how-adivasi-privation-from-corona-safety
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?जिम्मिदारीन याया ना सेवा – सेवा? ?बुढ़ालपेन ता सेवा – सेवा?    

(1) प्रत्येक नार्र के माटी गांयता, नार्र पेन्क, पुजार्क, पेरमा, वड्डे, सिरहा (बैगा), पटेल, नार्र के प्रमुख सियान मिलकर, नार्र के जिम्मिदारीन याया, बुमयार पेन, रावपेन्क एवं अपना – अपना पुरखा पेन को सेवा – अर्जी कर इस महामारी (रहू) कोरोना वायरस ने हेतु नार्र के शरहद (सीमांकन) के अन्दर प्रवेश होने से बचाने के लिए सेवा – अर्जी की जाए ।

पहले जब हमारे पास स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं थी तब भी हमारे पुर्वजों ने इसी तरह की कई भंयकर बड़ी – बड़ी बीमारियों से लड़कर जीत हासिल किए हैं, अभी तक विश्व में इस बीमारी का वैज्ञानिकों के द्वारा वेक्सीन तैयार नहीं किया गया है, तब तक हमारी “रूढ़ी व प्रथा” का भी प्रयोग अवश्य करें । लेकिन कुछ हमारे पढ़े लिखे डेढ़ होशियार लोग इस “रूढ़ी व प्रथा” को नहीं मानते हैं ।  

(2) नार्र के जितने लोग भी रोजी – रोटी के चलते लालच में आकर दूसरे राज्य में गए हैं या दूसरे शहर में गए हैं ! वापस आने के बाद सबसे पहले जिला अस्पताल से कोरोना वायरस महामारी (रहू) का रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे – नेगेटिव आने की स्थिति में भी घर में ही 14 दिनों तक नार्र में रहने दिया जाए और संबंधित व्यक्ति को परिवार के किसी भी सदस्यों को ज्यादा मिलने न दिया जाए, कोरोना वायरस महामारी से बचाव/सावधानी ही इसका ईलाज है ।  

(3) बड़े महानगर या अन्य शहरो में गांव के भोलेभाले लड़कों – लड़कियों को काम दिलवाने वाले लालची और स्वार्थी एजेन्टों को कुटकुटा धुनाई कर पुलिस को सौंपा जाए क्योंकि इन्हीं लोग ही हमारे सुरक्षित लोगों को संक्रमित क्षेत्र में ले जाते हैं, जिससे उनके गांव में वापस आने से संक्रमण फैलने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है ।  

(4) नार्र के अलावा कोई भी बाहरी व्यक्ति को नार्र में प्रवेश करने से रोका जाए, क्योंकि यह कोरोना वायरस महामारी (रहू) बीमारी बाहर में रहने वाले व्यक्ति के माध्यम से इस देश में आया है, इसलिए बाहरी व्यक्ति ही गांव में भी ला सकता है, इसलिए सावधानी बहुत जरुरी है । सावधानी के लिए सरकार ने भी लाकडाऊन (तालाबंदी) कर दिया है याने अपने – अपने घर में ही रहें, इस बात को गहराई से समझिये, इसे हल्का मत लीजिए ।  

(5) नार्र के अन्दर जो भी काम नियमित रूप से करते आ रहे हैं उसको उसी रूप में करें! भीड़ – भाड़ वाली जगह पर आने – जाने से बचें! केवल बहुत जरुरी काम होने पर ही बाहर जाएँ, एक दूसरे से हाथ भी न मिलाएं, कम से कम एक मीटर की दूरी बना के रखें ।  

(6) इस कोरोना वायरस महामारी की दुःखद घड़ी में बचाने न तो मंदिर का भगवान सामने आ रहा है, न ही चर्च का ईसा मसीह सामने आ रहा है, न ही मज्जिद का अल्लाह सामने आ रहा है, और न ही गुरूद्वारा का उनका गुरूबाबा सामने आ रहा है, और न ही दुनिया के कोई भी भगवान…संक्रमित लोगों को सामने बचाने आ रहे हैं ।

उनके भगवानों को मास्क पहना दिए हैं, शायद डायरेक्ट लाईव बात करके बता दिया गया है, इसलिए सब के सब इस कोरोना वायरस महामारी (रहू) के सामने छूप गए, फिर उनसे बात करके केवल गरीबों का चंदा लेने सामने आ जाते हैं, इन्हीं गरीबों के द्वारा दिया हुआ चंदा से आज के समय में मंदिर, चर्च, मज्जिद, गुरूद्वारा और अन्य मंदिरों में कई हजारों, लाखों, करोड़ों, अरबों, खरबों, नील, पदम, शंख, महासंख …… रूपये हैं, इतना पैसा रख के छूप गए हैं, जबकि इस महामारी से निपटने के लिए पूरा पैसा को ईलाज के लिए सरकार को सौंप देना चाहिए, ताकि ईलाज करने के लिए पूरा उपयोग कर सके । जब लोग बचेंगे तो मंदिरों में और दान मिलेगा, लोग ही नहीं बचेंगे तो उस रूपये का कोई मतलब नहीं है, और न ही आप बचोगे, न ही दुनिया बचेगा । इसे तो अनपढ़, गंवार, मंदबुद्धी वाला भी बड़ी आसानी से समझ रहा है, तो पढ़े लिखे लोगों को समझने में कोई परेशानी नहीं होना चाहिए ।

(7) इस मुश्किल घड़ी में परिवार को छोड़कर दिन- रात अगर कोई सामने आ रहा है तो- वह सफाई कर्मचारी वर्ग है, स्वास्थ्य विभाग का पूरा अमला दिन- रात लगा हुआ है, पूरा पुलिस प्रशासन लगा हुआ है, पूरा जिला प्रशासन लगा है, पूरा सरकार जुटा हुआ है, बचाव के लिए जागरूक जनता सामने आ रहा है, इस बीच में कोई भी भगवान, ईसा मसीह, अल्लाह, गूरूबाबा, … वगैरह- वगैरह बचाने क्यों सामने नहीं आ रहा है? तो हमारे लिए भगवान कौन हुआ, जो लोग सेवा कार्य में लगे हैं, मैं उनको नमन करता हूँ । लेकिन कुछ लोग अपने- अपने भगवान , …  की तरफ डायवर्ट करने में लगे हैं, कोई गौ मूत्र पिलवा रहा है तो मंत्रोच्चारण करवा रहे हैं, … वगैरह – वगैरह..। हद हो गई इन लोग तो प्रतिस्पर्धा कर मूर्खता का प्रमाण पत्र प्रस्तुत कर रहे हैं ।


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