Common civil court
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समान नागरिकता संहिता बिल एक ऐसा बिल है जो इस देश में ओबीसी, एससी, एसटी, माइनॉरिटी को संविधान द्वारा दिए गए अधिकारों और विशेष सुविधाओं को खत्म करता है, क्योंकि समान नागरिकता संहिता बिल मानता है कि सभी समान नागरिक हैं। 

समान नागरिकता संहिता बिल से निम्नलिखित नुकसान हो सकते हैं:

? भारतीय संविधान की मूल भावना खत्म–

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समान नागरिक संहिता के बाद, भारतीय संविधान से वंचितों को मिलने वाला लाभ जिसमे पिछड़े समुदायों के आर्थिक, शैक्षिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक, बौद्धिक और सामाजिक सशक्तिकरण के लिए विशेष प्रावधान और विशेष सुविधाएं प्रदान की हैं नहीं मिलेगा।

भारतीय संविधान ने एक विशेष धर्म के बजाय एक धर्मनिरपेक्ष राज्य प्रदान किया। यानी भारत के एक नागरिक को, चाहे वह किसी भी धर्म को मानता हो या नहीं, उसे धार्मिक स्वतंत्रता दी गई थी। भारत के लोग विभिन्न धर्मों, जाति आदि में विश्वास करते हैं और इस देश में कोयतूर भाई जो हजारों वर्षों से अपनी संस्कृति, पारंपरिक रीति-रिवाज, बोलियाँ, संस्कृति, परंपराएँ से बचे हुए हैं वह इस बिल से नष्ट हो जायेगा। समान नागरिक संहिता के बाद, जनजातियों की विशिष्ट पहचान भी समाप्त हो जाएगी और जलीय जंगलों के सभी प्रकार के संवैधानिक और भूमि स्वामित्व अधिकार भी समाप्त हो जाएंगे। इसलिए संविधान तो रहेगा, लेकिन वंचित उत्पीड़ित समुदायों के सभी संवैधानिक अधिकार शून्य हो जाएंगे।

? धर्मनिरपेक्षता खत्म हो जायेगी–

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यह बिल सबसे पहले इस देश से धर्मनिरपेक्षता को समाप्त कर देगी यानी कोयतूर, मुस्लिम, बौद्ध, ईसाई को हटाएगा। यानी यह देश में केवल एक धर्म बचेगा। शायद केंद्र सरकार भी इसे हिन्दू राष्ट्र बना सकती है।

?  पर्सनल लॉ अलग धर्मो का खत्म हो जायेंगे–

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समान नागरिकता संहिता कानून आने के बाद विभिन्न धर्मों के संबंधित व्यक्तिगत कानूनों को संवैधानिक रूप से समाप्त कर दिया जाएगा। सभी को एक धर्म की एक ही नीति का पालन करना होता है। एक ही धर्म को स्वीकार करना पड़ेगा। उदाहरण के लिए मिस्र, इराक, पाकिस्तान, आदि देशों में, इस्लाम धर्म है, तो सभी को इस्लाम धर्म का पालन करना पड़ता है, अन्य धर्म मायने नहीं रखेंगे। अगर हमारा देश एक हिन्दू राष्ट्र ऐसा बन जाता है, तो सभी को हिन्दू धर्म के नियमों के अनुसार जीना होगा। सभी पार्टियों, रीति-रिवाजों, शादियों आदि एक धर्म के अनुसार होगा।

? आरक्षण खत्म–

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समान नागरिकता संहिता बिल  के आने से ओबीसी, एससी, एसटी, माइनॉरिटी, जनरल कैटेगरी में सभी आरक्षण और प्रतिनिधित्व समाप्त हो जाएगा, क्योंकि यह बिल सभी नागरिकों को समान मानता है। यानी ओबीसी, एससी, एसटी वर्ग के लोग पढ़ाई कभी नहीं कर पाएंगे और वे नौकरियों में भी बहुत महत्वपूर्ण पदों से वंचित रहेंगे और राजनीति में भी नहीं आएंगे, क्योंकि राजनीतिक रिजर्व भी खत्म हो जाएगा। शिक्षा का निजीकरण किया जाए।

?  ST, SC (Atrocity) Act खत्म हो जायेगा–

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इस बिल के पास होते ही एसटी एससी (एट्रोसिटी) एक्ट खत्म हो जाएगा, क्योंकि यह बिल सभी को समान नागरिक मानता है। फिर दलित जनजातियों पर हो रहे अत्याचारों और हमलों के बावजूद विशेष अधिकारों के उन्मूलन के कारण कोई कानूनी कार्रवाई नहीं होगी।

? पाँचवी और छटवी अनुसूची खत्म–

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यह विधेयक देश के सभी नागरिकों को समान मानता है, इसलिए पांचवीं अनुसूची से 10 राज्य और छटवी अनुसूची से 7 राज्य वाले जनजातियों के भूमि के अनन्य अधिकार समाप्त कर दिए जाएंगे। इन क्षेत्रों में कोई भी गैर-कोयतूर जमीन खरीदकर कारोबार कर सकेगा और सरकार जमीन को उद्योगपतियों को पट्टे पर देने की बजाय उद्योगपतियों को देगी।

? कोयतूरों की जमीनो के विशेष अधिकार खत्म हो जायेंगे–

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समान नागरिकता संहिता बिल के पारित होने के साथ, जिन जनजातियों के पास वर्तमान में भूमि का विशेष अधिकार है, कि कोई भी गैर-कोयतूर सीधे जनजातियों से जमीन नहीं खरीद सकता है। इस चालान के बाद डायरेक्ट भी बिना किसी अनुमति पत्र के खरीद-बिक्री कर सकेगा। इसका अर्थ यह हुआ कि पूंजीपति कबीलों की भूमि खरीद लेंगे और कबीलों को उनकी ही भूमि में दास के रूप में काम करने के लिए कहेंगे। जैसा कि असम के चाय बागानों में किया जाता है, यह पूरे देश में होगा।

? भूमि सम्पदा अधिनियम 1898, CNT Act 1908, SPT Act 1858, अनुच्छेद 244(1)(2), अनुच्छेद 13(3), अनुच्छेद 19(5) खत्म–

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समान नागरिकता संहिता बिल पास होने से जनजातियों के सभी विशेष अधिकार समाप्त हो जाएंगे। कोयतूर समाज रूढ़िगत ग्राम सभा 13(3),19(5) के सभी विशेष अधिकार समाप्त हो चुके होंगे…

बाबा साहेब

बिरसा मुण्डा

राणा पुँजा भील

रानी दुर्गावती

तिलका माँझी

ज्योतिबा फुले

सावित्री बाई फुले

सिध्दु कानु

चाँद भेरव

टंट्या भील

साहूजी महाराज

राघोजी भांगरे

रेंगा कोरकु

वीर गुण्डाधुर

बाबुराव शेडमाके

कोमराम भीमु

भीमा नाईक

खाज्या नाईक

रघुनाथशाह

शंकर शाह

क्योंकि हमारे हजारों कोयतूर शहीदों का बलिदान व्यर्थ जाएगा। जल,जमीन और जंगल के लिए आपकी लड़ाई व्यर्थ होगी। पूंजीपतियों के लिए आपके बलिदान की कोई कीमत नहीं होगी। एक धर्म के घेरे में पूरे देश के 90% लोगों की जान दांव पर लगेगी। आखिर क्यों इस धर्म के लोग एक नैसर्गिक व्यक्ति को धार्मिक व्यक्ति बनाने पर तुले हुए हैं? धर्म एक बहाना है। धर्म की आड़ में पूंजीवादी उपनिवेश अपना साम्राज्य स्थापित करना चाहते हैं।

बहुत ही गम्भीरता से सोचने का विषय है। ईवीएम मशीन को भारत में समान नागरिकता संहिता बिल लाने के लिए ही लाया गया है और राज्यसभा की विधानसभा, लोकसभा को 100 साल के मिशन के जरिए ईवीएम और देश की मुख्य प्रणाली के जरिए कब्जा किया गया है।-

न्याय पालिका(Judiciary)

विधायिका(Legislative)

कार्यपालिका(Executive)

व्यापार (Business)

मीडिया (प्रेस, टीवी आदि)

आदि पर एक विशेष वर्ग के कुछ लोगों का व्यवस्थित कब्जा होगा। कुछ लोगों की व्यवस्था बनाने के लिए बड़े पैमाने पर देश की 90% आबादी के जीवन को खतरे में डालने के लिए व्यवस्थित रूप से एक बहुत बड़ा एजेंडा तैयार किया गया है।

जितेन्द्र एस्के धार (म०प्र०)


हिन्दू कोड बिल दिवस 5 फरवरी | नारी सशक्तिकरण

गोंड क्रांतिकारी कोमाराम भीम | Komaram Bheem

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