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मध्यप्रदेश के मध्य में गोंडवाना का बेजोड़ तथा वैभवशाली रियासत हैं । सांस्कृतिक व प्राकृतिक खुबसुरती के लिए भी यह धरोहर विश्व में प्रसिद्ध हैं । गोंड शासक भुपाल साही सलाम के नाम से भोपाल शहर बसा हैं और आज भी इस महान सम्राट की ऐतिहासिक धरोहर वहां पर स्थित हैं । फिर भी लिखने वाले इतिहासकार मनुवाद को बढ़ावा देने में कोई कसर नहीं छोड़े, गोंडवाना का राज उन्हें दिखाई नहीं दे रहा हैं । हर जगह गोंडवाना का इतिहास को मिटाकर खुद के बिरादरी के नकली बोगस राजाओं के नाम इतिहास लिख वाने यह शातीर लोग हैं, गोंडवंश के राजा महाराजाओं का इतिहास को राजपूत, क्षत्रिय बताकर प्रस्तुत किया, जो सच नहीं हैं । यह हमारे इतिहास के साथ बहूत बड़ा अन्याय हैं ।

कौन जाने हमारे प्रति इनकी इतनी नफ़रत क्यों हैं? जिसे कभी भारतीय पाठ्यक्रम या संदर्भग्रंथ में शामिल नहीं किया गया । इस दुनिया में इतिहास लिखने वालें खुद के बिरादरी के लोगों का इतिहास लिखकर बोल-बाला कर दिया और हम पाठक वाचक बनकर उनकी झुठी इतिहास पर विश्वास करते गये । हम आज तक दुसरों की लिखी हुई दुसरों की झुठी इतिहास को पढ़ते आ रहे हैं, पर असल में हमने कभी सोचा हैं, हमारा गोंडवाना का इतिहास पुरे विश्व में कितना महान था!!!

अब हमें इतिहास को रटना नहीं हैं बल्कि सच्चा इतिहास को दुनिया के सामने लाना हैं । गोंडवाना का इतिहास लिखित न होने के कारण उसे दबाया गया, ज्यादातर हमारा इतिहास मौखिक ही रहा हैं । इसलिये षडयंत्र के तहत हमें दुनिया के सामने कमज़ोर, हताश, दुखी, परेशान, गरीब या लाचार सा बनाकर पेश किया हैं । इसमें कमी दुनिया की नहीं हैं, कमी केवल हमारी ही हैं..जो दौलत की बाजार में राजनीतिज्ञ द्वारा गोंडवाना को निलाम किया गया ।   गोंडवाना आज भी लाखों के दिल में राज कर रहा हैं, उसे कभी बुझाया नहीं जाएगा ।

आज इतिहास के पन्नों से विरल एक गुमनाम गोंड शासक की इतिहास को उजागर करने की कोशिश करते हुए, महाराष्ट्र की साहित्यिका उषाकिरण आत्राम, गोंडी लेखक नंदकिशोर नैताम और भोपाल से हरीलाल वट्टी, सुजाता कुंजाम, ज्योती पदाम के मार्गदर्शन और इनकी टीम को इस स्थान से रूबरू होने का मौका मिला ।   आईये साथियों, गोंडवाना की उस महान शासक की बात करते हैं, जिनकी वीरता की कहानी सारा जहां जानता हैं ..जिसके शासनकाल में प्रजा सुखी-संपन्न जीवन यापन कर रही थी, जिनके राज में किसी दरवाजे पर ताले नहीं थे, मतलब चोरीयां नहीं होती थी । किसी की अब्रू लुटी नहीं जाती थी..

वह महान कुशल प्रशासक एवंम् शासक का नाम था नरसिंहदेव गोंड सलाम…. मध्यप्रदेश की धरती पर बसा हुआ सलामनगर किसी जमाने में मध्य गोंडवाना का राजधानी हुआ करता था । समय के चलते इसका नाम जगदीशपुर और अब इस्लामनगर रखा गया हैं, पर इस गोंड नगरी का हकदार गोंड शासक नरसिंहदेव सलाम हैं जिसे इतिहास के पन्नों से अलग किया । इस नगर में विशाल किला स्थित हैं, इस किले का निर्माण भोपाल रियासत के वारीस नरसिंहदेव गोंड नामक शासक ने किया हैं, जो गोंडशासन काल के स्थापत्य, कलाकृती के प्रेमी थे । यहां के बड़े-बड़े इमारते है । महल की कहानियों में गजब की गोंडी मिठास हैं, जो कहती हैं की “यह तुम्हारा ही राजपाट हैं…”

यहां पर चमन महल और रानी महल ये दो आकर्षणीय महल हैं । चमन महल के अंदर एक बहोत बड़ा शिस महल भी हैं जिसमें बहोत सारे दरवाजे हैं । इन महलों में गोंड कलाकृती और स्थापत्य कला का बेजोड़ एवंम् अनोखा नमुना देखा जा सकता हैं, गोंड स्थापत्य के साथ अनेक शिल्पकला की समृद्ध झलकियां देखी जा सकती हैं । इस किले में मौजूद रानी महल भी बेहद आकर्षक हैं । स्थानिय लोगों का कहना हैं कि नरसिंहदेव गोंड सलाम की सात रानीयों थी, जो बहोत खुबसुरत थी ।

गोंड शासक ने अपनें रानीयों के लिए यह महल बनवाया था । इस महल में राजा और उनकी रानीयां की मोहब्बत की दास्तां जुड़ी हुई हैं, उनके मोहब्बत के कई अफसाने इस नगर में आज भी जीवित हैं । महल के बीच आंगन हैं, जो महल को और भी सुशोभित करता हैं । बाजू में सदा बहने वाली झील हैं, शुद्ध हवे के लिए कई झरोके हैं..इससे पता चलता हैं की राजा की रानीयां महल में कितने शौकत के साथ रही होंगी ।

सलामनगर का किला गोंड शासक की वीरता, साहस और मोहब्बत से रूबरू कराती ही हैं साथ ही साथ अपने गौरवशाली इतिहास की कहानी भी बयां करता हैं । किले के परिसर में अनेक कुए हैं, जो समय के अनुसार नष्ट हो चुके..पानी संवर्धन, संचयन के मोल का प्राचीन काल से ही गोंड राजाओं में कितना महत्व था, इसकी छाप आज भी वहां पर मिले कुएं और झील से पता चलता हैं ।

सलामनगर के रानीयों को श्रृंगार का बहोत शौक था, राजा ने उनके लिए खास तरह का कमरा बनवाया जो आज भी वहां मौजूद हैं । उस कमरे के दिवारों पर अनेक दर्पन रखे हुए हैं ताकी सजते-सवरते समय रानीयां खुदको चारों तरफ देख सके, अपनी खुबसुरती को महसुस कर सके । वह दर्पनयुक्त कमरा वहां पर आज भी देखा जा सकता हैं । नरसिंहदेव गोंड के अधीन कई रियासत, परगना थे । वह पराक्रमी राजा होने के साथ साथ कुशल प्रशासक भी थे । प्रजाहित के अनेक कार्य उन्होंनो अपने शासनकाल में किया ।

तालाब, कुए व अधिक संख्या में झीले जल विस्तार हेतु बनवाई । बड़े-बड़े सरोवर बनवाकर जनता की आधारशील रखी । इससे गोंडराजा का दुरगामी सोच कितना महत्वपूर्ण था इसका अंदाजा लगाया जा सकता हैं । इस समृद्धशाली गोंडवाना रियासत पर मुगलों की दृष्टी थी, इस वैभव को लुटने के लिए अफगानी सेनापती दोस्त मोहम्मद खांन ने कई प्रयास किया पर वह हासिल नहीं कर सका । इतिहास गवाह हैं, जितने भी मुगल शासक हमारे देश में आये वो सिर्फ और सिर्फ गोंडवाना का खजाना लुटने हेतु आये थे, जिनमें मोहम्मद गझनी, औरंगजेब, तैमुर लंग, चंगेझ खान, आसफ खान, बाबर हो या अकबर…

ये सब मुगल वंश के लुटेरे थे और लुट के ही मक्सद से इस धरोहर पर आये थे । उसी तरह दोस्त मोहम्मद खान भी यहां का खजाना लुटने आया…सलामनगर किले को जीतने की जी तोड मेहनत किया, अलग-अलग तरीको से किले पर आक्रमण किया लेकीन गोंडराजा के सामने उसे घुटने टेकने पडा । आमने सामने की लड़ाई में ये अफगानी फिरंगी कभी इस किले को जीत नहीं पाया ।

मुगलों के लिए नरसिंहदेव सलाम असहनीय हो गये थे…दौलत(धन) के अधीन कुछ सिपाई मुगलों के साथ साठगांठ कर किले की भेद दोस्त मोहम्मद खान को बता दिये, जिनके कारण गोंड शासक नरसिंहदेव सलाम और उनके वफादार सिपाईयों को धोके से पकडा गया और भोपाल के नजदीकी डैम पर ले जाकर राजा समेंत उनके सिपाईयों को मुगलों ने हलाल किया, मतलब मार दिया । खून की धारा बहने लगी…इस डैम को वर्तमान में हलाली डैम से जानते हैं । मौत का यह खबर सुनते ही राजा के सात रानीयां और किले में मौजूद मातृशक्तीयां भी दुश्मन के हाथों पड़ने से अच्छा खुदकुशी करना बेहतर समझा और किले के नजदीकी झील पर कुदकर जान दे दी ।

गोंडवाना कालीन यह विरासत हमेशा के लिए शांत हुआ । किसी जमाने में रानीयों की हसीं से पुरा महल दहल उठता था वह रानी महल भी स्तब्ध हुआ । सोने की चिड़िया कहे जाने वाली गोंडवाना धरोहर को लुटा गया, सलामनगर रियासत की आब्रु को सरेआम नोचा गया ।

तबसे वह सलामनगर से इस्लामनगर नाम से परिचित हैं । पर असल में यह नगरी नवाबों का नहीं गोंडों का हैं । कभी हम बादशाह बनकर इस देश की तख्त पर शान ए शौकत के साथ बैठा करते थे… राजा महाराजा हुआ करते थे, इस देश  में हजारों साल शासन किये । आज हम राजा से फकीर कैसे बन गये?? हम गरीब क्यूं हुए?? आर्य, अरब, हुन, शक यूनानी, मुगल इनसे पहले यहां पर कोयतूरों का साम्राज्य था जिसे गोंडवाना के नाम से जाना जाता हैं । बहुत दुख होता हैं, ऐसे वैभवशाली महान गोंडवाना को भारत के इतिहासकारों ने भुला दिया ।

गोंड शासक के पराक्रम और वीरता को जातीवादी सोच रखनेवाले मनुवादी साहित्यकार आम जनता तक आने ही नहीं दिया । सच्चा इतिहास को दफनाया गया । इतनी बड़ी साजिश उस समय हमारे साथ रचा गया, जिसे हम आज भी नहीं जानते…. साथियों, अब हमें लिखना होगा, कलम की धार से खोया हुआ गोंडवाना साम्राज्य को जनजन तक पहुंचाना होगा । गोंडवाना के सभी विरों को नमन, उनके बलिदान को समाज हमेशा याद रखेगा…हम प्रण लेते हैं कि गोंडवाना का नाम मरते दम तक मिटने नहीं देंगे ।

!!सेवा जोहार,जय गोंडवाना!!             

बिच्चू वड्डे       

भामरागढ़ (गढ़चिरोली)


भोरमदेव गढ़ पेनठाना गोंडवाना की शान

असीरगढ़ का किला (आसरागढ़) जिला बुरहानपुर

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