India for Sale
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India For Sale | भारत एक अद्भुत देश है, इसे हिंदुस्तान में बदलने के लिए, सभी हिन्दुओं को 33 करोड़ देवी-देवताओं का सुरक्षा कवच पहनाया गया है। सैकड़ों वर्षों तक, “चमत्कार और अवतार” ने भारत में “आविष्कारक” को दफन कर दिया, जिसके परिणाम न केवल देश को गुलाम बनाते हैं, बल्कि आज भी बहुसंख्यक समुदाय अपनी शारीरीक, बौद्धिक और मानसिक स्वतंत्रता से वंचित है।

मोहम्मद बिन कासीम से लेकर बाबर के हमले तक भारत की रक्षा के लिए ना तो “श्री राम” का “शिवधनुष” चला और नाही “श्रीकृष्ण” का “सुदर्शन चक्र” काम आया। पन्द्रह सौ वर्षों से शक्ति के सम्मुख भक्ति और श्रद्धा बनी हुई है, फिर भी हमारा हृदय है कि नहीं मानता। आज भी “विश्वास” और “आस्था” ने पूरी दुनिया को नियंत्रित किया हुआ है और “दिमाग” को पंगु बना दिया है।

इन्हीं कारणों से भारत में बहुजन (ओबीसी, एससी, एसटी) सामाजिक व राजनीतिक क्रांति करने मे सफल नही हो पा रहे है।

?उधर देश बिक रहा है, ईधर देश सो रहा है?

“मैं देश नहीं बिकने दूँगा, सौगंध मुझे इस मिट्टी की ” इस प्रकार के भावनात्मक लच्छेदार भाषणों एवं “सबका साथ सबका विकास” जैसे गरीमामय नारों से 2014 मे भारतीय जनमानस को आकर्षित कर देने वाले नरेन्द्र दामोदर दास मोदी जी ने भारतीय जनता पार्टी को भारी बहुमत से चुनाव जीतवाकर स्वयं प्रधानमंत्री बने।

2019 में भी जनता ने फिर से अपना विश्वास जताया और जनता उम्मीद करती रही कि “अच्छे दिन आएंगे”। कांग्रेस के “बुरे दिनों” का डर दिखाकर श्री मोदी ने भारत में सत्ता हासिल की, आज लोग अपने पुराने दिनों को याद करके हंसते हैं।

भाजपा के श्री नरेंद्र मोदी सात वर्षों में एक भी नवरत्न कंपनी या संस्था का निर्माण न करने वाले देश के पहले प्रधानमंत्री बन गए हैं। लेकिन आज वे ऐसे प्रथम प्रधानमंत्री अवश्य बन गए हैं, जिनके कार्यकाल मे देश की तमाम मजबूत और शक्तिशाली सँस्थान व नौरत्न कम्पनियां बिक रही है। बेहद मुनाफा कमा रही भारतीय जीवन बीमा निगम और भारत पेट्रोलियम जैसी कंपनियों को बेचने के फैसले से बीजेपी सरकार की भविष्य की मंशा साफ हो गई है कि अब देश नहीं बचेगा बल्कि बिकेगा। 11 अगस्त को राज्यसभा में पहली बार जो शर्मनाक घटना हुई, वह बिना चर्चा के इन बिकाऊ बिलो को पास करने के कारण हुई।

संसद के भीतर जिन विपक्षी सांसदों की अंतरात्मा जाग्रत हुई, उन्होंने इस बिल का पूरी ताकत से विरोध किया, लेकिन पागल मोदी भक्तो के बहुमत होने के कारण मोदी सरकार ने देश को बेचने के लिए बिल पारित करने में कामयाबी हासिल कर ली। इसी घटना से क्षुब्ध होकर सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश माननीय श्री रमना का ताजा बयान बहुत कुछ कहता है। इतना सब कुछ हो रहा है और ना जाने आगे क्या क्या होने वाला है, किन्तु देश की अवाम खामोश है। इतनी अधिक खामोश कि होश मे कौन है और बेहोश कौन है, यह फर्क करना मुश्किल होता जा रहा है।

भारत में राम की ओर से राजनीति करके राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने भाजपा को जमीन से असमान पर पंहुचा दिया। अब राम के नाम की रोटी से भाजपा के नरेंद्र मोदी, 85% भारतीय बहुजनों की शारीरीक, मानसिक व आर्थिक भूख को शाँत कर रहे हैं। देश की जनता को यह बात समझ में क्यों नहीं आ रही है कि, देश की सम्पत्ति जनता की सम्पत्ति है और उसने सरकार इसलिये नही चुनी है कि उसकी इजाजत के बिना सरकार उसकी सम्पत्ति को बेच दे। सरकारी सम्पत्तियों से ही 85 % बहुजनो का स्वर्णिम भविष्य सँवरता है। इन्हीं सँस्थानो मे दलित, आदिवासी व पिछडी जातीयों को नौकरियों में आरक्षण मिलता है और इन्हें निजी हाथों में दे दिया जायेगा तो आरक्षण बिना हटाये ही स्वमेव समाप्त हो जायेगा।

भारत का कोयतूर सैकड़ो सालों से जल, जँगल, जमीन की समस्या से जुझ रहा है। उसके सँवैधानिक अधिकारों की महालूट जारी है, फिर भी वह नाचने, गाने, झुमने व सडक पर अपनी सँस्कृति का प्रदर्शन करने में मस्त है। भारत का दलित आज भी अपने सामाजिक सम्मान के लिए लड तो रहा है किन्तु बाबासाहेब अम्बेडकर को पूजने मे ज्यादा मस्त है। देश की सबसे बड़ी जमात ओ.बी.सी. के गुर्जर, तेली, कुर्मी, मौर्या, लोधी आदि स्वयं को क्षत्रिय घरानों का वीर पुत्र साबित करने मे मस्त है। इस तरह बहुसंख्यक समुदाय की मदमस्त हरकतों से भारत का वर्तमान और भविष्य दोनों प्रभावित होता है। एक तरफ देश बिक रहा है और दुसरी तरफ देश सो रहा है। अब अल्लाह जाने क्या होगा आगे।

जिस गति से सरकारी सम्पत्तियों का निजीकरण हो रहा है, उसकी सबसे अधिक भयावह मार आदिवासी समाज को झेलनी पड़ेगी, क्योंकि आज भी आदिवासी विकास की बुनियाद “आरक्षण” पर ही खडी है।

       जय सेवा। सेवा जोहार।

आपका साथी – के.आर.शाह, सँपादक


गोंडवाना के अमर शहीद राजा नरवर शाह

रानी लक्ष्मीबाई की हमशकल झलकारी बाई

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