Young-gondwana-land-women-India
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अकबर के दरबारी साहित्यकार अबुल फ़ज़ल ने ” मध्य गोंड देश” को “गोंडवाना” कहा।  यह  पहली बार एक मुगल साहित्यकार ने “गोंड देश” को गोंडवाना के नाम से संबोधित किया।

मूल शब्द ‘गण्ड’ है,  जो उच्चारण में भिन्न होता चला गया,  जैसे गौण, गोंड, गोड, गौंड, गोंड़ ।

एक अंग्रेजी ईसाई एडवर्ड सुएस ने एक भूमि की कल्पना की और इसे गोंड जनजाति के बहुमत के आधार पर “गोंडवाना लैंड” नाम दिया, अर्थात गण्ड (कबीलों में) लोगो का समूह।

इतिहासकार डॉ०आर०एस०सिंह के प्राकृतिक, भौगोलिक और ऐतिहासिक के शोध साहित्य के अनुसार प्राचीन काल में यह सबसे बड़े महाद्वीपों में से एक था। जिसे “गोंडवाना” नाम दिया गया ।

हम अपने इतिहास से जाने हैं कि यहां कई विदेशी आक्रमणकारियों ने हमला किया है। कुछ लौट गए और कुछ यहां की संस्कृति में बस गए।

घुमंतू खानाबदोश को हम “आर्य” कहते हैं। वे प्राचीन “सिंधवी सभ्यता” के शासन के दौरान यहाँ आये थे। प्राचीन कोयवंसी यानि कोयतूर गोंड देश के मूलनिवासी है, गोंडवाना एक राष्ट्रवाचक शब्द है। यदि इस शब्द को लेके चले तो हम एक हो जाएगे ।

गोंडवाना काल में हम सब एक थे, कोई जाति नहीं थी, वे सभी एक ही राष्ट्रीय के ” गण्ड ” शब्द से जुड़े हुए थे। यही कारण है कि आज वर्तमान में भी जाति के रुप मे चारों वर्ण के लोग यथा:- गौड बम्मन , गौड क्षत्रिय, गौड वैश्य, गौड शूद्र लिख रहे है ।

गौड :- गौड शब्द, गण्ड शब्द का अपभ्रंश शब्द है । गौड का मतलब मुखिया होता है, ऐसा कुछ लोग मानते है । विशेषतः गोंड क्षत्रिय या गोंड बम्मन ।  

गौण :- गौण शब्द, गण्ड शब्द का अपभ्रंश शब्द है । हिंदी साहित्य में गौण शब्द का मतलब द्वितीयक होता है ।  

गोंड :- गोंड शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है । गो + अण्ड । गो का अर्थ धरती से है । अण्ड का अर्थ पुत्र से है अर्थात धरती_पुत्र । इन दो शब्दों से मिलकार गोंड शब्द बना है । दुनिया गोल है । इस गोल दुनिया का एक अंडे की आकृति का पिंड पृथ्वी है । यह जो पृथ्वी (अंडा) है, एक जनद ग्रंथि है । क्योंकि इसी पृथ्वी से समस्त जीव जन्तु पैदा हुवे है ।  

पांच तत्व जल, आकाश, अग्नि, पृथ्वी, वायु इन पांच तत्वों के गुणों को धारण करने वाली पृथ्वी है। (पांच का संच गण्डा)  

हमारे पूर्वज भी इसी गोल अंडे (पृथ्वी) से पैदा हुए हैं, उन्होंने यह माना है। इसीलिए उन्होंने कहा कि हम गोंड हैं और हमारे देश का नाम गोंड देश है। सभी इस गोंड (जनद ग्रंथि) में ही पैदा हुए हैं।   गोंड शब्द इस गाॅड शब्द सृजित है जिसे ईसाई लोग भगवान कहते है। इसे कोख, कोया (कोख का फूल) कहा गया है । कोया शब्द ही समूह वाचक होकर कोईतुर हुआ है ।  

हमारे पूर्वजों ने खुद को इस धरती का पुत्र माना है। इसीलिए हम इसे पैन्जिया (धरती) दाई कहते हैं। हमारे पूर्वज भू पेन, जू पेन अपने नाम के साथ लिखते थे।

गोंड देश आर्यों के छल कपट करने के कारण बिखर गया और छोटे छोटे राज्यों में बटता चला गया । अरबियों ने सिंधु नदी के किनारे रहने वाले लोगों को हिन्दू कहा। हिन्दू नाम यहीं से शुरू हुआ। हिन्दू हिंदी भाषा का शब्द नहीं है या न ही संस्कृत भाषा का शब्द है। हिन्दू शब्द फ़ारसी मुसलमानों का दिया शब्द है जो 500 ईसा पूर्व में अवेस्ता ग्रन्थ से मिलता है। यह शब्द मुसलमानों द्वारा दी गई गाली है।

हिन्दू शब्द का आर्थ चोर, डाकू, रहजन (रास्ते के लुटेरे) और गुलाम (दास, बंदी)।

छोटे छोटे राज्यों में विभाजित होने से उनमे एकता नहीं थी इसलिए था। मुगल आक्रमणकारीयों ने गुलाम लोगो को इस्लाम मुसलमान बन्ने पर मजबूर किया । फिर हम कौन हैं, वे हमें हिन्दू कहते हैं, यानी हम हिन्दू हैं, हमारा धर्म हिन्दू है, और फिर हिन्दू और मुसलमानों के नाम पर लोगो को लड़ते है। हिन्दू को ले कर वीर शिवाजी महाराज ने रैयत साम्राज्य की स्थापना के लिए लड़ाई लड़ी।

वास्को डिगामा नाविक जब सिंधु नदी घाटी में पहुचे और पूछते है कि इसका नाम क्या है। जवाब मिला, यह इंड्स घाटी है। उन्होंने अपने समुद्री यात्रा के विवरण में इंड्स को इंडिया लिखा। ब्रिटिश ने पढ़ा और इंडिया नाम रखा। डॉ०अंबेडकर ने संविधान में ” इंडिया दैट इज भारत” लिखना पड़ा। 

आजादी से पहले, हिंदुस्तान और जय हिंद के नारे क्रांतिकारियों को उत्साहित करते रहे। भारत का नाम भारत ट्राइब से लिया गया है। जो शुर वीर थे। स्वतंत्रता के पहले भारत नाम का कोई देश नही था । आदिवासी, वनवासी, जन जाति, मूलनिवासी ये नाम भी आर्य-हिन्दू लोगो ने दिये है ।  

आदिवासी नहीं हम सिर्फ और सिर्फ कोयतूर है, जिसे हमारे पूर्वजों ने स्वविवेकपूर्ण संकल्पना से स्वीकार कर आत्मसात किया था । इसलिए हम गोंड है ।


कोसोडुम मुठवा मॊद “कुंवार भीमालपेन”

आखातीज | कोयतूरों का नववर्ष | कृषि कार्यो की शुरुआत

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