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Holika-Dahan-Kathamandu-Nepal

हमें होली को होलिका शहादत दिवस के रूप में मानना चाहिए। 

यदि हममें इंसानियत होती तो हम किसी भी महिला को जिन्दा नहीं जलाते, चाहे वह दुश्मन ही क्यों न हो। हम जिन्दा महिला को जलाते है ऊपर से जश्न मानते है। अगर हम त्योहार का संधि विच्छेद करे तो हमें त्यो + हार मिलेगा जिसका अर्थ है ‘तुम्हारी हार’। प्रह्लाद के पिता का नाम हिरण्यकश्यप था। हिरण्यकश्यप हरिद्रोही का राजा था। हरिद्रोही जो आधुनिक भारत में लखनऊ के पास हरिदोई, उत्तर प्रदेश में स्थित है। (हरि = ईश्वर और द्रोही = द्रोही का अर्थ है कि यहाँ के लोग ईश्वर को नहीं मानते थे)।

होलिका के दो भाई थे, राजा हिरण्याक्ष और राजा हिरण्यकश्यप। बड़े भाई, राजा हिरण्याक्ष ने आर्यों के कब्जे वाली सारी भूमि पर विजय प्राप्त कर कब्जा कर लिया। आर्यों ने सोचा कि हम उनके साथ युद्ध कभी नहीं जीतेंगे, इसलिए वे धोखा देने की साजिश रचने लगे। होलिका के बड़े भाई हिरण्याक्ष की विष्णु नामक आर्य राजा द्वारा धोखे से हत्या कर दी गई थी। होलिका एक बहादुर जवान लड़की थी। वह हिरण्याक्ष व हिरण्यकश्यप की तरह ही आर्यों ब्राह्मणों से लड़ती थी। हिरण्यकश्यप का पुत्र प्रह्लाद हीन और अवज्ञाकारी था। हिरण्यकश्यप के परिवार में विष्णु ने नारद नामक आर्य जासूसी को भेजा और घर में विभाजन का कारण बना। उसने प्रह्लाद को अपने धोखे में ले लिया। प्रह्लाद देशद्रोही बन जाता है और विष्णु से मिलता है और अंधभक्त बन कर पूरी तरह से भटक जाता है। सभी सुधार प्रयास विफल होने के बाद, राजा हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद को घर से निकाल देता है। आर्यों ने उसे सुरा (शराब) पीलाना शुरू कर दिया इसलिए वह आर्यों का दास (भक्त) बन गया। नशेड़ी बन्ने के बाद अपने नशेड़ी साथियों के साथ कॉलोनी के बाहर आर्यों के पास रहने लगा। प्रहलाद की माँ अपने बेटे की आकर्षकता के कारण उसे अपनी बहन होलिका के हाथो भोजन भेजवाया करती थी।

यह फागुन महीने की पूर्णिमा का समय था, होलिका का विवाह तय हो चूका था, बारात फागुन पूर्णिमा के दूसरे दिन आने वाली थी। जब आखरी बार रात को होलिका प्रह्लाद को खाना देने गई, तो नशेड़ी आर्यों ने उसके साथ दुर्व्यवहार किया और उसे बंधक बना लिया। प्रह्लाद इतना नशे में था कि वह खुद को सामभाल नहीं पा रहा था। फिर रात में ही आर्य ब्राह्मणों ने होलिका को जलाकर मार डाला। जब होलिका सुबह घर नहीं लौटी तो राजा को चिंता होने लगी। जब राजा को पता चलता कि होलिका की हत्या कर दी गई है, जब वह रात में प्रह्लाद को खाना देने आर्यों के बस्ती में गई थी। तब राजा ने उस क्षेत्र के आर्यों को पकड़ लिया और उनके मुंह और माथे पर खंजर या तलवार से निशान बना दिया। जूते और चप्पल की माला पहन कर पूरे राज्य में जुलूस निकला। जुलूस जहाँ भी गया लोगो ने आर्यों पर गोबर, कीचड़, कालिख फेंकी और उनका तिरस्कार किया और उन्हें ‘कायर’ घोषित किया।

??साहित्य में “वीर” शब्द का अर्थ है — बलवान या बहादुर ।वीर के आगे ‘अ’ लगाने से ‘अवीर’ हो जाता है।

अवीर का अर्थ है — कायर या बुजदिल ।

??होली के दिन, लोग जो लाल-नीला-हरा आदि रंग अपने माथे पर लगाते हैं उसे “अविर” कहते हैं।

??वह लोग जो खुद को अज्ञानता के रूप में प्रकट करते हैं और हर साल अपनी बहन ‘होलिका’ को जलाते हैं। दूसरे दिन नशे में हो जाते हैं और मिट्टी, गाय के गोबर, कीचड़ और रंग लगाकर जश्न मनाते है।

??”होली” के दिन अपनी बहन/चाची की शहादत का जश्न मनाने के बजाय, इस दिन देश के सभी लोग खुशी-खुशी “अवीर” “कायर” लगाते हैं और मिठाई बांटते हैं।

अवीर बनना कायरता की निशानी है। मूलनिवासी लोगों को मिठाई नहीं बांटनी चाहिए। न ही होली में खुशियां मनानी चाहिए।

??लेकिन मूलनिवासियों को होली को होलिका के शहादत दिवस के रूप में मनाना चाहिए।जिस समय यह घटना हुई उस समय जाति व्यवस्था नहीं थी। जाति व्यवस्था बाद में बनी।

इस कारण से, होलिका (डीएनए रिपोर्ट के अनुसार) सभी मूलनिवासियों लोगों की बहन / चाची थी।

?? आर्य ब्राह्मण, वे आज भी रात्रि में अपना मुर्दा नहीं जलाते हैं ।

होलिका प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में स्वयं नहीं बैठी थी । यदि गोद में लेकर बैठी होती तो दोनों जलकर राख हो जाते । लेकिन देवासुर संग्राम आर्य-अनार्य लड़ाई में जब आर्य विजयी हुए और शासन-सत्ता चलाने लगे। तब मनघडंत कहानियो को रच कर अपने राजा को भगवान बनाकर प्रचार प्रसार करने लगे । विद्यालयों में शिक्षा के माध्यम से, आधुनिक भारत में समाचार-पत्रों, टी०वी०फिल्मो आदि के माध्यम से प्रचार प्रसार किया ।

ऐसा असम्भव है कि साथ में बैठे व्यक्ति में से एक न जले । हमारा समाज कुछ पढ़ना नहीं चाहता, जिससे उसे अपने इतिहास की जानकारी नहीं हो पा रही है । जानकारी के अभाव में अपने पूर्वजों के हत्यारों विष्णु, राम, दुर्गा आदि की जय जयकार करता है । विष्णु, राम, दुर्गा ये कोई भगवन नहीं थे हमारे तुम्हारी तरह एक इंसान थे । इन्हें भगवन बना कर पेस किया जाता है और लोगो को मानसिक रूप से गुलाम बनाया जाता । यही मानसिक रूप से गुलाम लोग से धर्म के नाम पर हत्या, दंगा, हिंसा, उपद्रव अन्य धर्म की महिला से बलात्कार करवाया जाता है । हम भी अगर मानसिक रूप से गुलाम नहीं है, एक पढ़े लिखे और विवेकी लोग है तो इस पोस्ट को पढ़ कर आपको यह जानने की उत्सुकता होगी की वाकई में हमारा इतिहास क्या है? 
संक्षिप्त में जानिए :- सबसे पहले 13.7 बिलियन वर्ष पूर्व बिग बेन थ्योरी, डायनासोर युग 233.23 मिलियन वर्ष, कोयतूर सभ्यता का विकास क्रम 1.9 से 0.4 मिलियन वर्ष, देवासुर संग्राम 5000 वर्ष, आधुनिक भारत । 

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पाठकों को इस पर चिन्तन करना चाहिए।

✍?लोगों से एक अपील है की इस दिन होलिका दहन बजाये “होलिका शहादत दिवस” मनायें । कम से कम शोसल मीडिया ( ट्वीटर, फेसबुक, वाट्सअप इत्यादि ) के माध्यम से बनाये ।


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महिषासुर शहादत दिवस

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