RRR में “जल जंगल जमीन” यह नारा कोयतूर क्रातिकारी कोमाराम भीम ने दिया था । यह नारा लगाते हुए कहा था की जंगल में रहने वाले लोगों को जंगल और उसके संसाधनों पर पूरा अधिकार मिलना चाहिए । कोमाराम भीम ने पिछली सदी के तीसरे दशक में स्वाधीनता सेनानी अल्लुरी सीताराम राजू के साथ मिलकर हैदराबाद के निजाम शासन और ब्रिटिशराज के खिलाफ विद्रोह की चिंगारी जलाई थी । उनके देश भक्ति के जज्बे को निर्देशिक एस०एस० राजमोली ने पिरोया है सिनेमाघरों में 25 मार्च 2022 को रिलीज फिल्म RRR ‘आरआरआर’ की कथा वस्तु में ….

एस०एस० राजमोली निर्देशित लगभग 400 करोड़ रुपये के बजट में बनी फिल्म RRR में तेलगु फिल्मों के अभिनेता राम चरण स्वतंत्रता सेनानी अल्लुरी सीताराम राजू के रोल में है, वहीँ जूनियर NTR ने कोमाराम भीम का किरदार निभाया है।

RRR, Alluri Seetarama Raju, komaram bheem
RRR

संघर्ष की राह

बताया जाता है की कोमाराम भीम का जन्म ब्रिटिश भारतमें 22 अक्तूबर 1900 को वर्त्तमान तेलंगाना राज्य के अदिलाबाद के पास संकेपल्ली गावं के गोंड कोयतूर परिवार में हुआ था। हलाकिं उनकी जन्मतिथि को लेकर लोग एकमत नहीं हैं। कोमाराम भीम ने बचपन से ही अपने समुदाय पर अंग्रेजों और निजाम का जुल्म देखा था। वह जंगल में कोयतूर आबादी के बीच बड़े हुए, इसलिए उन्हें ओपचारिक शिक्षा प्राप्त करने का मौका नहीं मिला, लेकिन आगे चलकर उन्होंने हिंदी, अंग्रेजी और उर्दू भाषा में महारथ हासिल की। साथ ही उनमें प्रत्तेक परिस्थिति को संभालने की अच्छी समझ थी।

धधकने लगी आक्रोश की ज्वाला

वर्ष 1900 में जब गोंड क्षेत्र में खनन गतिविधियाँ का विस्तार और राज्य सत्ता को मजबूत करने के लिए कई नियमों को लागू किया गया, तब उनके क्षेत्रों में जमींदारों को जमीनें दी गई। गोंड कोयतूर समुदाय की पाडू खेती (वन भूमि पर की जाने वाली खेती) की गतिविधियों पर कर लगाया गया । उन्हें परेशान किया जाने लगा, वे गांवों से पलायन करने लगे। जब विद्रोह की स्थिति बनी तो कोमाराम के पिता को वन अधिकारियों ने हत्या कर दी। उनका परिवार उनके बाद संकेपल्ली से सरदापुर चला गया। वहां जाकर वह खेती करने लगे, लेकिन वहां भी निजाम के लोग कोयतूरो को डराते, धमकाते, उनका अनाज छीन लेते।  कोमाराम ने निजामशाही के खिलाफ आवाज उठाने का फैसला कर लिया।

कोयतूर समाज के अधिकारों की लड़ाई

वर्ष 1920 में कोमाराम ने निजाम के एक वरिष्ट अधिकारी को मार दिया। उसके बाद वह वहां से भाग निकले, उनकी मुलाकात वितोबा नाम के एक पत्रकार से हुई। उनका प्रिंटिंग प्रेस था, जहां वह निजाम और ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ पत्रिका छापा करते थे। वहां काम करके कोमाराम ने हिंदी, अंग्रेजी और उर्दू सीखी। वितोबा को जब गिरिफ्तार किया गया, तब कोमाराम असम चले गए। वहां चाय के बगान में उन्होंने मजदूरों के अधिकारों के प्रदर्शन किया। वह जेल भी गए, लेकिन चार दिनों में ही वहां से भाग निकले।

बलिदान से हुए अमर

अल्लूरी सीताराम राजू भी कोयतूरो के लिए लड़ रहे थे। कोमाराम उनसे मिलने आंध्रप्रदेश पहुंचे। कोमाराम ने वर्ष 1928 से लेकर वर्ष 1940 तक निजाम के खिलाफ संघर्ष किया। उन्होंने इसके लिए गुरिल्ला युद्ध नीति अपनाई। इस विद्रोह से गोंडो कोयतूरों में उत्साह आ गया। अंततः संघर्ष की राह पर चलते हुए एक रोज कोमाराम समेत 15 लोग बलिदान हो गए। पूरा जंगल कोमाराम भीम अमर रहें, भीम दादा अमर रहें के नारों से गूंज उठा। वर्ष 2016 में तेलंगाना के असिफाबाद जिले का नाम बदलकर कोमाराम भीम रख दिया गया।

Ram Charan and Junior NTR
Ram Charan and Junior NTR
Alluri sitarama raju
Alluri sitarama raju

प्रियंका सिंह :-

फिल्म में कोमाराम भीम का किरदार जूनियर NTR ने जीवंत किया है। वह कहते है की हमें बचपन से ही स्वतंत्रता सेनानियों कोमाराम भीम व अल्लूरी सीताराम राजू के बारे में बताया गया की उनका योगदान कितना महान है। जब इस किरदार को निभाना था तो स्क्रिप्ट के आलावा बचपन की वे यादें भी साथ थी। मै कोमाराम भीम का किरदार नहीं निभा रहा था, वह किरदार है, वह वास्तविक है, वह काल्पनिक है।

कुछ साल, जब कोमाराम भीम आदिलाबाद में नहीं रहे, उस पर राजामौली ने काल्पनिक कहानी गाढ़ी है। हमें वर्कशाप के दौरान ही यह बात बतादी गई थी की कोमाराम भीम का जो व्यक्तित्व है, देश और लोगों के लिए उनके हृदय में जो प्रेम और जज्वा है, निडरता है, उसे अपनाना है। उन्होंने जो वास्तविकता में किया है, उसे बेकग्राउंड में रखकर देशप्रेम और निडरता को पर्दे निभाने के बाद जूनियर एनटीआर की जिंदगी में क्या बदला है? इसके जवाब में वह कहते है की जब कोई भी कलाकार ऐसे व्यक्ति की जिंदगी को इतने करीब से जीता है, जिसने लोगो के हक के लिए जान तक की परवाह नहीं की तो देश और लोगो के लिए प्यार और बढ़ जाता जाता है।

कोमाराम भीम में एक भोलापन और सरलता। मै वह अपने साथ घर ले गया। अक्सर हम जीवन में आगे बढते है तो कई चीजो को लेकर एक्सपोजर बढ़ जाता है, पर आपके भीतर जो एक सरलता ओर मासूमियत होती है, वह खो जाती है। कोमाराम भीम का किरदार निभाने के बाद वह सरलता लौट आई है। इन किरदारों को निभाने के बाद आप खुद को चुनौती देना सिख जाते है, वक्त के साथ विचारों को विकसित करना सीख जाते है।


गोंड क्रांतिकारी कोमाराम भीम | Komaram Bheem

क्रांतिकारी जीतराम बेदिया | Jeet Ram Bediya

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here