khadkya-balladhshah-chandagarh
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1282-1303 महाराजा खांडक्या बल्लाशाह, चंदागढ़ के गोंड राजा ।

1285 महाराजा हीराशाह कमाल हीरो, रयासिघोला में अफगानों से युद्ध करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए ।

1326 स्वकीय वंशधर्म की रक्षार्थ का बलिदान, लांजीगढ़ की राजकुमारी हसला कुवारीं ।

1482-1532 महाराजा संग्रामशाह गढ़ मंडला के गोंड राजा ।

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1564 23 जून महाराजा वीर नारायजसिंह जी, मुगलों से युद्ध करते हुए शहीद हुए (गढ़ा मंडला) ।

1575 मालवा में पूंजा भील गोंड, मुगलों से युद्ध करते हुए शहीद । राजस्थान के भील गोंडो द्वारा मुग़ल सेनाओं के विरुद्ध विद्रोह, गुजरात के भील-मीणा गोंड गणमानवों का मुगलों के प्रति विद्रोह ।

1750 बिहार में ‘संथाल विद्रोह’ स्वतंत्रा सेनानी तिलका मांझी गोंड द्वारा ।

1780 मराठों के प्रति विद्रोह नरहरि साहि गढ़ा मंडला के राजा द्वारा ।

1778-80 बिहार में ‘पहाड़िया सरदारों’ का अंग्रेजों के प्रति विद्रोह हुआ ।

1783 तालवकर चंद्र कुरुचिया नेता । केरल, का अंगेजों के विरुद्ध संघर्ष ।

1784-85 फ्रांसीसियों के साथ संघर्ष महाराष्ट्र में महादेव कोली गोंड के द्वारा ।

1789 छोटा नागपुर में ‘तमाड़ संघर्ष’ अंग्रेजो के विरुद्ध ।

1795-1800 ‘चेरो संघर्ष’ बिहार में अंग्रेजों के विरुद्ध ।

1798 अंग्रेजों से संघर्ष बिहार में ‘पीछेट स्टेट की बिक्री के विरुद्ध’ ।

1801 तमाड़ विद्रोह ।

1803 दक्षिणी गोंड / आंध्र के कोयतूर गोदावरी क्षेत्र में अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोह ।

1807-08 बिहार में मुण्डा विद्रोह ।

1809 भील गोंड का संघर्ष अंग्रेजों के विरुद्ध गुजरात में ।

1811-17 किसानों का अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष, बिहार के भुमिहर में ।

1812 केरल में वायनाड कुरुचिया कुरुमारों का अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष ।

1817 गुजरात और राजस्थान में बुद्रि-भील गोंड, पंड्या-भील गोंड, सुख-भील गोंड का मराठों और अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष ।

1818 महाराष्ट्र में मैराथन एवं अंग्रेजों की संयुक्त सेना पर कोल गोंडो का आक्रमण ।

1816-24 वर्मा सेना के विरुद्ध ‘नागा संघर्ष’, असम में ।

1820-26-32 अंग्रेजों के विरुद्ध ‘नागा संघर्ष’, बिहार में मुण्डा गोंडो द्वारा ।

1823-1832 खेरवा विद्रोह, झारखण्ड

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1829-33 खासी विद्रोह, मेघालय

1820-1838 2 जनवरी 1838 को ‘हो लड़ाका’ शहीद दिवस के रूप में मनाया जाता है, इन दोनों पुरखा लड़को को आज ही के दिन सेरेंगसिया (सिंहभूम) में फांसी दी गई थी । इनका प्रमुख्य नारा था ‘नारा हो’ और ‘पुंडुवा हो’ ।

1824 छत्तीसगढ़ के बस्तर में जमीनदार गैंद सिंह का जनविद्रोह मराठों और अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष, परलकोट क्षेत्र में ।

1825 अंग्रेजों के विरुद्ध ‘सिंगयों नागाओं’ का संघर्ष, सदिया में ।

1827 ‘मिशमी समुदाय’ का अंग्रेजों पर हमला ।

1828 सिंगयों नागाओं द्वारा सदिया में अंग्रेजों पर आक्रमण । गुमघर कुंवर द्वारा अंग्रेजों पर हमला ।

1829 असम में ‘खासी संघर्ष’, तीर की बौछारो से अंग्रेजों की हत्याएं ।

Jhalkari-bai
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1830-1858 क्या खूब लड़ी थी मर्दानी, वो तो झलकारी बाई कोरी थी । 22 नवम्बर 1830 झलकारी बाई कोरी का जन्म हुआ था ।

1831-32 भागीरथ के नेतृत्व में खैरवार गणमानवों का विद्रोह, हजारीबाग में ।

1833 “हो गोंड”-जाति का अंग्रेजों के प्रति विद्रोह, बिहार में सिंहभूमि क्षेत्र में ।

1833-1850 श्रीमंत शोडमाके जमींदारी के यहाँ वीर बाबूलाल शोडमाके का जन्म मोलमपल्ली (अहेरी) में 12 मार्च 1833 को हुआ ,उनकी माता का नाम जुरजायाल(जुरजाकुवंर) था ।

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1834-41 असम में लाशाईयों द्वारा अंग्रेजों के साथ संघर्ष, लुसाई विद्रोह ।

1835 राजा और नेता गणमानवों पहाड़ियों के लाशाईयों द्वारा अंगेजों पर हमला ।

1835,1872 डफला विद्रोह ।

1838 अंग्रेजों के साथ संघर्ष ‘गुजरात बंजारा नायक’ का ।

1839 असम में नागाओं गोंड द्वारा विद्रोह और अंग्रेजों की हत्याएं ।

1839-43 खाम्पति विद्रोह ।

1839-79 गुडेम रम्पा विद्रोह ,आन्ध्रप्रदेश ।

1840-42 पश्चिम बंगाल में कोय/गोंड गणमानवों का अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष । आंध्र तमिल, कर्नाटक,केरल में कोया/गोंड अनादि, येंरूकुल कोटा आदि ने अनेक स्थानों में अंग्रेजों के प्रति विद्रोह किए ।

1840-42 आंध्र, ईरुला, माला, कुरयान तथा टोडा, मणयन आदि स्थानों में चंदुरया कोया/गोंड जमात के राज्मनावों ने अंग्रेजों के विरुद्ध किया । तमिलनाडु-नैकाडा, भारतीय उरावं व महाराष्ट्र में उमा, बंजारा नाईक का अंग्रेजो के प्रति विद्रोह । गुजरात जोरिया भगत का अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष । मध्यप्रदेश तांतिया मामा ने खरगोन के निर्माण में अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष किया ।

1841 आंध्र में सीता रम्मैया अलुरी एवं भीमू कुमरा आदिलाबाद जिला, कुरुमेरा में कोया/गोंड समाज का विद्रोह, केरल में, कुरुमेरा में, अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष ।

1842 बस्तर छत्तीसगढ़ (मध्यप्रदेश) में कोयतोर/कोयतूर- गोंड गणमानवों द्वारा कैप्टिन ब्लेड के अंग्रेजी सेना पर आक्रमण ।

1842-43 हिडमा – माडिया के नेतृत्व में, बस्तर में माडिया विद्रोह, लिंगोंमटा/लिंगोगिरी के तलकेदार धर्माराव के नेतृत्व में, मुगलों और अंग्रेजो के प्रति विद्रोह ।

1843-49 सिंगयों मुखिया नीरंग फिंडू का उड़ीसा में अंग्रेजो पर हमला ।

1846 अंग्रेजों पर भी आक्रमण गुजरात में कुंवर-जीवोवसोया के द्वारा ।

1850 उड़ीसा चक्र विशोई का विद्रोह ।

1850-1855 कन्ध विद्रोह ।

1854 बिहार में संथाल विद्रोह ।

1855 मिश्मी सिद्ध मुंडा बिहार में, मणिपुर नागाओं पर अंग्रेजों के हमला । छत्तीसगढ़ में वीर नारायणसिंह सोनाखान रायपुर में अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोह । 10 दिसंबर को स्वतंत्रा सेनानी वीर नारायणसिंह अंग्रेजों से संघर्ष करते हुए शहीद हुए रायपुर में  ।

1857 महाराजा रघुनाथशाह व महाराजा शंकरशाह को मराठों ने अंग्रेजों से मिलकर फांसी दिलाई । मराठा-रमोशी-काशी, हरि नाईक अंग्रेजों के संयुक्त सेना के साथ संघर्ष । काजरसिंह, भागोजी नाईक के नेतृत्व में अंग्रेजों पर हमला । सम्बलपुर-उड़ीसा में । डा०हनुमान सिंह यादव राव, शिवराज सिंह और बाबूराम का अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोह ।

1858 पुलेश्वर पेंदाम नांदघोरी व्यंकटेश राजेश्वर, महाराष्ट्र में बाबूराम गोंड, सेडमाके आलापल्ली, घोट आदि अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोह । मध्यप्रदेश रानी करणावंति रामगढ़ (गढ़ा मंडला),रानी सावित्रीबाई पेंदाम, रानी लक्ष्मीबाई अहेरीस्टेट, रानी नर्मदाबाई सेडमाके, रानी केसर बाई वामन गांव-स्टेट । रानी तिलका लांजी-देवगढ़ । सीताराम शाह बालाघाट, चैनशाह-चौरागढ़, लच्छूशाह मकड़ाई, भीमकाशाह बंधु सारंगढ़, रानी कलावती भोपाल, टिकमशाह बंधु सारंगढ़, राजकुमारी रतनकुमारी युगपकुंवारी फूलझर स्टेट, राजकुमारी कपिला फूलझर स्टेट । अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष गुजरात में ‘नायक दास’ द्वारा । असम के दीवान मणिराम सारिंग के राजा का अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोह ।

1859 बस्तर में कोतापल्ली और फोतकेल के जमींदार के नेतृत्व में जंगलो से सरई/शाला- पेड़ काटने के विरुद्ध विद्रोह ।

1860 अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोह लुशाई मुखिया द्वारा त्रिपुरा में ।

1861 कोयतूर गोंड किसानों का अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष, उड़ीसा के फलीगुडी में ।

1862 अंग्रेजों के प्रति विद्रोह आंध्र में कोया मूटटादरों का ।

1867 अंडमान द्वीप में हम्पी विद्रोह ।

1868 अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोह गुजरात में जोरिया भगत द्वारा ।

1869 ‘नागा ओं’ और ‘कामरूप दारंग’ का संघर्ष, सिंगयों के बीच अंग्रेजों और नागाओं का संघर्ष । धनबाद में तणडी के राजा द्वारा विद्रोह ।

1869-70 आंध्र में कोय संघर्ष ।

1872-75  उरावं, संथाल का अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोह धनबाद में ।

1880 गोंड संघर्ष / उड़ीसा कोयतूर, मलकागिरी तस्मनडोर में ।

1885 माटी पुत्र बिरसा मुण्डा का अंग्रेजो के विरुद्ध विद्रोह ।

1889 मुण्डा विद्रोह बिरहोड़ों का भी था, सोंसो बोंगो में गुमला-जन्नां-उरांव गणमानवों का अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष ।

1890 बिहार, रहितासगढ़ा उरावं गणमानवों का अंगेजों के विरुद्ध संघर्ष ।

1891 तिकेंद्रियसिंह के द्वारा – मणिपुर संघर्ष ।

1895 बिरसा मुण्डा का विद्रोह ।

1898-1900 माटी पुत्र बिरसा मुण्डा का संथाल परगना, छोटा नागपुर में अंग्रेजो के विरुद्ध संघर्ष ।

1910 पंडया, बस्तर रूद्रप्रताप, बैजनाथ का अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोह । जन क्रांति भूतकाल के डिबरीधूर-मांडया/जननायक-गुण्डाधूर मांझी बलिदान शहीद ।

1910-11 छत्तीसगढ़ के बस्तर में अंग्रेजों के विरुद्ध गोंड-कोयतूर-माडिया, हल्बा कोयतूर गणमानवों का विद्रोह ।

1910-21 ‘ताना भगत’ का जनविद्रोह बिहार में ।

1921 मोपला जनविद्रोह का संघर्स ।

1922 श्यामलाल सोमरुद्री, नवागावं सुखराम नागो और मगडराम नेताम रायपुर का जन विद्रोह ।

1922 अलूरी श्री राम राजू ।

1927 संथाल परगना बिहार, बंगाल में शक्ति के प्रतिक कली कंकाली/महाकाल की पूजा, कोया, संथाल और मुण्डाओं ने अंग्रेजों से युद्ध करने हेतू पूजा-शुरू की । संथाल सिध्दू कान्हू चाँद और भैरों के नेतृत्व में अंग्रेजो के विरुद्ध जन विद्रोह ।

1930 जंगल विद्रोह धानु गोंड / मंडला, ननकू/ घोडा-डोंगरी, वीरशाह / बैतूल, केला किरात, बुढानशाह/ पिथोरा, उदय गजन सिंह बेचू, कोर/बैतूल, भुजबल पिथोरा ।

1932 ‘नागा संघर्ष’ रानी गुइदालयू के द्वारा ।

1941 आंध्र में भूमि के लिए कोलों गोंड और गोंडों का अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोह ।

1942 लक्ष्मण नायक द्वारा अंग्रेजो से संघर्स कोरापुट-उड़ीसा में  ।

1943 मधुकरशाह नरसिंगपुर ।

1945 जापानी सेना के साथ संघर्ष अंडमान-निकोबार ओंगिओं कोयतूर द्वारा ।

1942-45 दिल्लनशाह नरसिंगपुर, जिर्री ननकू गोंड, घोडा-डोंगरी बिरसा गोंड, उदय बैतूल । बाबुराम कोकाडे, पंछी पोलामू धुर्वे, राजाराम धुर्वे, आष्टी संग्राम बैतूल, छिंदवाडा का अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोह । अंग्रेजों/विदेशियों से संघर्ष करते रहे, लड़ते-लड़ते वीरगति को प्राप्त हुए । भारतवर्ष के मूलनिवासियों का इतिहास यदि उन्हें पड़ाया जाये तो उनमे सामाजिक चेतना आ जायेगी इसलिए आर्यों ने मूलनिवासियों का इतिहास किताबो से समाज से गायब कर दिया । जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपनी उंगली तक नहीं कटाई उन्हें देश की आजादी का महानायक बना दिया ।

1962 कोरकु विद्रोह, मध्यप्रदेश ।  

प्रस्त्रोता : गोंडवाना दर्शन सन 1985 ई दिसंबर


हल्दी बाई भील राजस्थान | Haldibai Bhil

गोंडवाना के अमर शहीद राजा नरवर शाह

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