manusmriti-dahan-divas
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25 दिसंबर 1927 को सिंबल आफ नालेज बाबा साहब डॉ भीमराव आंबेडकर ने मानवता विरोधी ब्राह्मणों द्वारा लिखित धर्म ग्रथों में से एक मनुस्मृति का दहन करके मनुस्मृति दहन दिवस मनाकर के करके जातिवाद, अंधविश्वास और पाखंड के खिलाफ आंदोलन का भीमारम्भ किया था ।

25 दिसंबर 1927 को सभी आंबेडकरवादी और सभी बुद्धिस्ट मानवता विरोधी निम्नलिखित धर्म ग्रंथों को जलाकर भारत को जातिवाद, अंधविश्वास और पाखंड से मुक्त करने की शपथ खायेंगे।

1-वेद *- ब्राह्मणों ने वेदों के माध्यम से मनुष्य को वर्ण व्यवस्था में बांट कर मानवता के खिलाफ लिखा है और वेदों में हत्या और बलात्कार को उचित बता कर मनुष्य को क्रूर बना दिया है इसलिए हमें वेदों को भी जलाना होगा।

*2-रामायण – रामायण एक सामाजिक विषमता पैदा करने वाला काल्पनिक ग्रंथ है जिसमें शूद्रों और महिलाओं को प्रताड़ित करने की शिक्षा दिया है और ऊंच नीच भेदभावपूर्ण जातियों का बढावा दिया है और जातिगत अत्याचार किया है इसलिए हमें रामायण को जलाने की जरूरत है।

*3-भगवतगीता * भगवतगीता टोटली काल्पनिक गप्प है ब्राह्मणों ने भगवतगीता के माध्यम से लोगों को दिमाग रहित बनाए रखने की कोशिश किया है जैसे कि कान ? से बच्चे पैदा होना सूर्य ☀ से बच्चे पैदा होना और इस प्रकार के अनगिनत मूर्खतापूर्ण कहानियाँ और गप्प लिख कर लोगों को मानसिक रोगी बना दिया गया है इसलिए भगवतगीता को जलाने की जरूरत है।

3-शास्त्र, पुराण, उपनिषद

आदि जितने भी ब्राह्मणों द्वारा लिखित ग्रथ है सभी इंसानों को मूर्ख बनाये रखने के लिए ही लिखे गए हैं जिन्हें पढने की नहीं जलाने की जरूरत है और पढने के लिए भारतीय संविधान, ज्योतिबाराव फुले द्वारा लिखित गुलामगीरी पढें, पेरियार रामास्वामी नायकर और पेरियार ललई सिंह यादव द्वारा लिखित सच्ची रामायण की चाभी पढें।

? 25 दिसंबर को हम मनुस्मृति दहन दिवस के रूप में मनायेंगे।

मनुस्मृति दहन दिवस कैसे मनायें??

रात को लगभग 8 बजे अपने अपने घरों में मनुस्मृति, रामायण, भगवतगीता, वेद, पुराण आदि मानवता बिरोधी धर्म ग्रंथों की प्रतियां जलायेंगे और लगभग 9 बजे तक

पूरे परिवार के साथ बैठकर सिंबल आफ नालेज बाबा साहब डॉ आंबेडकर का स्मरण करे की कैसे उन्होंने हमें मानसिक गुलामी से आजादी दिलाई ।

?NATIONAL AND INTERNATIONAL BUDDHIST SOCIETY ?

?बौद्धाचार्य डॉ एस एन बौद्ध ✍️


राणा पूंजा भील भोमट के राजा

गायत्री मंत्र का सच

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