Demographics-of-India
Demographics-of-India | आदिवासी जनगणना

कोयतूर कौन है? कोयतूर का धर्म यदि हिन्दू नहीं है तो कौन सा धर्म है? आदिवासी जनगणना? कोयतूर की परम्परायें क्या है? कोयतूर कौन सा पर्व व उत्सव मानते है कब मानते है? कोयतूर के त्यौहार अन्य धर्मो के त्यौहार से अलग क्यों है और टी०वी०चैनलों व समाचार पत्रों इनके त्योहारों की खबरे क्यों नहीं छपती? ऐसे अनेकों प्रश्न है जो सोचने पर मजबूर करते है की कोयतूर वास्तव में है कौन । आइये जाने….  

1) जनगणना के आकड़ों के अनुसार कोयतूर क्या है? | आदिवासी जनगणना

भारत देश की जनगणना केन्द्र सरकार द्वारा प्रत्येक 10 वर्ष के अन्तराल पर संपन्न कराई जाती है । जनगणना में सभी प्रकार के आकड़े मौजूद रहते है । भारत की जनगणना की शुरुआत अंग्रेजो ने 1871-72 में की थी, तब से लेकर आजतक प्रत्येक 10 वर्षो यह जनगणना संपन्न कराई जाती है । भारत देश की आजादी से पहले जनगणना के आकड़ों के हिसाब से कोयतूर को क्या कहा गया है :-  

जनगणना वर्षभारत के कोयतूर के लिए प्रयुक्त किये गये शब्दपेज नम्बरडाउनलोड फ़ाइल
1871ABORIGINES17,18,19,22,23CENSUS 1871
1881ABORIGINAL51,54,96,126CENSUS 1881
1891ABORIGINAL25,27,35,49,57CENSUS 1891
1901ANIMIST57,68,76,80,103,268CENSUS 1901
1911ANIMIST24,44,52,56,57CENSUS 1911
1921ANIMIST14,26,38,40,53CENSUS 1921
1931TRIBAL RELIGION4,202,222,223,225CENSUS 1931
1941TRIBES3,31,106,117,119,137CENSUS 1941
1951SCHEDULE TRIBE142,144,139,196CENSUS 1951

In 1901 Animism Was treated as a separate religion, in 1931 Animism was replaced by the Tribal Religion and replaced by the concept of religion that gave place to that of community.
इस प्रकार हम देखेते है की भारत की जनगणना वर्ष 1871 से लेकर 1941 तक की जनगणना में कोयतूर की हिन्दू धर्म से अलग धर्म में गिना गया है, जिसे Aborigines, Aboriginal, Tribal Religion, Tribes आदि कहा गया है । भारत के कोयतूर की गणना अलग समूह में की गयी है, लेकिन वर्ष 1951 की जनगणना से कोयतूर को Schedule Tribe बनाकर अलग गिनती करना बन्द कर दिया गया है । क्यों कोयतूर का उनका अलग धर्म कोड को ख़त्म कर दिया गया है? 1951 की जनगणना के पेज नम्बर 136 पर लिखा है की- इसका मतलब साफ है कि 1951 में आकर सरकार ने कोयतूर को जबरदस्ती अपने राजनैतिक फायदे के लिये अन्य धर्मो (हिन्दू, ईसाई, मुस्लमान) में शामिल कर दिया, जबकि इससे पहले कोयतूर की गणना अलग धर्म के रूप में की गई थी । 1951 की जनगणना के पेज नम्बर 196 पर लिखा है कि सुश्री– E.A. Ma & well कनाडा से बांसवाडा (राजस्थान) में कोयतूरों के रीती – रिवाज और परम्पराओं पर अध्यन करने के लिए आई थी । उसने कोयतूरों से उनको परम्पराओं पर निम्न बाते जानी ।

(a) They do not, as regular rule worship before Hindu idols, वे हिन्दुओं की मूर्तियों के आगे प्रार्थना नहीं करते ।

(b) They do not enter Hindu Temples, वे हिन्हुओं के मंदिरों में नहीं जाते थे ।

(c) They do not have images of Hindu idols in their houses, उनके घरों में हिन्दू देवी देवताओं की मूर्तियां / फोटो नहीं होते थे ।

(d)They do not employ Brahmin: priest for any of their cer~monies, such as birth, marriage and death, but employ their own ‘Baiga’ and ‘Bhomka’, they are Tribal, वे अपने विवाह, जन्म, मरण, आदि कार्यक्रमों में हिन्दू पण्डित को नहीं बुलाते थे । वे सिर्फ बैगा और भुमका को ही कार्यक्रमों में बुलाते थे, जो कोयतूर ही होते थे ।

(e) They believe that on death they mix in nature but they do not believe in Ghost, Spirits Re-birth in human or animal form, वे मानते है कि कोयतूर मरने के बाद पेन विलीन हो जाते है लेकिन वे भुत, अत्मा, पुर्नजन्म में विश्वाश नहीं था । Miss Ma & well, in fact, leaves no room for doubt that the term “Animist” would be the correct one to describe the religion of the Bhils whom she knows so well, इससे साफ पता चलता है कि जनगणना के आकड़ों के अनुसार कोयतूर हिन्दू नहीं है ।

अनु०क्र०सन – 2011 भारत जनगणना चार्ट में अलग कोयतूर धर्म कोड नहीं है
1हिन्दू
2मुस्लिम
3क्रिशचन
4सिख
5बौद्ध
6जैन
7अन्य

(2) कोयतूर की परम्पराओं के अनुसार कोयतूर हिन्दू नहीं है ।

कोयतूर समाज के जन्म से लेकर मरण तक के रीति- रिवाज एवं परम्पराये गैर कोयतूर समाज से अलग होते है । कोयतूर अपने सभी कार्य वामा व्रत (Anti-Clock wise, Right Hand Side) करते है । कोयतूर के विवाह कार्यक्रमों में जमने फैरे (वामा व्रत) लिए जाते है । विवाह कार्यक्रमों में ब्राह्मण पुजारी को नहीं बुलाया जाता है, यह कार्य भुमका,बैगा, गावं पुजारी आदि करते है । कोयतूर प्राकर्तिक निसर्ग पूजक है । इसके आधार पर ही कोयतूरों को संवैधानिक हक-अधिकार सबसे ज्यादा दिए गये है । लेकिन शासन ने धरातल में इसका इम्प्लिनेंटेशन नहीं किया है । कोयतूर का धर्म कोड कॉलम हटा देने से कोयतूर को जबरदस्ती से किसी ना किसी धर्म कोड अंकित करने के लिए बाध्य किया गया है ।

एनसीआर/सीएए/एनपीआर में यही होने वाला है कि जब तक कोयतूर किसी धर्म का कॉलम (फिल अप) भरेगा नही तब तक ऑनलाइन फार्म आगे बड़ेगा नही, इस तरह की व्यवस्था कि गई है । कोयतूर ज्यादातर हिन्दूओ के संपर्क में रहने के वजह से, खुद उनके द्वारा और जनगणना करने वाले कर्मचारी ज्यादातर हिन्दू होने के वजह से कोयतूरों का नाम जानबूझकर हिन्दू कॉलम में लिखा जा रहा था । जिससे हिन्दू धर्म कि जनसंख्या में वृद्धि हो रही है । तथा इससे होने वाले परिणाम संबंधी जानकारी कोयतूर को नही होती है ।

सन 1951 से कोयतूरों का धर्म कॉलम हटा देने से सबसे बड़ा फायदा हिन्दू धर्म को हुवा है । कोड हटा देने से यह Legally force full  conversation प्रोसेस कोयतूर के लिए बन गई है । याने डॉ बाबासाहाब आंबेंडकर ने 1956 में नागपूर में जैसे अपने लाखों अनुयाई को बौद्ध धर्म की दीक्षा दी थी । वैसी दीक्षा कोयतूरों को देने की जरूरत नही है । लेकिन इस प्रक्रिया से ज्यादातर कोयतूर जनगणना में ऑटोमैटिक हिन्दू धर्म लिख लेंगे, क्योंकि उनके लिए अपना घर्म लिखने के लिए (कॉलम) ऑप्सेन ही नही है । यह शातिर दिमाग मनुवादीयों का है ।  

3) कोयतूर जागृत हो रहे है, वह अपने कोयतूर धर्म कोड कॉलम की मांग कर रहे है ।

कोया पुनेम धर्म, गोंडी धर्म, सरना धर्म, कोयतूर धर्म, ट्राइबल रिलिजन, आदि धर्म कि मांग कर रहे है । या तो कोयतूरों कि जनगणना उनके पूर्ववर्ती धर्म कोड में करने कि मांग कर रहे है । कोयतूर पुर्व से ही अपने परंपरा, रूढी -प्रथा, बोली-भाषा, धर्म संस्कृति और अपनी नृत्य कला के साथ जीवन व्यापन कर रहा है । कई इतिहासकारो ने और वैज्ञानिकको ने कहा है कि कोयतूर के देवी -देवता हिन्दूओ के देवी देवताओ से मेल नही खाते है । हिन्दू के ग्रंथ संस्कृत भाषा में है कोयतूर के बोली भाषा में नहीं है । कोयतूर बोली भाषा सबसे पुरानी है, षडयंत्र के तहत उनकी बोली भाषा को अनुसूची 8 में अभी तक शामिल नहीं किया गया । जबकि कोयतूरों को हिन्दूकरण करने के लिए अभी अभी गोंडी भाषा में रामायण, हनुमान चालिसा, गायत्री मंत्र लिखा जा रहा है । आरएसएस जानती थी किसी की भाषा को खत्म कर दिया जाये तो उसकी संस्कृति का ज़िंदा रहना संभव नहीं । बडे चलाकी से जनगणना रिपोर्ट को हिन्दू की संख्या बढाने का माध्यम बना डाला है ।

देश के 13 करोड़ 70 लाख कोयतूरों को उनका धर्म कोड कॉलम दे दो तो । मौजूदा सभी धर्म को अपनी औकात समझ में आयेंगी, इसलिए कोयतूर को हिन्दू धर्म के तरफ आकर्षित करने के लिए आरएसएस वाले मुहीम चला रहे है । आरक्षण में धर्म के नाम पर कठनाईयॉ पैदा की जाती है । अनजाने में और कुछ लोगो का धर्म परिवर्तन करा के कोयतूर लोग अपने को हिन्दू कॉलम में ही भर ने लगे है ।

आरएसएस द्वारा दृष्टप्रचार यह किया जा रहा है कि 1951 मे हिन्दू धर्म लिखा होगा तो जनगणना 2021 में हिन्दू लिखो वरना आरक्षण का लाभ नही मिलेगा । जनगणना 1951-2011 तक बहुत सारे कोयतूरों ने अपना धर्म ही लिखा होगा, लेकिन जनगणना प्रोसेस में हिन्दू धर्म के हित के लिए उनका धर्म हिन्दू में गिन लिया । कुल मिलाकर इन धर्म के ठेकेदारों ने कोयतूरों का सत्यानाश कर दिया है । सत्य यह है कि कोयतूरों को जीवन जीने के लिए हिन्दू धर्म की संकल्पना को सच मान लिया है । अब तो कोयतूरों में भी धार्मिक विभिषण पैदा हो रहे है । आरएसएस के दलाल पैदा हो रहे । जो भाजपाईओं के साथ उछल कुद कर रहे है ।

4) कोयतूर अपने आप को हिन्दू लिखता है तो नुकसान कोयतूर का ही है ।

देश का 3.5 टक्के कोयतूर जंगल, पहाडों, टेकडी में बसा हुवा है जहॉ करोड़ रूपये कि प्राकृतिक खनिज संपदा है । आज नही तो कल विकास के नाम पर सरकार इस खनिज संपत्ति का दोहन करेगी । खनिज संपत्ति के पैसो से विकास सभी समाज का होगा । बडे बडे शहरों में मेट्रो आयेंगी, रोड, पुल, बडी बडी इमारते खड़ी होगी । लेकिन विस्थापित कोयतूर होगा । जो रोजी रोटी के लिए शहर के तरफ भागेगा । गैरो के धर्मो में कोयतूर का सामाजिक स्थान अतिशुद्र से भी बुरा है । विस्तापित गरीब कोयतूर का हिंदू धर्म के वर्ण व्यवस्था में कोन सा सामाजिक स्थान होगा, क्या जातिभेद से कोयतूर का दलित से भी बुरा हाल होगा या यु समझे कि वर्ण व्यवस्था को खडा रखने के लिए कोयतूर सबसे निचला स्तर बनेंगा ।

कोयतूरों को हिन्दू बनाने की प्रकिया हिंदूवादी संगठन, आरएसएस और उनके ऑफसुट संगठन द्वारा निरतंर चल रहा है । कोयतूर की सेवा के नाम पर कई एनजीओ कोयतूर समाज में काम कर रहे है । जो कोयतूर को वनवासी बनाने में लगे हुये है और कुछ गांधीवादी संगठन ने तो कोयतूर को हरिजन बना डाला है । इनके यही एनजीओ कोयतूर का गला घोटते है, काटते है । इसके लिए उत्तम उदाहरण “वर्ड वाइल्ड” बैंगलरू एनजीओ का है । जिन्हों ने कोयतूर के विरोध में ही कोर्ट में केस डाली और 11 लाख कोयतूरों को जंगल से बेदखल करने का सुप्रीम कोर्ट का आदेश हुवा ।

कोई हिन्दू संगठन कोयतूर के बचाव में आगे नहीं आया । ऐसे एनजीओ और सहकारी संस्था को कोयतूर के विकास के नाम पर और सरकारी योजनाओं के कार्यान्वयन के लिए  सरकारी करोडो रूपये का मदद लेते है । यह संस्थाऐ अक्सर सुवर्ण हिन्दू की ही होती है, फिर तो कोयतूर का विकास शुन्य ही होगा । कई संस्थाऐ भष्ट्राचार से पीड़ित है । हर जगह कोयतूर का शोषण हो रहा है । अपना हि कोयतूर भाई ऐसी शोषणवादी समाज व्यवस्था में कोयतूर को जोडने में गर्व महसूस कर रहा है । ऐसे लोगो को धर्म का संरक्षण प्राप्त है । यह लोग कोयतूरों का आर्थिक शोषण करके मार डालेंगे लेकिन पैसा मंदिरो में जमा करेंगे । क्योंकि शोषक वर्ग कि फर्स्ट चॉईस कोयतूर को मानसिक गुलाम बनाने की होती है । शोषक वर्ग जानता है कि मानसिक गुलाम बगावत नही करता है ।


भारत में कुल 5 प्रकार के क्षेत्र पाए जाते है

भारत का संविधान 5th schedule

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