Jeet-ram-bediya
Jeet-ram-bediya-jharkhand

आजादी की लड़ाई में कई योद्धाओं ने अपने जीवन को बलिदान कर दिया। हालांकि, कई शहीदों के नाम इतिहास के पन्नो से गायब हो गया। जीतराम बेदिया उन गुमनाम शहीदों में से एक थे। जीतराम बेदिया का जन्म 30 दिसम्बर 1802 को झारखण्ड में ‘ओरमांझी’ ब्लॉक के गगारी गाँव में हुआ था।

स्वतंत्रता संग्राम 1857 से पहले संथाल विद्रोह ने कर दिया था। उनके पिता जगतनाथ बेदिया के मृत्यु के बाद  1857 में अंग्रेजो के खिलाफ विद्रोह में छोटा नागपुर क्षेत्र से जीतराम बेदिया, शहीद टिकैत, उमरांव सिंह और शेख भिखारी ने संभाला।

मद्रासी सेना के मेजर मैकडोनाल्ड ने चारो को पकड़ने की योजना बनाई और एक सेना भेजी। 8 जनवरी 1858 को शहीद टिकैत, उमरांव सिंह और शेख भिखारी तीनो को गिरफ्तार कर लिया गया और फाँसी दे दी गई।

Jeet-ram-bediya, Jeet-ram-bedia
Jeet-ram-bediya

उस समय, जीतराम बेदिया अंग्रेजों के नियंत्रण से बाहर थी और आंदोलन को जारी रखा। अपने गुरिल्ला युद्ध कला और संगठनात्मक कौशल के कारण, जनता ने जीतराम का समर्थन किया और कई बार साथियों की मदद से अंग्रेजों पर हमला किया और उनकी नींद उड़ा दी।

23 अप्रैल, 1858 को, मेजर मैकडोनाल्ड की सेना ने गगारी और खटंगा गाँवों के बीच जीतराम बेदिया और उनके साथियों को घेर लिया। आत्मसमर्पण नहीं करते हुए, जीतराम बेदिया ने युद्ध जरी रखा।  जीतराम बेदिया  पकड़ी गई और उनको उनके घोड़े के साथ गोली मार दी गई। जीतराम बेदिया और उनके घोड़े को एक गड्डे में दफना दिया गया। इसके बाद उस  स्थान का नाम  बांसैरगढ़ा से घोड़ागड्ढा पड़ गया ।


चानकु महतो का जीवन परिचय | Chanku mahto

गोंड राजा भूपाल शाह सलाम ने बसाया था | भोपाल का इतिहास

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here