martin luther king
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एसटी, एससी, ओबीसी के बहुजन समाज घमंड में जी रहे हैं:-

1. बाबासाहेब अम्बेडकर ने अपने बहुजनों के लिए जो “संविधान” बनाया, लेकिन आज संविधान की रक्षा के लिए बहुत कम ‘बहुजन’ बचे हैं।

2.’आरक्षण’ जिसका विवरण संविधान में है, जहां शासन बहुजन समाज का होना चाहिए, वहाँ ब्राह्मण वर्ग शासन कर रहा है। आरक्षण हटाने के लिए ब्राह्मण वर्ग दूसरी चाले चल रहा है जैसे शासकीय संस्था को ‘निजी कंपनियों’ को बेच रहे है और जहाँ केवल ब्राह्मण काम करेगे।

3.’सचिवालय’ जहाँ डॉ०लोहिया ने एसटी, एससी, ओबीसी का नेतृत्व किया, वहाँ एसटी, एससी, ओबीसी के अधिकार के लिए एक भी सचिव नहीं है ….?

4.’कृषि क्षेत्र’ में जहां 90% लोग 40 साल पहले तक काम करना चाहते थे, वहाँ आज केवल 10% ही रह गए हैं क्योंकि कृषि पर निर्भर बड़ी आबादी ओबीसी वर्ग थी !!

5.’मीडिया जगत’ में जाति की स्थिति यह है कि एसटी, एससी, ओबीसी का एक भी प्रवक्ता नहीं है …. !!

6.”देश” में बहुजन 85% हैं लेकिन देश के “कैबिनेट मंत्रालय” में 1% भी नहीं है …. !!

7.”कोर्ट” में 90% मामले ओबीसी एससी एसटी के हैं। लेकिन 1% से भी कम वकील और जज एसटी, एससी, ओबीसी के नहीं है !! भारत के सुप्रीम कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के 80% जज ब्राह्मण जाति के हैं, और एक ब्राह्मण कभी भी न्याय का पर्याय नहीं हो सकता क्योंकि यह उनके डीएनए में नहीं है…।

8.यूनिवर्सिटी, स्कूल में 85% बच्चे ओबीसी एससी एसटी के हैं, लेकिन 1% भी डीन, वीसी, प्रोफेसर, लेक्चरर, ओबीसी एससी एसटी नहीं है !!

9.एसटी, एससी, ओबीसी 85% टैक्स देते है,जिससे देश की अर्थव्यवस्था चलती है। लेकिन टैक्स के पैसो का मज़ा 3% आबादी वाले लोग उठा रहे है ….. !!

10.उनका पैसा चुराकर देश के कुछ लोग खा रहे हैं और सरकार मध्यस्थता कर रही है (दलाली)… !! भारत ओबीसी एससी एसटी यह हमारा है और हमें भारत के सभी भारतीयों और सभी संसाधनों पर अधिकार होना चाहिए !!

11.हमेशा हिन्दूओं की ओर से वोट मांगते रहे है…… जब ओबीसी एससी एसटी अगर आप अधिकारों और प्रतिनिधित्व की बात करते हैं, तो वे आप पर जातियों का आरोप लगाते हैं .. !!

12.देश में 29 राज्य हैं। 25 राज्यों में ओबीसी-एससी-एसटी की जनसंख्या 85% से अधिक है, लेकिन केवल 5 मुख्यमंत्री ओबीसी एससी एसटी के है ….. !!

13.बहुजनो के देश में “बहुजन” सुरक्षित नहीं है।

14.ओबीसी एससी एसटी से पूछो कि किस जाति के हो ?

जवाब कुछ इस तरह दिया जाता है:–

किसी ने कहा :– यादव /अहीर/राव/गोप/चौधरी…

किसी ने कहा :– पटेल/कुर्मी…

किसी ने कहा :– कोईरी/कुशवाहा/महतो…

किसी ने कहा :–जाट/चौधरी/ गुर्जर आदि….

किसी ने कहा :– पाल, गुर्जर, शाक्य, कहार, धानुक, रेड्डी, कम्मा, लिंगायत, सैनी…… सब लोगों ने अलग – अलग बताया ।

15.लेकिन ब्राह्मणों से पूछो तो एक ही जवाब आता है……”ब्राह्मण “……!!

16.’दिल्ली उच्च न्यायालय’ में एक ओबीसी ने इस बात पर जनहित याचिका दायर की थी कि मंदिर में एक ही जाति के पुजारी क्यों है।

17.सुप्रीम कोर्ट ने जनहित याचिका को खारिज करते हुए कहा कि “वेद और पुराण” के अनुसार, ब्राह्मणों को मंदिर का अधिकार है क्योंकि फैसला सुनाने वाले जज ब्राह्मण थे!

18.यदि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के अनुसार, वेदों और पुराणों में योग्यता और समानता का अधिकार है, तो भारत में समानता और संविधान निषिद्ध है … !!

19.भाजपा शासित गुजरात में, एक “दलित” को एक गाड़ी में मार डाला गया क्योंकि उसके मृत गाय को नहीं उठाया था … …. और उन्होंने उसका मूत्र पीने से मना कर दिया ….. !! लेकिन उन्होंने इस अत्याचार के लिए कार्रवाई भी नहीं की, वे अपने अत्याचारों को फिर से फैला रहे हैं क्योंकि … गुंडे भी वही है, पुलिस स्टेशन, पुलिस स्टेशन, एसपी-कलेक्टर,

आगे बडे तो …. वकील और नेता, यहां तक ​​कि न्यायाधीश भी उन्ही की जाति के हैं ….. !!

20.आरएसएस का तमाशा यह है कि वे वोट के लिए हिंदू धर्म की ओर रुख करते हैं, लेकिन जब देश के 85% हिंदू आरक्षण की मांग करते हैं, तो उन्होंने उन्हें गोलियों से भून दिया … !! (गुजरात में 18 पटेल युवकों को गोली मार दिया गया)

21.जब यू.पी. में एसडीएम के बारे में 56 फर्जी खबरें जो मीडिया और सोशल नेटवर्क में दिखाई दीं, एक विशेष जाति के लोग प्रभावित हुए। चूंकि मामला यादवों से जुड़ा था, इसलिए अन्य जातियां भी हर तरह से उनके साथ थीं। क्योंकि अब तक यादव के विरोध में सभी को एक बैनर के नीचे पाया है। अब लगभग 110 ब्राह्मणों को ‘उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग’ में चुना गया है। कोई शोर नहीं है, हर कोई चुप है। जिसका अर्थ है कि ब्राह्मण अधिकारी स्वीकार्य हैं। अगर यादव बनते हैं, तो वह भी पिछड़े और दलित का विरोध करेंगे।

22.जब ‘अनिल यादव’ उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष थे, तब इलाहाबाद की सड़कों पर बहुत हंगामा हुआ था। जुलूस, तोड़फोड़ की गई और पूरे ‘यादव समुदाय’ के साथ दुर्व्यवहार किया गया। उपद्रवी यहीं नहीं रुके, उन्होंने गाय बैल पर भी लाठी से प्रहार किया, क्योंकि वह यादव नामक पिछड़ी नस्ल से आया था। रात भर ‘लोक सेवा आयोग’ को ‘यादव सेवा आयोग’ के रूप में प्रचारित किया गया। अब मिश्रा सचिव हैं और 110 ब्राह्मण चुने गए हैं। लेकिन आयोग ‘ब्राह्मण लोक सेवा आयोग’ नहीं बना।

23.यदि कोई यादव किसी अन्य यादव के बाद उच्च पद पर आता है, तो भारत में ब्राह्मण मीडिया इसे “यादववाद” मानता है।

24.ओबीसी लोगों के खिलाफ साजिश पर ओबीसी जानकारी जागृत नहीं है, ओबीसी लोग पढ़े-लिखे लोग हैं, ब्राह्मणों ने जो लिखे उसे पढ़ा है … इसलिए आज ब्राह्मण व्यवस्था ने उनके अधिकारों को छीन लिया है।

25.संविधान कहता है कि आरक्षण (प्रतिनिधित्व )

जिसकी जितनी हिस्सेदारी उसकी उतनी भागीदारी

ब्राह्मण कहते हैं यह खैरात है ….. ओ.बी.सी. के लिखे पढे़ लोगों नें बाबा साहब द्वारा लिखा संविधान ब्राह्मणों की बातों में आकर पढा ही नहीं, इसलिए आज यह हालात है कि :– 52% ओबीसी को 27% आरक्षण (प्रतिनिधित्व ) है, जबकि यह संविधान के विरोध में है, संविधान कहता है लोकतंत्र में जनसंख्या के हिसाब से प्रतिनिधित्व लोकतंत्र का प्राण है, इसलिए भारतीय लोकतंत्र में ओ.बी.सी. कि 52% शासन प्रशासन का हिस्सा होना चाहिए। ब्राह्मण कभी भी न्यायालय ने नहीं होना चाहिए क्योकि न्याय उनके DNA में नहीं….. ।  

परन्तु आज आजादी के सत्तर साल बाद ब्राह्मणवादी सरकारों नें इसका non-implementation किया ओर जो हक अधिकार SC/ST को 1932 में ही मिल गये थे वह हक अधिकार ब्राह्मणों नें ओबीसी को 1992 मतलब साठ साल बाद मिले भारतीय हाईकोर्ट और सुप्रीमकोर्ट मे 80% जज ब्राह्मण जाति से है, और ब्राह्मण कभी न्याय का पर्याय नहीं हो सकता क्योंकि ये उसके DNA में ही नहीं….. ।

26.अब ओबीसी के लिखे-पढे़ लोगों से निवेदन है कि वह ब्राह्मणों के द्वारा हिन्दू नाम के षड्यंत्र से बाहर निकलें और अपने आस-पास नजर दौड़ा यें …स्वतंत्र सोच रखकर संविधान में दिये आर्टिकल 340 को समझें और ‘काका कालेलकर कमीशन’ क्या था वह जाने । जानिए काका कालेलकर आयोग को लागू क्यों नहीं किया गया, इसे समझें के लिए मंडल आयोग क्या है, यह जानने की कोशिश करें कि मंडल आयोग इतने सालों तक लागू क्यों नहीं हुआ। ओ.बी.सी. को जब मंडल कमीशन लागू हो रहा था तो उसके विरोध में किन लोगों नें राष्ट्रीय लेवल पर विरोध किया उनको जाने समझें फिर भले ही भाईचारा निभाना ।

27.सन 1992 में मंडल कमीशन लागू होने के बाद भी उसका non- implementation किया और आज ओबीसी को आज 2016 तक 52% होने के बावजूद 5% ही प्रतिनिधित्व मिला है तो ओबीसी को यह समझना जरूरी है कि शासन प्रशासन किन लोगों के कब्जे में है ?

कौन लोग हैं जो ओ.बी.सी. के लोगों के हक अधिकार छिन रहे हैं ? इसलिए ओ.बी.सी. के लिखे-पढे लोगों से निवेदन है कि ब्राह्मणों के हिन्दू नाम के षड्यंत्र से निकल कर पढे़-लिखे बनें । स्वतंत्र सोच विकसित करें व अपनी आनेवाली पीढ़ियों को इस षड्यंत्र में ना झोंके और उनके हक अधिकार सुरक्षित करने की लड़ाई लड़ें ।

28.अंग्रेजों ने “ब्राह्मण न्यायाधीशों पर प्रतिबंध” क्यों लगाया? : – ब्रिटिश काल में कलकत्ता उच्च न्यायालय में प्रीवी काउंसिल हुआ करती थी। अंग्रेजों ने यह नियम स्थापित किया था कि कोई भी ब्राह्मण प्रीवी परिषद का अध्यक्ष नहीं बन सकता है। क्योंकि ….. अंग्रेजों ने लिखा है कि ब्राह्मणों का कोई न्यायिक चरित्र नहीं है। न्यायिक चरित्र का अर्थ है न्याय की भावना। जब एक न्यायाधीश दोनों पक्षों के तर्क को निष्पक्ष मानता है, सभी दस्तावेजों को देखता है और न्याय देता है जो कानून और न्याय के सिद्धांत के अनुसार उचित और न्याय नहीं है। ऐसा न्यायिक चरित्र ब्राह्मणों के बीच नहीं पाया जाता है,जो अंग्रेजों ने कहा। वर्तमान में, लगभग 600 उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश हैं, जिनमें से 582 न्यायाधीशों के पद ब्राह्मण और उच्च जाति के लोगों के हैं। जब तक न्यायपालिका प्रतिनिधि नहीं होगी, हम न्याय नहीं करेंगे। इसलिए, न्यायपालिका का प्रतिनिधि होना आवश्यक है।

29.भारत की न्यायपालिका पर हिन्दुओ का नहीं बल्कि ब्राह्मणों का कब्जा है, और ब्रिटिश लोग कहते थे कि, “BRAHMINS DON’T HAVE A JUDICIAL CHARACTER” यानि “ब्राह्मण का चरित्र न्यायिक नहीं होता, वो हर फैसला अपने जातिवादी हितों को ध्यान मे रखकर देता है।”

30.न्यायाधीशों की नियुक्ति में, कॉलेजियम का सिद्धांत दुनिया के किसी भी लोकतांत्रिक देश में मौजूद नहीं है, यह केवल भारत वर्ष में है। इसका कारण यह है कि बहुसंख्यक बहुजन लोगों पर अल्पसंख्यक ब्राह्मण अपना नियंत्रण बनाए रखना चाहते हैं। बहुसंख्यक, जो धीरे-धीरे अपने अधिकारों के लिए जाग रहे हैं, ब्राह्मणों के लिए संकट पैदा कर रहे हैं। इस संकट से बचने के लिए, ब्राह्मण जो न्यायपालिका में बैठते हैं, न्यायपालिका का उपयोग एससी, एसटी, ओबीसी और अल्पसंख्यक के खिलाफ करते हैं।


भारतीय न्यायपालिका में वंशवाद की पोषक

26 नवंबर संविधान दिवस | डॉ० बाबासाहब अंबेडकर

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