Indigenous Rights Day 2021 Assam

सेवा जोहार !!

12-13 सितम्बर 2021, असम: मूलनिवासी कोयतूर लोगों के अधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र घोषणा (यूएनडीआरआईपी) को गुरुवार, 13 सितंबर 2007 को महासभा द्वारा अपनाया गया था। यह घोषणा मूलनिवासी लोगों के अधिकारों पर सबसे व्यापक अंतरराष्ट्रीय साधन है। “मूलनिवासी के अधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र घोषणा मूलनिवासी अधिकार दिवस (यूएनडीआरआईपी)” को गुरुवार, 13 सितंबर 2007 को महासभा द्वारा अपनाया गया था। घोषणा मूलनिवासी कोयतूर लोगों के अधिकारों पर सबसे व्यापक अंतरराष्ट्रीय साधन है।

‘कोयतूर समन्वय मंच’ के तत्वाधान में संयुक्त राष्ट्र संघ (UNO) द्वारा घोषित “15 वां The United Nations Declaration on the Rights of Indigenous Peoples (UNDRIP)” असम राज्य के कार्बीएन्गलोन्ग जिले के दिफू में 12-13 सितम्बर, 2021 को सफलता पूर्वक सम्पन्न हुआ ।
कार्यक्रम की प्रमुख झलकियां इस प्रकार हैं :-

(1) दो दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन संविधान की 6वी अनुसूची के तहत गठित भारत देश की पहली ओटोनोमस डिस्ट्रिक्ट काउन्सिल “कारबी ओटोनोमस डिस्ट्रिक्ट काउन्सिल” के मुख्यालय दिफू में किया गया ।
(2) कोयतूर समन्वय मंच, भारत के समन्वय एवं सभी संगठनों के सहयोग से इस ऐतिहासिक आयोजन से 6वी अनुसूची क्षेत्र ने इसकी मेजबानी करके 5वीं अनुसूची क्षेत्र एवं बिना अनुसूची क्षेत्र के कोयतूरों को आपस में जोडने की शुरुआत करने में सबसे अहम भूमिका निभाई ।
(3) इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में माननीय आप ‘मेवार कुमार जमातिया’ जी, कैबिनेट मंत्री आदिवासी विभाग-त्रिपुरा सरकार एवं विशेष अतिथि के रूप में आप ओमकारसिंह मरकाम जी,पूर्व केबिनेट मंत्री एवं विधायक-मध्य प्रदेश सरकार, बंधु तिर्की जी विधायक-झारखंड, धनंजय जी युवा विधायक- त्रिपुरा राज्य, राजकुमार रोत जी राजस्थान राज्य के सबसे युवा विधायक आदि उपस्थित थे।
(4) इस दो दिवसीय कार्यक्रम में असम, त्रिपुरा, मणिपुर, मेघालय, झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना, उडिसा, महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, दादरा नगर हवेली, दिल्ली आदि राज्यों के सामाजिक संगठनों व संस्थाओं के कार्यकर्तागण शामिल हुए ।
(5) कार्यक्रम का आयोजन भारत के सबसे बड़े कोयतूर सांस्कृतिक केन्द्र- “कारबी कल्चरल सोसायटी”- तारालांग्सो में किया गया । यह सोसायटी कारबी समुदाय के सांस्कृतिक मूल्य एवं खेलों के संरक्षण व संवर्धन हेतू बनायी गयी है । जिसका क्षेत्रफल लगभग 850 बीघा है ।


(6) समारोह में कोयतूर समाज की सामाजिक, सांस्कृतिक,भाषा, मूल्य, दर्शन, अध्यात्म, आर्थिक, राजनैतिक, शैक्षणिक, स्वास्थ्य, पोषण आदि की स्थिति व भविष्य तथा देश के कोयतूर को संगठित करना आदि विषयों पर विचार-विमर्श किया गया एवं आगामी कार्ययोजना बनाई गई ।
(7) देश के विभिन्न इलाकों में बसे तमाम कोयतूर समूदायों एवं संगठनों को आपस में जोड़ने हेतु विभिन्न इलाकों में जाकर मीटिंग, प्रशिक्षण,सभा व कार्यक्रम करने का निर्णय किया गया ।
(8) 6वी अनुसूची में स्वसाशन/स्वयं संचालित व्यवस्थाओं का निर्वहन कैसे किया जाता है और इसमे समूदाय के लोगों की संस्कृति की क्या भूमिका होती हैं तथा अपनी संस्कृति को बचाने के लिए हम क्या क्या प्रयास कर सकते हैं आदि बातों को समझने के लिए दिफू सबके लिए प्रेरणादायक रहा ।
(9) दिफू की आबादी करीब करीब 60000 है, जिसमें बहुमत कारबी समूदाय का है । शहर के तमाम रास्तों के दोनों ओर एवं सभी सरकारी भवनों की दीवारों पर कारबी समूदाय के परंपरागत रंग-लाल, सफ़ेद एवं काला रंग ही लगाया गया है । दिफू के सभी चौराहों पर कारबी समुदाय के ऐतिहासिक वीरांगनाओं एवं महापुरुषों, आदिवासी समुदाय के वाद्ययंत्र व उनकी आस्था से जूडी चीज़ें, स्वावलम्बन के प्रेरणास्त्रोत जैसे की कपड़े बुनते हुए महिला आदि 20 से 40 फुट की उंचाई के कई सारे स्टेच्यू व प्रतिक कारबी समुदाय के कलाकारों द्वारा बनाये गये है । दिफू में मेडिकल कॉलेज के साथ साथ अनेक स्थानों पर कारबी समुदाय के कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करते हुए बडे बडे गैट बनाये गये हैं ।

शहर में करीब 10000 दर्शकों की क्षमता वाला शानदार स्टेडियम एवं विशाल जिमशाला व स्पोर्ट्स कांप्लेक्स भी है । इस स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स की कंपाउन्ड वॉल पर कारबी समुदाय के लगभग 50 से ज्यादा पारंपरिक खेलों के चित्र बनाए गए हैं । इन सभी पारंपरिक खेलों की स्पर्धा पीछले 46 सालों से प्रति वर्ष फरवरी महीने में “कारबी यूथ फैस्टिवल” में आयोजित होती है । दिफू शहर में “कारबी ऑटोनोमस डिस्ट्रिक्ट काउन्सिल” का एसेम्बली भवन व सचिवालय है । शहर की एक लंबी रोड़ साइड दिवार पर कारबी समुदाय के भिन्न भिन्न अवसरों पर किए जाने वाले नृत्य के सुंदर चीत्रों को देखकर नई पीढी को अपनी संस्कृति को देखने का नजरिया बदलता है । यहां पर एक ओर विशेषता सामने आती कि 6टी अनुसूची क्षेत्र में सभी ट्राइबल कम्यूनिटी की महिलाएं अपने कपडे़ खुद ही अपने घर पर बना लेती हैं । दिफू शहर में जिस जगह पर परंपरागत कपडे बनाते हुए कारबी महिला का स्टैच्यू है, उसी रोड पर साइड दिवार पर छोटे किट से रेशमी कीडा और इसमें से धागा और धागे में से कपडे कैसे तैयार होते हैं, उसकी सारी प्रक्रिया चित्रांकित की गई है ।


(10) दिफू शहर के पास ही कारबी कल्चरल सोसायटी का लगभग 850 बीघा ज़मीन पर फैला है। इस परिसर में हर साल “कारबी यूथ फैस्टिवल” का आयोजन होता है । परिसर में बहुत सारे गार्डन, झरने, घना जंगल एवं कारबी समुदाय के कलाकारों द्वारा निर्मित बहुत ही सुंदर कारबी म्यूजियम भी है । परिसर में बहुत सारे ओपन स्टेज, मैदान एवं अन्य ढेर सारी सुविधाएं की गई है ताकि नई पीढ़ी अपनी संस्कृति को बचा सकें। अभी इस परिसर को टूरिस्ट स्पोट बनाने का काम भी चल रहा है, जिसमें तीन हेलिपेड भी बन रहे हैं । इन सभी के बीच सबसे आकर्षक है तारालान्गसो का गेट और उसके सामने बना विशालकाय कलात्मक सांस्कृतिक स्टैच्यू । दिफू की आसपास के क्षेत्रों में फैले घने जंगलो में बहुत सारे वाटर फॉल और जैविक विविधता देखने -समझने जैसी है । संक्षिप्त में कहे तो दिफू प्रदेश स्वसाशन की व्यवस्थाएं, सांस्कृतिक एवं जैविक विविधता का संरक्षण -संवर्धन करने हेतु बहुत प्रेरणादायक रहा
(11) कुछ ही दिन पहले की प्रदेश में फैली अशांति एवं कोविड -19 के चलते इस कार्यक्रम को करना एवं उसे सफल बनाना एक बड़ी चुनौती थी जिसे कार्यकर्ताओं ने सहर्ष स्वीकार किया और कार्यक्रम को ऐतिहासिक रूप से सफल बनाया गया ।
(12) कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रुप में उपस्थित माननीय विधायक धनंजय जी द्वारा 11 सितंबर, 2021 से कार्यक्रम समापन तक कार्यक्रम स्थल पर ही उपस्थित रहते हुए एक साधारण कार्यकर्ता बनकर अन्य राज्यों से आए हुए लोगों की सेवा की गई । जब उनके उद्बोधन की बारी आई तब अपने हिस्से का समय अन्य कार्यकर्ताओं को देने की बात कही गई । माननीय विधायक महोदय छात्र संगठन से संघर्ष करते हुए विधायक बने है, जब एक कार्यकर्ता सामाजिक संघर्ष करते हुए यहां तक पहुंचता है तो हमें इस प्रकार के त्याग व समर्पण के भाव देखने को मिलते हैं । इस प्रकार के युवा जनप्रतिनिधि ही सबके लिए प्रेरणा के स्रोत हो सकते हैं ।
(13) इस अवसर पर “9 अगस्त, विश्व मूलनिवासी दिवस” के 25 वें समारोह- नई दिल्ली के उपलक्ष्य में दिल्ली के बौद्धिक कार्यकर्ताओं द्वारा लिखी गई किताब का विमोचन भी किया गया ।
(14) महाराष्ट्र राज्य के कार्यकर्ताओं द्वारा आयोजकों को महाराष्ट्र राज्य की भौगोलिक एवं ऐतिहासिक स्थिति को दर्शाने वाली पेंटिंग भेंट की गई ।
(15) कार्यक्रम की शुरुआत एवं बीच बीच में असम, त्रिपुरा, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड तथा महाराष्ट्र राज्य के सांस्कृतिक दलों द्वारा मनमोहक व उत्साहवर्धक प्रस्तुतियां दी गई ।
(16) आयोजकों द्वारा इस दो दिवसीय कार्यक्रम में अलग-अलग दिन सुबह शाम नार्थ ईस्ट राज्य के अलग-अलग कोयतूर समुदायों के पारंपरिक भोजन जिसे संबंधित राज्य के कार्यकर्ताओं ने स्वयं बनाकर खिलाया । यह बाहर से आए हुए कार्यकर्ताओं के लिए एक अद्भुत अनुभव रहा।
(17) कार्यक्रम के समापन सत्र में “कोयतूर समन्वय मंच, भारत” के वर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष नक्ताराम भील जी के द्वारा नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में आप स्टालिन इंटी जी को जिम्मेदारी सौंपी गई । साथ ही पूर्व झोन के प्रभारी के रूप में आप विनय प्रकाश एक्का जी को जिम्मेदारी दी गई ।
(18) मूलनिवासी अधिकार दिवस समारोह में शामिल होने के लिए आए हुए कार्यकर्ताओं को नार्थ ईस्ट राज्य की अति सुन्दर व मनभावन हसीन वादियों का दीदार करने का अवसर भी मिला ।
(19) इस कार्यक्रम को ऐतिहासिक रूप से सफल बनाने हेतु सभी संगठनों के कार्यकर्ताओं का “कोयतूर समन्वय मंच, भारत” की ओर से तहे दिल से शुक्रिया अदा एवं आभार व्यक्त करते हैं ।


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