प्राकर्तिक-शक्ति-सल्ला-गागरा
प्राकर्तिक-शक्ति-सल्ला-गागरा

बड़ादेव :-

प्राकर्तिक शक्ति को बड़ादेव के रूप में मानते है, प्राकर्तिक शक्ति (अग्नि, पृथ्वी, जल, आकाश, वायु) जिससे कोई बड़ा नहीं है। जिसका कोई माता-पिता नहीं है, जिसके जन्म को कोई नहीं जनता है, जो अमर है, वह अजन्म है। प्राकर्तिक शक्ति (वायु, आकाश, पृथ्वी, जल, अग्नि) जो सर्वोच्च शक्ति है और सत्य है। सार्वभौमिक सत्य की यह शक्ति है बड़ादेव । वह प्रकृति के निर्माता और संचालक हैं।

बड़ादेव गोंडवाना (कोया पुनेम) में, सल्ला गंगरा कहा जाता है। सल्ला गंगरा का अर्थ है स्त्री और पुरुष। दूसरे शब्दों में, उत्पन्न होने वाली शक्ति धन और ऋण आयन है, जो पांच घटकों से बना है। इन शक्तियों के बिना, पृथ्वी पर किसी भी प्राणी का अस्तित्व संभव नहीं है। इसे होजोरपेन, सजोरपेन, फड़ापेन, परसापेन भी कहा जाता है। इस गोत्र की गोंड या अन्य गण के लोग भी मानते है, जैसे कि वेन और पेन, वेन यानि जीव और पेन ये शक्ति।  

हमारे पुरखों के द्वारा प्रकृति के सवा लाख वनस्पति, आठारह लाख वराठा, चवसट जोगनी, चोरासी योनियों में से जो सबसे बड़ा होगा और अदुतीय होगा उसे बड़ादेव माना है । पांच तत्व (वायु, धरती, जल, आकाश, अग्नि) मानव जीवन में अधिक उपयोगी है इसलिए उनका गोंगो किया जाता है। इसी प्रकार जो प्राकर्तिक में सबसे बड़ा व अदुतिया है उसे बड़ादेव माना है जैसे :-  

1.सुरहिन गईया का गोबर जो सभी जीवो के गोबरो में सबसे बड़ा व अदुतिया है (यह दुनिया का सबसे पहला पुटी है) ।

2.चन्दन का वृक्ष जो विषम परिस्थितियों में भी अपनी गुण को वह त्यागता नहीं और अवगुण भी उसमे प्रवेश नहीं कर पाता ऐसे गुड़वान लकड़ी का पीड़ा बनाया गया । वह पीड़ा हमें सन्देश देता है की विपरीत परिस्थितियों में भी अपने उत्तम प्रविती का त्याग नहीं करना है ।

3.सोने का धातु जिसे कलसा कहा गया है जिसमे जंग नहीं लगता ।

4.साजा का पान सबसे बड़ा होता है क्यों की वह दुनिया का सबसे मीठा पत्ता होता है और मीठा होने के बावजूद कीड़ा मुक्त छेद मुक्त होता है ।

5. महुआ का अक्क्ष्य फूल जो सबसे आधिक समय तक रखने पर भी बधबू नहीं मरता । बाकि फूल कुछ समय बाद मुरझा जाते है और बधबू मरने लगते है । महुआ का फुल पर दुबारा पानी डालने पर ताजा हो जाता है ।

6.नारियल भी बड़ादेव है नारियल फल ही ऐसा फल है जिसका बीज कच्चे में जगता है,सुखा में नहीं जगता ।

7.दुभी घास ऐसा घास है जो सूखने के बाद उसे फिर से जमीन में लगा कर पानी डालने पर पुन: हरा हो जाता है । 8.राल   

9.गुड़(सबसे पहला मिठाई)

10.बॉस का वीर हमेसा बढ़ता है,उसी प्रकार हमारा वंश को बड़ाना ।

11.डूमर का पौधा जो बहरोह महीने फलता है जिसका कोख कभी खली नहीं होता । उसी प्रकार हमारा कोख वंश वृद्धि के लिए सदा भरा रहना ।

12. गाठ वाले कंद में सबसे बड़ा हल्दी है । हल्दी का उपयोग गोंगो में करते है ।

सभी में सबसे बड़े का हम उपयोग करते है और उसी को प्रकृति शक्ति बड़ापेन में अर्पित करते है ।

बुढ़ादेव :-

बुढादेव अर्थात पूर्वज याने घर में सबसे बुढा । यह पेन किसी गोत्र या परिवार या किसी परगना या मुड़ा या जागा का होता है । यह पेन संबंधित समूह के पूर्वज ही होते हैं जो मृत्यु उपरान्त संबंधित परिवार के सदस्य को साक्षात् जनते हैं उसके बाद अपनी शक्ति से संबंधित समूह को प्रमाण देते हैं इसके बाद उस शक्ति को ‘पेन पन्डना’ गोंगो क्रिया से जगाया जाता है।

पंच पेन (अग्नि, पृथ्वी, जल, आकाश, वायु) की उपस्थिति में स्वयं को साबित करते हैं तब संबंधित परिवार या समूह के सदस्यों द्वारा संबंधित बुढालपेन / बुढ़ीपेन / डोकरादेव को आत्मसात किया जाता है। यह पेन एक सीमित समूह तक में ही प्रभावी होता है। यह पेन सभी गोण्ड गोत्र / जागा / परिवार में अलग-अलग हो सकते हैं। इन पेन की शक्ति को बड़ादेव द्वारा संचालित और नियंत्रित किया जाता है। यह पेन संबंधित परिवार की टण्डा मण्डा कुण्डा की समुचित रक्षा एवं मार्गदर्शक के रुप में महत्वपूर्ण योगदान रहता है।

बुढ़ापेन के द्वारा ही गोण्ड परिवार / समाज की जन्म,विवाह एवं मृत्यु बाना नियंत्रित एवं आयोजित होते हैं । परिवार में किसी भी तरह से बाना / बानी के विपरीत कार्य होने पर उनके पुझारी लोगों को यह पेन विशेष है । बुढ़ादेव का कुंडा मिलन किया जाता है बड़ादेव का कुंडा मिलन नहीं करते । बुढ़ादेव का कुंडा मिलन करके बड़ा देव में मिलते है ।


फड़ापेन क्या है ?

नॉन टेक्निकल जातिया और टेक्निकल जातिया

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