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Ravana-tamil-nadu

दक्षिण भारत में स्थित एक देश जो भारत से केवल 31 किलोमीटर दूरी है। 1972 तक इसका नाम सीलोन (अंग्रेजी में Ceylon) था। जिसे 1972 के बाद बदलकर ‘लंका’ कर दिया गया और फिर 1978 में इसके आगे सम्मान सूचक शब्द “श्री” जोड़कर लंका से बदलकर श्रीलंका कर दिया गया यानि रावण की लंका। ‘लंका’ एक गोंडी शब्द है जिसका अर्थ होता है ‘उँचा स्थान’।

कोयावंसी लंकापति गोंड राजा रावण मांडवी आर्य-अनार्य की इस लड़ाई में आर्य ने रावण को राक्षस, दैत्य कहा और इसी रूप में चित्रित किया। तुलसीदास रामायण में, रावण को एक क्रूर राजा के रूप में वर्णित किया गया है, जबकि वाल्मीकि रामायण में उल्लेख है कि रावण ने सीता के साथ कुछ भी बुरा या दुर्भावना नहीं किया। बल्कि, रावण ने अपनी बहन के साथ हुए अत्याचारों का प्रायश्चित करने के लिए अपनी बहन के कहने पर सीता का अपहरण किया। राम ने बहुत सुन्दर सूर्पनखा की नाक काट दी और उसे निर्वस्त्र कर दिया। आज भी समाज में राम जैसे लोग मौजूद है, जो खूबसूरत लड़की पसंद आ जाने पर उसे पाने की कोशिश करते हैं और जब वह लड़की मना कर देती है, तो उस पर ‘तेजाब’ फैंक देता है और आश्चर्यचकित, दुष्कर्म तक कर देते है।

जैसे वर्त्तमान देश में निर्भय का क्रूरतम रेप केस, हैदराबाद में महिला डाक्टर दिशा के साथ 4 लोगो ने दुष्कर्म कर मार डाला, साल 1972 में महाराष्ट्र में मथुरा नामकी कोयतुर लड़की का दो सिपाहियों ने दुष्कर्म किया। रामायण जैसे कहानियो में विचार करे, गहन चिंतन, खोजबीन, जांच-पड़ताल करे क्योकि वेदों में, ग्रंथो में और पौराणिक कहानियों में ढ़ेरों गप्प लिखा गया हैं। देवासुर संग्राम में अनार्यो के हरने के बाद विजेता आर्य द्वारा साहित्य लिखा गया और विजेताओं के गप्प को जनता पर थोपा दिया गया। जो कि कालान्तर में एक चिर-स्थायी संस्कृति के रूप में जनता के मन मस्तिष्क में घर कर जाते हैं । “When ideas have gripped the mind, they become a material force”.
बेशक, ये विचार शोषणकारी और दमनकारी हैं, लेकिन जनता इन भ्रांतियों से जूझने के बजाये, इन शोषक विचारों से लड़ने के बजाय उन्हें सच, ईश्वरीय शक्ति, अपरिवर्तनीय मान लेती है। यह स्थिति एक अजीब तरह की मानसिक गुलामी, मानसिक दिवालियापन की निसानी है जो मुक्त विचार, मुक्त चर्चा को रोकता है। एक गतिरोध स्थापित हो होता है जो किसी भी तरह से सच को झूट और झूट को सच साबित कर देता है।   “गतिरोध की इस स्तिथि को तोड़ने के लिए क्रांतिकारी स्पिरिट (भावना) की ज़रूरत होती है –भगत सिंह” ।

विजयदशमी का त्यौहार नवरात्रि के 10 दिन बाद मनाया जाता है, जिसे दशहरा कहा जाता है। इस दिन परंपरा के अनुसार, झूठ पर सत्य की जीत का त्योहार रावण के पुतलों को जलाकर मनाया जाता है। हालाँकि रावण को हमारी संस्कृति में एक खलनायक के रूप में देखा जाता है, लेकिन हमारे देश में कुछ स्थान ऐसे हैं, जहाँ रावण को जलाने के बजाय उसकी गोंगो (पूजा) किया जाती है।

इन 11 रावण के पेनठाने :-

(1) हिमाचल प्रदेश (बैजनाथ)

(2) उत्तर प्रदेश (बिसरख)

(3) उत्तर प्रदेश (जसवंतनगर)

(4) राजस्थन (जोधपुर)

(5) मध्य प्रदेश (मंदसौर)

(6) मध्य प्रदेश (विदिशा)

(7) मध्य प्रदेश (उज्जैन)

(8) महाराष्ट्र (अमरावती)

(9) महाराष्ट्र (गढ़चिरौली)

(10) आंध्रप्रदेश (काकिनाड)

(11) कनार्टक (मंडयाव कोलर)

(1) हिमाचल प्रदेश (बैजनाथ):-

हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में स्थित यह शहर रावण की गोंगो करने के लिए भी जाना जाता है। कहा जाता है कि रावण ने भगवान शिव की तपस्या की थी, इसलिए भगवान शिव ने प्रसन्न होकर उन्हें मोक्ष का वरदान दिया। इसलिए इस स्थान पर इस रावण का पुतला नहीं जलाया जाता है।

(2) उत्तर प्रदेश (बिसरख):-
उत्तर प्रदेश के बिसरख नामक गांव में भी रावण का पेनठाना बना हुआ है, जहां उसका गोंगो होता है । ऐसा माना जाता है कि बिसरख गांव, रावण का ननिहल था । बिसरख का नाम पहले विश्वेशरा था जो रावण के पिता के नाम पर पड़ा था ।    

(3) उत्तर प्रदेश (जसवंतनगर):-

उत्तर प्रदेश के जसवंतनगर में दशहरे पर रावण की गोंगो आरती की जाती है। इसके बाद, लोग रावण का प्रसाद घर ले लाते हैं और तेरहवें दिन रावण का तेरहवीं मानते है।

(4) राजस्थन (जोधपुर):-

राजस्थान में जोधपुर में रावण पेनठाना और उनकी प्रतिमा भी स्थापित है। एक विशेष समाज के कुछ लोग यहां रावण का गोंगो करते हैं और खुद को रावण का वंशज मानते हैं। इस जगह को लेकर अलग-अलग मान्यताएं हैं। कुछ लोग इसे रावण का ससुर कहते हैं।


(5) मध्य प्रदेश (मंदसौर):-
मध्य प्रदेश के मंदसौर में रावण का गोंगो किया जाता है। मंदसौर का असली नाम दशपुर था और वह रावण की पत्नी मंदोदरी का मयका है। इसलिए इस शहर का नाम मंदसौर पड़ा। जैसा कि मंदसौर रावण का ससुराल है, और यहाँ की बेटी की शादी रावण से हुई थी, इसलिए दामाद को सम्मान देने की परंपरा के कारण रावण का पुतला जलाने के बजाय उसका गोंगो किया जाता है। मंदसौर के रूंडी में रावण की एक मूर्ति है, जिसका गोंगो किया जाता है।   

(6) मध्य प्रदेश (विदिशा):-

मध्यप्रदेश के विदिशा जिले में नटेरन तहसील के रावण गांव में रावण का गोंगो होता है। उन्हें ‘रावण बाबा’ कहा जाता है। यहां के ग्रामीणों के अनुसार, जमीन पर रावण का मूर्ति सदियों से जमीन पर लेता हुआ है।

Ravana-vidisha-madhya-pradesh
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(7) मध्य प्रदेश (उज्जैन):-

मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले के एक गाँव में भी रावण को नहीं जलाया जाता, बल्कि उसका गोंगो किया जाता है। यह स्थान उज्जैन जिले के चिखली गाँव में है। कहा जाता है कि अगर रावण की पूजा नहीं की जाती तो गांव जलकर राख हो जाता। इस डर के कारण, ग्रामीण यहां रावण को नहीं जलाते हैं और उनकी मूर्ति का गोंगो करते हैं।

(8) महाराष्ट्र (अमरावती):-

महाराष्ट्र के अमरावती में भी रावण को एक पेन के रूप में मान कर गोंगो करते है। दरअसल, कोयतूर विशेष रूप से फाल्गुन में रावण का गोंगो करते है। इस समुदाय के लोग रावण और उसके पुत्र को अपना पेन मानते है।    

(9) महाराष्ट्र (गढ़चिरौली):-

गढ़चिरौली, महाराष्ट्र की गोंड कोयतूर दशानन – रावण और उसके पुत्र मेघनाद को पेन मानकर गोंगो करते हैं। फाल्गुन पर्व के दौरान गोंड रावण का गोंगो करते हैं। गोंड कोयतुर के अनुसार, वाल्मीकि रामायण में रावण को सही तरीके से प्रस्तुत किया गया। ऋषि वाल्मीकि ने स्पष्ट रूप से उल्लेख किया कि रावण ने सीता के साथ कुछ भी बुरा या दुर्भावना नहीं की। लेकिन तुलसीदास रामायण में रावण को एक क्रूर और दुष्ट राजा बताया गया है।  

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(10) आंध्रप्रदेश (काकिनाड):-

रावण का पेनठाना आंध्र प्रदेश के काकिनाड नामक स्थान पर बनाया गया है, जहाँ पेन शिव के साथ उनका भी गोंगो किया जाता है। यहां, विशेष रूप से मछली पकड़ने वाला समुदाय रावण का गोंगो करता है। इसके बारे में उनकी अलग मान्यताएं हैं।

(11) कनार्टक (मंडयाव कोलर):-
कर्नाटक के मंडया जिले में मालवल्ली तालुका नामक स्थान पर रावण का पेनठाना है, जहाँ लोग उसका गोंगो करते हैं। इसके अलावा, कर्नाटक के कोलार में लोग रावण को शिव के भक्त के रूप में भी गोंगो करते हैं। रावण चरण गुफा ऐहोल मंजूनाथ डोड्डामणि, गजेन्द्रगढ़ / हुबली, कर्नाटक में स्थित है। रावण फाड़ी, ऐहोल में सबसे पुराने रॉक-कट गुफा पेनठाना में से एक है, जो दुर्गा मंदिर परिसर के उत्तर-पूर्व में एक किलोमीटर से भी कम दूरी पर स्थित है। पेनठाना 6 वीं शताब्दी का है। प्रवेश द्वार के सामने एक पवित्र स्तंभ और पेनठाना के गर्भगृह के सामने एक बैठा हुआ नंदी है, जिसमें कई अन्य छोटे स्मारक हैं। गुफा के भीतर तीन वर्ग मण्डप हैं, जो शिव लिंग की विशेषता वाले है और एक आयताकार स्थान द्वारा प्रवेश मण्डप से जुड़ा हैं।


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