे धर्म की बातों को समझ नहीं पाएंगे। पास में बैठे दूसरे लोगों ने भी सोनू से कहा कि जब तुम बड़े हो जाओगे, तो तुम्हें ये सारी बातें अपने आप पता चल जाएँगी।

दूसरे दिन, सोनू ने अपने क्लास टीचर से पूछा, “सर, महात्मा जी ने जो कहा है, वह आपके द्वारा पढ़ाए जाने का उल्टा है।”

शिक्षक ने यह भी कहा कि आप बड़े होने पर समझेंगे। आज सोनू बड़ा हो गया है, लेकिन उसके लिए इन बातों को समझना मुश्किल है, कौन सच मानता है और कौन झूठ!

आकांक्षा सिंह विज्ञान की छात्रा थी। एक दिन उसकी माँ ने उससे कहा: “तुम प्रतिदिन स्नान करो और सूर्य देव को जल चढ़ाओ।” इससे आप हर चीज में सफलता प्राप्त करेंगे। आकांक्षा ने इस बारे में कहा: – “माँ, तुम्हे पता नहीं कि सूर्य सौरमंडल का एक तारा है कोई भगवान नहीं । पृथ्वी से कई गुना बड़ा है सूर्य ।”

इस पर, आकांक्षा की माँ ने कहा: – “क्या वे सभी मूर्ख हैं जो सूर्य देव को जल चढ़ाते हैं?” आकांक्षा को समझ आया कि उसकी माँ सही बोल रही है या या हमारे स्कूल के गुरूजी !

एक बार भूकंप और तूफान आने के बाद, उदयवीर के दादा ने कहा कि “पृथ्वी शेषनाग के फन पर टिकी हुई है और जब शेषनाग बग़ल में मुड़ता है तो वह चलना शुरू कर देता है।” उदयवीर ने अपने दादा को जवाब दिया कि “दादा जी! मेरी किताब में लिखा है कि पृथ्वी धुरी पर 23.5 डिग्री झुकी हुई है। एक भूकंप तब आता है जब दो टेक्टोनिक प्लेट टकराते हैं।” दादाजी ने युवा उदयवीर को डांटा! की भगवन के बारे में गलत नहीं सोचते है नहीं तो पाप लगेगा । इस तरह के कई उदाहरण हमारे समाज में देखने को मिलते हैं, नई पीढ़ी के विज्ञान के बच्चे इसे समाज रहे है और प्रश्न कर रहे हैं।

विज्ञान तर्क और सबूतों के आधार पर कहता है ताकि स्कूली बच्चे इसे समझें और इसे अपने जीवन में पेश करें। जबकि धर्म से संबंधित पुस्तकें यहां और वहां एकत्रित चीजों का एक संग्रह है, यह अंधविश्वास से भरा है। इस वजह से, बच्चों को समझ नहीं आता कि वे किस पर विश्वास करें।

कुछ लोग कहते हैं कि हमारे पूर्वजों ने इसे माना था, इसलिए हम इसे भी स्वीकार करेंगे। भाई ! तो हमारे पूर्वज जंगल में नग्न घूमते थे, तो अब तुम क्यों नहीं भटकते हो? आपको सूट बूट पहनना क्यों पसंद करते हैं?

विवेकपूर्ण।

एक वैज्ञानिक बनें।

भारत को मजबूत बनाओ!          

अंधविश्वास भगाओ|

आत्मविश्वास जगाओ||

शिक्षित बनो और शिक्षित करो

जब सूरज उगता है तो सूर्य प्रकाश फैलता है,  लेकिन इस प्रकास को देखने के लिए आपको अपनी आंखें भी खोलनी होती हैं।

         रवि राज

   अंतर्राष्ट्रीय भीम सेना

    प्रदेश महासचिव


कोया पुनेम के अनुसार स्वर्ग, नर्क व मोक्ष नहीं होता ।

DNA Report 2001 में साबित हुआ कि उच्च जाति के भारतीय पुरुष यूरोपीय है

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