चेरो-राजा-मेदनीराय,Chero-Raja-Medniray
Chero-Raja-Medniray

चेरवा (चेरो) कौन थे, चेरवा चेरो, मूल रूप से कई कोयतूर समुदायों में से एक है जैसे कि भर और कोल जो उत्तर प्रदेश के दक्षिण पूर्व कोने में रहते हैं वे पलामू क्षेत्र और उत्तर बिहार के पारंपारिक शासक थे जब तक कि उन्हें ईस्ट इंडिया और राजपूत द्वारा नहीं दिया गया था, बिहार में चेरो को चारवा, चेरू चेरवा के रूप मे जाना जाता है।

चेरो राजा मेदनीराय सन 1658 से 1674 तक झारखंड के, पलामू के राजा थे वह दक्षिण गए, हजारीबाग और सरगुजा पर अपना साम्राज्य विस्तार किया। उसने डोइसा मे छोटा नागपुर के नाग बंशी महाराजा रघुनाथ शाह को हराया और अपने ईनाम के रूप में उन्होने आधुनिक, सतबरखा के पास पलामू के दुर्ग मे एक किला का निर्माण कराया।

इसके शासन मे दुध, दही, मठा, घी का भंडार था। शासन काल के दौरान आकाल मे चेरो, चेरवा, कोल, भर, उरांव, मूल निवासी समाज कभी भूखा नही रहा। अपने सभी सैनिक को, राज दरबार के लोगो को भोजन मे दुध, दही का सेवन करवाया करते थे, इस लिए कहा जाता है  “धनी, धनी राजा मेदिनीया घर घर बाजे मथनिया” गीत भी प्रचलित है।

Palamau-Fort-Durg
Palamau-Fort-Durg

राजा मेदनीराय शासन में पूर्वर्ती भूपत राय घराना चेरो चेरवा औरंगजेब का बिहार में दीवानी संभालने पर दाऊद खान ने 1660 में पलामू के खिलाफ अभियान शुरू किया था उसके साथ दरभंगा के फौजदार मिर्जा खान, चैनपुर के जागीरदार, मुंगेर के राजा, वह रोज कोकर के नागवंशी शासक भी थे। सम्राट और औरंगजेब से आदेश प्राप्त हुए की चेरो चेरवा शासक को इस्लाम धर्म करण करना था युद्ध में मेदनी राय जंगल में छुपना पड़ गया।

दोनों किलो पर आक्रमणकारियों द्वारा कब्जा कर लिया गया और इस क्षेत्र को अधिनता में लाया गया था। चेरो चेरवा की हिन्दू आबादी हटा दिया गया उनकी मूर्तियों के साथ मंदिरों को नष्ट कर दिया गया पलामू के शासक मेदनी राय दाऊद खान द्वारा अपनी हार के बाद सरगुजा में शरण लिए।

एक बार फिर उन्होंने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और पलामू पर अधिकार कर लिया उन्होंने कृषि को बढ़ावा देने के लिए और पलामू को उजाड़ राज्य को बेहतर बनाने के लिए गंभीर प्रयास किए जो बार-बार मुगल आक्रमण के कारण हुआ था।

मेदनी राय का क्षेत्र बहुत समृद्ध हो गया और लोगों के पास भोजन और जीवन जीने की आने सुविधाएं थी। झारखंड के प्रसिद्ध लोग आज भी इनके गुण गाते है। गुणगान करने वालों में जयपाल सिंह मुंडा, तिलकामांझी, अल्बर्ट एक्का, राजा अर्जुन सिंह, जतरा भगत, बिरसा मुंडा गया मुंडा, फंणि मुकुट राय, दुर्जन साल, राजा मेदनी रायचेरो, चेरवा, बुधु भगत, तेलंगा खडिया, ठाकुर विश्वनाथ साही, पांडे गणपत गणपत राय, टिकैत उमराव सिंह, शेख भिखारी थे। इतिहासकारों ने इतिहास के पन्नों में से पलामू के मेदनी राय के शासन काल को गायब कर दिया। हमे राजा मेदनी राय चेरो और चेरवा समाज को जानना होगा। हमे अपनी इतिहास को समझना होगा। ऐसे महान राजा मेदनी राय के चरणों को नमन ।।


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