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कोर्ट की स्थिति-

1.फरवरी 2019 को उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए निर्णय-  2013 से पदोन्नति में आरक्षण के विरुद्ध पिटीशन दायर होता आ रहा था । 2016,2017,2018 में काफी संख्या में गैर अनुसूचित जाति,जनजाति वर्ग के लोगो ने हाइकोर्ट बिलासपुर में पदोन्नति में आरक्षण बैन करने को लेकर सारी याचिकाएं क्लब हो गई, जिसमे 27 से अधिक याचिका लगी थी ।

कोर्ट ने उक्त पिटीशन में सुनवाई करते हुए राज्य शासन को पदोन्नति में आरक्षण प्रदान करने स्वतन्त्रा प्रदान करते हुए माननीय सुप्रीम कोर्ट के निर्णय एम. नागराज 2006 प्रतिवेदित जनरैल सिंह प्रकरण 2018 के शर्तो को पूर्ण करते हुए नए रूल फ्रेम करने को कहा । पदोन्नति में आरक्षण 2003 नियम रोक लगीं । 

2.हाइकोर्ट के निर्णय को पालन किए बगैर अक्टूबर 2019 में पदोन्नति में आरक्षण प्रदान करने गैजेट नोटिफिकेशन जारी

माह अक्टूबर में पदोन्नति में आरक्षण प्रदान करने राज्य शासन द्वारा SC आरक्षण 1% बढ़ोतरी करते निमय 5 में अनुसूचित जाति 13% व अनुसूचित जनजाति 32% आरक्षण का उल्लेख कर गैजेट नीतिनिदेशन जारी हुआ ।

ज्ञात हो कि फरवरी 2019 हाइकोर्ट निर्णय में SC, ST आरक्षण प्रदान करने हेतु नए नियम बनाने को कहा । लेकिन शासन द्वारा बिना ऊचित तैयारी के नियम लागू कर दी ।

3.पुनः माह नवम्बर 29/11/ 2019 को पदोन्नति में आरक्षण रोक लगी।-

पुनः एक बार और गैजेट नोटिफिकेशन के बाद पदोन्नति

में आरक्षण रोक लगाने एक रीट पिटीशन और एक जनहित याचिका 217 जनरल वर्ग के दायर हुई । कोर्ट ने पदोन्नति में आरक्षण रोस्टर बिंदु पर 2माह के लिए रोक लगा दी एवं राज्य सरकार को सुप्रीम कोर्ट के एम नागराज व जनरैल सिंह प्रकरण के आधार पर रूल फ्रेम करने आर्डर पारित किया और उचित सबमिशन पेस करने वक्त दिया।अखबार में पढ़ने के बाद हम कुछ युवाओं ने

उक्त केस में हस्तक्षेप करने योजना बनाई । और पिछला 27 पिटीशन व इस बार दर्जन भर से अधिक याचिकाओं के विरुद्ध सैकड़ो हस्तक्षेप करने का निर्णय लिया ।

हमने प्रभावितो को सोशल मीडिया के माध्यम से हस्तक्षेप करने जागरूकता फैलाई ।

कोर्ट में सुप्रीम कोर्ट के विद्वान अधिवक्ता, डिप्टी एडवोकेट जनरल उतराखण्ड सरकार माननीय मनोज गोरकेला जी,राज्य के सीनियर विद्वान अधिवक्ता माननीय टी दास सर ,युवा एडवोकेट माननीय ललित जांगड़े जी सहित हस्तक्षेप याचिका हाइकोर्ट में स्वीकार करने सोशल जस्टिस लीगल सेल की ओर से दलील दी । कोर्ट ने स्वीकार किया । 

कोर्ट के आदेश एक असर विभागों में- पदोन्नति में आरक्षण रोस्टर बिंदु 2माह के लिए स्टेय लगाने वाले निर्णय को सभी विभागों ने अपने अपने तरह से अर्थ समझा । कई विभाग SC, ST को छोड़कर जूनियर गैर SC, ST अधिकारी कर्मचारियों की पदोन्नति प्रदान करना शुरू कर दिया ।

उक्त मूददे पर कोर्ट में काफी गरमागरमी बहस हुई।सेल की ओर से अधिवक्ताओं ने रेगुलर प्रमोशन में SC, ST को छोड़ा जा रहा है । कोर्ट में स्पष्ट किया । वरिष्ठता के आधार पर पदोन्नति देने को कहा है किसी वर्ग को छोड़ने नही कहा है । हमने केवल रोस्टर बिंदु पर रोक लगाई है ।

और इस तरह लगातार 4 बार सुनवाई हुई ।

आगामी तिथि 16 अप्रैल को निर्धारित थी । निर्णयक फैसला आ सकता था । लेकिन लॉक डाउन के बजह से केस पेंडिंग है ।

4. पदोन्नति में आरक्षण मूददे पर सोशल जस्टिस लीगल सेल की सक्रिय भागीदारी एवं नियमो का विश्लेषण करना-

सोशल जस्टिस लीगल सेल के सक्रिय सदस्यों ने सारे कायदे कानून,विभिन्न सुप्रीम कोर्ट के नियमो व कर्नाटक पदोन्नति नियम रत्न प्रभा कमेटी की तरह यहाँ भी एक कमेटी बनाने सारे SC, ST विधायको को पत्र भेजा ।

परिणामस्वरूप हमारे लेटर पर संज्ञान लेते हुए माननीय  मंत्रियो

ने माननीय cm को नोटशीट चलाई ।

सारे विभाग प्रमुखों को भी पदोन्नति में रोक लगाने या SC, ST वर्ग के लिए  पदोन्नति में आरक्षण सुरक्षित करते हुए सूची जारी करने पत्र लिखा ।

पदोन्नति में आरक्षण प्रदान करने आगे की कार्यवाही

हमारी टीम रत्नप्रभा कमेटी के आधार पर नए रूल बनाने एवं कमेटी गठित करने हेतु शासन को पत्र व्यवहार व मुलाकात करने का प्रयास जारी है ।

माननीय जनप्रतिनिधियों को पत्र प्रेषित किया है ।

माननीय CM साहब से मुलाकात हेतु समय लेने का प्रयास जारी है ।

✍?सोशल जस्टिस एंड लीगल फाउंडेशन (सेल)


आरक्षण पर 10 सवाल और जवाब

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