गोंडी भाषा में चार को ‘रेका’ कहते हैं। चार फल बहुत स्वादिष्ट होते हैं। यह चार, चारोली, पायल घने जंगलों में पाया जाता है। इसके फल को पकने के बाद गुठली से चिरौंजी निकाला जाता है। चिरौंजी जो खाने में बहुत ही स्वादिष्ट होती है. इसका उपयोग भारतीय मिठाइयों, व्यंजन, खीर और नूडल्स आदि में किया जाता है। चारोली को पूरे साल उपयोग किया जा सकता है। यह संवर्द्धक और पौष्टिक माना जाता है। चार फलों के दानों को तोड़कर चिरौंजी निकाला जाता है। जिसे आमतौर पर पियाल, प्रियाल या चारोली या चिरौंजी के नाम से जाना जाता है। शुष्क पर्वतीय क्षेत्रों में मुख्यतः चार वृक्ष पाये जाते हैं।

यह पेड़ विशेष रूप से उड़ीसा, दक्षिण भारत, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, छोटा नागपुर, हिमाचल प्रदेश, आदि स्थानों में पाया जाता है। इस पेड़ की लंबाई लगभग 20 से 40 फीट होता है। इस पेड़ के फल से निकाले गए अनाज को मींगी कहा जाता है। यह सुखदायक, मधुर, मीठा, बल स्निग्ध, हृदय के लिए अच्छा, वात-पित्त और आम्रक है। बीमारी और शारीरिक कमजोरी में उपयोग किया जाता है। यह पका हुआ चारोली फल भारी और मीठा, बलगम, शीतल, दस्तावार होता है और पित्त, जलन, प्यास और बुखार से राहत देता है। इस वृक्ष के फल से प्राप्त छाल और मींगी दोनों ही मनुष्य के लिए उपयोगी हैं। सौंदर्य प्रसाधनों में भी इसका उपयोग किया जाता है।


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