कोयामूरी द्वीप के निवासि, कोयतूरो की सभ्यता का विकास क्रम (प्राचीन गोंडवाना) :

गोंडी भाषा मे ‘कोया’ का अर्थ गुफा (Cave) गर्भ, आधार, महुआ फूल होता हैं। प्रथम कोयतूरो का निवास 10000 वर्ष ई. पु. गुफा मे निवास करते थे जिसे Cave Civilization कहते हैं। इसका प्रमाण भारत का केंद्रीय राज्य मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से 40 किलोमीटर दूर भीमबेटका की गुफा हैं। इन गुफाओं मे आदिमानवो ने कई भित्ति चित्र बनाये हैं। इनके बारे मे आर्कलोजिस्ट कहना हैं की सम्भवतः ‘होमोइरेक्टस’ मानवो ने 1 लाख 20 हजार वर्ष पूर्व इन भित्तिचित्रों कों बनाया होगा।

Evolution of civilization of the inhabitants of Koyamuri Island
Evolution of civilization of the inhabitants of Koyamuri Island

प्रारम्भिक मानवो मे सहज बुद्धि और विवेकी बुद्धि का विकास आज से 90 हजार – 30 हजार ई. पु. कर लिया था।

▪️6500 ई. पु – काबिलाई गण्ड या गण व्यवस्था का विकास हुआ।

▪️6000 ई. पु.- नार गण्ड या गण व्यवस्था का विकास हुआ।

▪️5000 ई. पु. – कोट गण्ड या गण व्यवस्था का विकास हुआ।

▪️4520 ई. पु – पुनेम यानि (सत्य) की प्रथम व्याख्या।
व्याख्याकार – कोसोडूम ( प्रथम संभु शेक )

▪️2230 ई. पु. – कुल गण्ड या गण व्यवस्था का विकास पहाँदी पारी कुपार लिंगो पुनेम ( सत्य ) की द्वितीय व्याख्या किया।

▪️2500 – 1750 ई. पु – सिंधु घाटी सभ्यता का विकास हुआ।

▪️1850 ई. पु – विदेशी आर्यो का कोयामुरी द्वीप पर आगमन। इसी काल क्रम मे आर्य – अनार्य के बीच लम्बा संघर्ष हुआ। आर्यो ने अपनी पुस्तकों मे इसे ‘देवासूर’ संग्राम कहा। इस संघर्ष मे कोयातुरो की हार हुई। तब आर्यो ने इस द्वीप के निवासियों पर नियंत्रण रखने के लिए वर्णाश्रम व्यवस्था की नींव रखी। कोयातुरो कों शूद्र अछूत बनाकर उन्हें धार्मिक गुलाम बनाया और जो कोयातुर उनके गुलामी स्वीकार नहीं किया वे जंगलो कंन्द्राओं की ओर चले गए। जिसे आदिवासी, जंगली, असभ्य सम्बोधित किया गया। दर असल यही आदिवासी समुदाय भारत के असली स्वामी हैं।

भारत मे जितने भी 6745 जातियाँ हैं वे सभी कोयामुरी निवासी ही हैं। धार्मिक गुलामी के कारण वे अपनी भाषा संस्कृति धर्म सब खो दिए। आज उन्हें पता ही नहीं की उनकी असली पहचान क्या हैं। भारत के अनुसूचित जन जाति एवं अनुसूचित जाति कों आर्यो ने पांचवे वर्ण के तहत ‘अछूत’ जाति कहा और पिछड़ी जातियों कों ‘सछूत शूद्र ‘ जाति के रूप मे स्थापित किया। इस संबंध मे स्मृतियों एवं पुराणों मे अनेक प्रमाण मौजूद हैं। पिछड़ी जातियों OBC कों ‘Broken Tribe’ भी कह सकते हैं।

भारत मे धर्मों का विकास एवं उसका काल या युग

‘वैदिक धर्म’ या ‘ब्राह्मण धर्म’
संस्थापक – आर्य ब्राह्मण
पुस्तक – ऋग्वेद, वेद पुराण
काल – 1500 ई. पु.

बौद्ध धर्म
संथापक – सिद्धांर्थ गौतम बुद्ध
पुस्तक – त्रिपिटक
काल – 563 ई. पु.

जैन धर्म
संस्थापक – स्वामी महावीर
पुस्तक – आगम धर्मग्रंथ
काल – 540 ई. पु.

क्रिस्चियन
संथापक – जीजस क्राइस्ट
पुस्तक – बाइबल
काल – नये ईस्वी का आरम्भ जीजस के जन्म से शुरू हुआ।

इस्लाम
संस्थापक – मोहम्मद साहब
ग्रन्थ – कुरान शरीफ
काल – 570 ईस्वी

हिन्दू धर्म
संस्थापक – अज्ञात
ग्रंथ – अज्ञात
काल – 400 से 500 ईस्वी

हिन्दू शब्द का प्रथम प्रयोग फारसियों द्वारा किया गया था

-: भारत मे मुस्लिम एवं मुग़ल शासको का आगमन :-

▪️713 ईस्वी – मोहम्मद बिन क़ासिम

▪️1000 ईस्वी – मोहम्मद गजनबी

▪️1398 – 1518 ईस्वी – कबीर पंथ का उदय

▪️1459-1539 ईस्वी – सिख धर्म का उदय

▪️1526-30 ईस्वी – बाबर का शासन

▪️ 1756 ईस्वी – सतनाम पंथ का उदय.

▪️1750 से 1947 तक – ब्रिटिश शासन

▪️1950 कों भारत का स्वतंत्र संविधान बना और देश मे गणतंत्र एवं लोकतंत्र की स्थापना हुई। लेकिन इन 75 वर्षों के दरमियान लोगों कों यह ज्ञात ही नहीं की भारत का गणतंत्र व्यवस्था कोयतुरो की गण्ड या गण व्यवस्था का आधुनिक स्वरूप हैं। असली रिपुब्लिक लोग तों भारत के आदिवासी हैं जिसे आजतक राजनितिकरण करने वाले लीडर्स ने स्वीकार ही नहीं किया।
Indigenous (कोइतूर या देशज) से India शब्द की उत्पत्ति हुई हैं।

राजू मुर्मू
स्वतंत्र विचारक एवं सामाजिक कार्यकर्ता
झारखण्ड

1 COMMENT

  1. कोयतुरों के विकास क्रम और विभिन्न धर्मों की उत्पत्ति की सरल शब्दों में एक अच्छी जानकारी।
    जय बुढा़देव
    सेवा जोहार

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