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Minimata

11 अगस्त, मिनिमाता जी की पुण्यतिथि (परिनिर्वाण 11 अगस्त, 1972)

मुख्य घटनाओं का क्रम:
मिनिमाता जी (Minimata) का जन्म 13 मार्च 1913 (होली दहन दिवस) असम के नगांव (चाय बागान दौलतपुर) में हुआ था। 1901 से 1910 के बीच छत्तीसगढ़ के भीषण अकाल के कारण उनके परिवार को छत्तीसगढ़ से असम प्रवास करना पड़ा था।
उन्होंने 1932 में गुरु आगमदास जी (जन्म – 1895, निर्वाण – 1952) से शादी की। गुरु अगमदास जी ने अपने जीवन में चार शादियां की थीं:
1915 में पुन्नी माता से।
सन 1927 में सुनयना माता (एक कन्या मंथरा का जन्म हुआ, जिसका विवाह बेमेतरा जिले के गोफे लाल बघेल जी से हुआ था)।
1932 में मिनिमाता जी (बचपन का नाम मीनाक्षी) से।
मिनिमाता के बच्चे नहीं थे।

उसके बाद, उन्होंने करुणा माता जी (सुपुत्री – रतिराम जी गोटिया) से एक पुत्र (विजय कुमार गुरु, उनकी मृत्यु से पहले पैदा हुए) के लिए शादी की।
1952 के लोकसभा उपचुनाव में, वह छत्तीसगढ़ (रायपुर) से पहली महिला सांसद के रूप में चुनी गईं और लोकसभा में आईं और जांजगीर लोकसभा के लिए आजीवन सांसद रहीं। वह लगातार पूरे छत्तीसगढ़ का दौरा करते थे। 1969 में आदिवासी कल्याण केंद्र भी कोरबा में स्कूल गयी।
मिनिमाता को वर्ष 1952, 1957, 1962, 1967 और 1971 में कांग्रेस पार्टी के टिकट पर सांसद चुनी गई थी।

मिनीमाता बतौर सांसद जब वे दिल्ली में रहती थी उनका वास स्थान धर्मशाला जैसा था। मिनीमाता को छत्तीसगढ़ी, हिंदी और अंग्रेजी भाषा आता था। समाज में पिछड़ापन, कुरूतियों और छुआछूत को दूर करने के लिए अपना सारा जीवन समर्पित कर दिया। उन्होंने दहेज़ प्रथा, गरीबी, बाल विवाह और अशिक्षा को दूर करने का प्रयास किया ।
11 अगस्त 1972 की आधी रात को एक विमान दुर्घटना में उनकी समय से पहले मृत्यु हो गई। तब से, “मिनिमाता स्मृति दिवस” हर साल 11 अगस्त को पूरे छत्तीसगढ़ में मनाया जाता है। “प्रतिभा प्रोत्साहन दिवस” कार्यक्रम 11 अगस्त 1984 को कोहका (भिलाई) में गुरु घासीदास सेवा समिति द्वारा शुरू किया गया था। (विस्तृत जानकारी के लिए 7 फरवरी, 2005 को “वेलकम मैगजीन” का पहला अंक पृष्ठ 36 देखें)।

13 मार्च को जयंती शुरू करने का श्रेय स्वर्गीय घनराम ढिंडे जी (1 जनवरी, 1954 को जन्म, 21 सितंबर, 2016 को निर्वाण) के नेतृत्व में “सत्य दर्शन संस्थान” को जाता है। होली दहन के दिन जयंती मनाने का सिलसिला भी शुरू हो गया है.

आइए मिनिमाता जी के नजरिए से SWAT विश्लेषण को समझने की कोशिश करते हैं:

ताकत
*अध्ययन में विशेषज्ञ।
*गुरु परिवार का महत्व।
*राजनीतिक युद्धाभ्यास का ज्ञान।
* छत्तीसगढ़ के साथ समाज में लोकप्रिय।
* बीस वर्षों तक लगातार डिप्टी बने रहना (राजनीतिक शक्ति की उपेक्षा करना एक बड़ी भूल है)।
*शारीरिक स्वास्थ्य और समय की उपलब्धता भी उनकी सबसे बड़ी ताकत थी।
*उनका मानवीय जुड़ाव बहुत मजबूत था।

कमज़ोरियां
*पारिवारिक जिम्मेदारियां।
*पति के साथ रहने में सक्षम न होना।
*असंगठित वातावरण हो।
*शुरुआत में अनुभव की कमी।

अवसर
* तत्कालीन राजनीतिक दल “पार्टिडो डेल कॉंग्रेसो” के साथ।
* यदि पुत्र (विजय कुमार गुरु जी) 1952 में वयस्क हो गए होते तो शायद मिनिमाता जी गुरु आगमदास जी के राजनीतिक उत्तराधिकारी न बन पातीं।
*सहानुभूति की लहर।
*छत्तीसगढ़ की पहली महिला डिप्टी।
* पति के अनुभव का लाभ उठाएं।
*संसद में पर्याप्त सहयोग।
*महिला होना चर्चा का विषय है।
* बीस साल, व्यापक राजनीतिक और सामाजिक अनुभव।

चुनौतियां
*शुरू से ही चुनौतियां रही हैं।

  • 1952 के लोकसभा उपचुनाव में सबसे बड़ी चुनौती चौथी पीढ़ी के उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी गुरु मुक्तवान दास जी थे।
  • गुलामी की बड़ी समस्या और समाज की लाचारी।
  • 1968 में गुरवीन डाबरी कांड और बगकापा गांव ने एक बड़ी चुनौती पेश की।

मिनिमाता जी ने समाज और देश के हित में ताकत और अवसरों का भरपूर लाभ उठाया। अपनी कमजोरी (कमजोरी) को दूर कर अपनी ताकत को और मजबूत करें। उनके पास खतरों (चुनौतियों) को अवसरों में सफलतापूर्वक बदलने की तकनीक थी। इसलिए आज मिनीमाता जी की शोहरत और नाम है।
छत्तीसगढ़ की धरती पर आज भी ऐसी मिनीमाता जी की बहुत आवश्यकता है, जिन्हें खोज कर स्थापित करना होगा।

ममतामयी मिनिमाता जी को नमन एवं विनम्र श्रद्धांजलि।


रामजी गोंड कोयतूर स्वतंत्रता सेनानी

सिंगौरगढ किला जिला दमोह

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