UPSC-Result-2021
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मुखर्जी नगर में कई वर्षों तक प्रशिक्षण लेने के बाद भी पांडे जी का बेटा आईएएस नहीं बन पाया। 2016 में गरीब आदमी ने अपना अंतिम प्रयास किया, लेकिन नय्या पार नहीं लगा सका। अंतत: आरक्षण व्यवस्था पर आरोप लगाते हुए लड़का घर लौट आया।

पांडे जी ने लड़के के लिए एक दुकान खोली और सभी से कहने लगे कि ‘भैया, आज के जमाने में आपको सफल होने के लिए दलित होने की जरूरत है। हमारे बच्चे दिन रात पढ़-लिखकर मर रहे हैं और दलित बिना ज्यादा पढ़-लिखकर मेहनत किए बिना IAS बन रहे हैं। कलियुग है भाई…’

लाखों बामन छात्र और उनके माता-पिता जो यूपीएससी में फेल हो गए हैं, ठीक यही तर्क दे रहे हैं। वे अपनी विफलता के लिए सीधे तौर पर आरक्षण प्रणाली को जिम्मेदार ठहराते हैं।

लेकिन आंकड़ों पर एक नजर:

2016 में यूपीएससी में 1,099 लोग सफल हुए थे। क्या आप जानते हैं 1099 सीटों के लिए कितने लोगों ने आवेदन किया था? 11,36,000 लोग। जी हां, करीब साढ़े ग्यारह लाख लोगों ने…

अब मेरिट भी देखिए… दो सौ का प्री-टेस्ट होता है। इसमें जनरल की मेरिट 116, ओबीसी की 110.66, एससी की 99.34 और अनुसूचित जनजाति की 96 रही। यानी दो सौ अंक के अंतर में भी अधिकतम कट ऑफ का अंतर सिर्फ 20 अंक रहा।

यानी जितने भी लोग सफल हुए, चाहे वे किसी भी जाति के हों, बहुत मेहनती थे, जिनके अंकों में कोई बड़ा अंतर नहीं था।

लेकिन 11,36,000 में से केवल 1099 ही सफल हुए। बाकी 11,34,901 लोग, जो सफल नहीं हो सके, उन्हें क्या करना चाहिए? भाई, विफलता के लिए किसी को दोष देना होगा। तो पांडीजी के ये सभी पुत्र आरक्षण को दोष देते हैं। मानो रिजर्व न होता तो इन 1099 सीटों पर हजारों पांडिजी बच्चों की भर्ती हो जाती।

भाइयो रिजर्वेशन न होता तो भी 1099 सीटों पर इतने ही लोगों की भर्ती होगी न की अधिक? लाखो लोग फेल हो रहे हैं और आरक्षण को दोष दे रहे हैं…

आरक्षण खत्म होने से ऊंची जातियों को कोई फायदा नहीं होगा। किसी भी पद के लिए आपकी प्रतिस्पर्धा उतनी ही कठिन होगी जितनी आज है। हां, इसका खामियाजा कुछ दलितों को जरूर भुगतना पड़ेगा। क्योंकि आपके संवैधानिक अधिकार की हत्या हो जाएगी। संविधान दलितों को आरक्षण देकर असमानता पैदा नहीं करता, बल्कि उस असमानता को दूर करता है जो हमारे समाज ने हजारों सालों से दलितों के साथ की है।

IAS परीक्षा में दो या चार अंक गंवाने वाले उम्मीदवार दूसरे या तीसरे प्रयास में सफल होते हैं। केवल वही लोग रिजर्व को दोष देते रहते हैं, जो वे खुद जानते हैं कि यह उनकी बस की बात नहीं है।

ऐसे पांडिजी के बच्चों ने निजी तौर पर सोचा होगा कि, ‘सौभाग्य से आरक्षण व्यवस्था है, अन्यथा उनकी अक्षमता के लिए उन्हें कौन दोषी ठहराएगा और वे अपने पिता को क्या चेहरा दिखाएंगे?’

राहुल कोटियाल का लेख।


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आरक्षण पर 10 सवाल और जवाब

1 COMMENT

  1. जो आपने लिखा है वह मैंने पढ़ा है हमें बहुत अच्छा लगा पढ़कर की आपकी सोच बहुत अच्छी है बहुत-बहुत धन्यवाद आपका बहुत-बहुत आपका आभार प्रकट करता हूं

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