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AC-Ante Crist 

Ante मतलब पहला, अनाशकाल से इस धरती पर रहने वाला कोयतूर, येशु क्रिस्त को सदी से पहले रहने वाला कहा जाता होता तो क्योकि आज येशु के जन्म के हिसाब से कैलेंडरी दुनिया चल रही है। Anno Domini (AD) का मतलब ईसा मसीह के जन्म के बाद की तारीख से है और Before Christ (BC) का मतलब ईसा मसीह के जन्म के पहले से है ।

ज्यूडिशियल और नॉन ज्यूडिशियल का मतलब क्या है? लिज जानने के लिये, Land रेवेन्यू रुल, 1921 क्या है? Crown(ताज) क्या है ? ऐसी सभी बाते जानना बहुत जरूरी है।

ज्यूडिशियल || Judicial

ज्यूडिशियल=जितनी भी मानवनिर्मित बाते है, धर्म है, नियम, कायदे कानून है, नियम है वो सब ज्यूडिशियल है।

जो चीजे मानव ने बनाई है मतलब मानवनिर्मित, जिसे कुदरती नहीं कहा जा सकता वः सब ज्यूडिेशियल होती है ।

नान ज्यूडिेशियल || Non Judicial

नॉन ज्यूडिशियल=जो नियम ‘कुदरती’ व ‘प्राकृतिक’ होता है, जिसे मानव ने नही बनाया वो सब कुदरती तत्वों को नॉन ज्यूडिशियल कहा जाता है और ए/सी कोयतूर(आदिवासी) भारत सरकार पूरी तरह से कुदरती रूलिंग से चलता है।

दुनिया में जो भी कुदरती बाते है, जो भी कुदरती चीजे है जो भी कुदरती नियम है ,वह सभी नान ज्यूडिेशियल है मतलब कुदरती प्राकृतिक है ।

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आज भी इंडिया नॉन ज्यूडिेशियल है, इसका सबसे बड़ा ज्यूडिेशियल सबूत स्टैम्प पेपर है । कोई भी स्टैम्प पेपर लीजिये और उसके ऊपर देखये, ‘INDIA NON JUDICIAL’ लिखा हुआ रहता है । इसका साफ साफ मतलब यही है की यह देश आज भी कुदरती लोगों का कुदरती देश है, और कुदरती लोग और कोई नहीं बल्कि इस देश के कोयतूर(आदिवासी) ही नान ज्यूडिेशियल लोग है। उस स्टैम्प पेपर पर INDIA NON JUDICIAL के नीचे भारतीय गैर न्यायिक लिखा होता है । इस गैर न्यायिक शब्द को पढ़ते ही लोग डर जाते है । लेकिन इसमें ऐसा कोई डरने वाली बात नहीं है । उल्टा वो तो कोयतूरों(आदिवासियों) के फायदे की ही बात है ।

क्योकि, भारतीय गैर न्यायिक होता है, भारत नहीं, कोयतूर(आदिवासी) खुद भारत है, भारतीय नहीं है। NON JUDICIAL गैर न्यायिक का अर्थ कुदरती होता है । मानवनिर्मित और कुदरती इन दोनों को ज्यूडिेशियल और नान ज्यूडिेशियल से कम्पेयर कीजिये आप के सरे कांसेप्ट्स क्लियर हो जायेंगे ।

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अब ए/सी आदिवासी भारत सरकार को जानते है।

 || स्व कर्ता पितु की जय ||

जब कोयतूर समाज के ऐतिहासिक प्रणेता के नाम लिए जाये तो सब से पहेला नाम ऐ/सी मिन्ट कुंवर केश्री सिंह का आता है । इनका नाम इसलिए बहार नहीं लाया गया क्योंकि अगर कोयतूर (आदिवासी) अपनी पहचान जान लेता है तो सभी गैर-आदिवासियो को लेने के देने पड जाएगे । कोर्ट-कचेरी हो, प्रेसिडेंट हो कलेक्टर हो या पुलिस हो उनकी ऑफिस में घबराहट छा जायेगा।

तो आप के दिमाग में एक प्रश्न खड़ा हुआ होगा ऐ/सी मिन्ट कुंवर केश्री सिंह भारत के कोयतूरों(आदिवासीयों) के ऐतिहासिक प्रणेता कैसे । यहाँ हम ऐ/सी मिन्ट कुंवर केश्रीसिंह के बारी में जाने ।

ऐ/सी मिन्ट कुंवर केश्री सिंह का जन्म गाँव: कटास्वान, तहसील: व्यारा, जिला: सूरत (जिसे विभाजीत करके आज तापी नाम दिया है) राज्य: गुजरात, इन्डिया-भारत में हुआ । उनके पिताजी का नाम टेटिया कानजी गामित था । ऐ/सी मिन्ट कुंवर केश्री सिंह भील गोंड थे।

वह बेरिस्टरन तक पढ़े। उनके क्लासमेट में सयाजीराव गायक्वार्ड भी थे और उनका डॉ.बाबा साहेब आंबेडकर, महात्मा गाँधी, नेताजी सुभाषचन्द्र बोस जैसे लोगों से भी पत्र व्यवहार था ।

जब देश के लोग झूठी आजादी के पीछे दौड़ लगा रहे थे उस वक्त उन्होंने सरकारी नौकरी ना करते हुए लोगों को जागृत करने और अंग्रेज को यकीन दिलाने का कार्य किया की भारत देश का असली वारिस, असली मालिक, असली मूलबीज कोयतूर(indigenous) है ।

भारत का मूलबीज (मालिक) कौन है, इस मुददे पर ऐ/सी मिन्ट कुंवर केश्री सिंह ने 1930 से कोयतूर(आदिवासियो) को जागृत करने का कार्य शुरू किया और इस सन्दर्भ में अंग्रेज के साथ उनका पत्र व्यवहार लगातार रहा ।

जिसमें अंग्रेज के ही बनाये 1857 के महारानी विक्टोरिया के अनाउंसमेंट, लैंड रेवेन्यू रूल्स और ट्रेजरी उनके क़ानूनी हथियार रहे । तब जा कर 1931-35 की गोल मेजी परिषद् के पहेले लार्ड इरविन और महात्मा गाँधी का करार हुआ जिसे हम गाँधी-इरविन पैक्ट्स कहते है ।

जिसमे सेक्शन 55 कोलम 36 a, b, c, d, e, f, g और h के तहेत सारे भारत देश को “अखिल आदिवासी एक्सक्लूडेड पार्शियल एरिया” कहा गया यानि कोयतूरों(आदिवासियों) का देश जिसमे कोई हस्तक्षेप नहीं कर सकता ।

जब यह तय हो गया की कोयतूर(आदिवासी) ही इस देश का मूलबीज (मालिक) है तो कही जाने वाली झूठी आजादी के आन्दोलन में जुड़ने का कोई सवाल ही उत्पन्न नहीं हुआ । ऐ/सी मिन्ट कुंवर केश्री सिंह ने कोयतूरों(आदिवासियों) को मालिकतत्व का अहसास दिलाया और देश एवं राज्य का महान अध्यात्मिक रूलिंग (शासक) दुनिया के समक्ष रखा ।

ऐ/सी मिन्ट कुंवर केश्री सिंह दादा ने कोर्ट समक्ष खुद को असली मालिक कहा। 07-01-69 खुद को मूल मिट्टी, मूल बीज, मूल वारिस, भारत सरकार (Government of india) साबित किया। अर्थात ताज का ओनर-मालिक साबित किया, Established usage of the crown – Government of india – owner of india साबित किया । जिसको बंकीगहाम पैलेस, लंडन में दिनांक 07/01/1969 को दुनिया के 64 राष्ट्र के 142 डेलीगेटस, कॉमनवेल्थ ने विश्व प्रसिद्ध किया और उन सभी दस्तावेज को वर्ल्ड नोरोटरी भी की है।

ऐ/सी मिन्ट कुंवर केश्री सिंह ही भारत सरकार है और हम सब ऐ/सी मिन्ट कुंवर केश्री सिंह के कुटुम्ब परिवार (परिवार के सदस्य) है।

विश्व के महान अध्यात्मिक कोड को दुनिया के समक्ष लाने के लिए कॉमनवेल्थ द्वारा 30-04-69 को प्रसिद्ध हुए, ऐ/सी मिन्ट कुंवर केश्री सिंह जी “First Lord of The Treasury, covering all parts of the world”.

उन्होंने साबित कर दिया की देश और दुनिया का प्राकृतिक व्यवहार समजने वाला ही सच्चा कोयतुर (आदिवासी) है और इस देश का हर एक आदिवासी भारत सरकार परिवार है । सभी आदिवासीओ को ऐ/सी भारत सरकार परिवार की पहचान दिलाई।

ऐ/सी मिन्ट कुंवर केश्री सिंह के सती-पति के कुदरती व्यवहार को सभी गैर-आदिवासिओ ने धर्म, मूवमेंट, आन्दोलन, संप्रदाय से जोड़ने की कोशिश की पर यह तो अनाशकाल पूर्व से चला आया कुदरती व्यवहार है ।

आज तक जो भी लोग इस व्यव्हार को समजे है, उन्हों ने आज तक ना ही राशन कार्ड (ration card) बनवाए और ना ही मतदार कार्ड (election card) बनवाए । इस व्यवहार से जुड़े लोग किसी तरह का टैक्स (tax) नहीं भरते । उस कोर्ट जजमेंट में सब उल्लेख हे।

यह इसलिए की उन्हें ज्ञात हो गया है की वोह इस देश के मालिक है, मालिक किसी के पास भीख नहीं मांगता, ना ही मालिक के चुनाव होते है, ना ही मालिक अपने ही देश में टैक्स भरता है । यह सब बहार से आई हुई प्रजा पर लागु होता है ।

ताज की विवेक युक्त बुद्धि – पावर्स : विश्व में कोई भी ऐसा कोड नहीं बना जो ताज के ओनर के विरुद्ध वर्ताव कर सके ।

A clause by clause analysis of the bill can be obtained from the Information Department, British High Commission, Shantipath, Chanakyapuri, New Delhi

??इसलिए कोयतुर अपने मालिकतत्त्व को पहचाने ।

?अब लँड रेवेन्यू रुल, 1921 से 99 साल की लिज को जानते है।

? लँड रेवेन्यू रुल, 1921 के पेज नंबर 231 पे स्पष्ट लिखा है की

“The Meaning of this fixed period is that if at the beginning of the period in 1870 a lease is granted for 99 years it runs till 1969, but if in 1900 a second plot is given out under the same rule, it is granted on lease also up to 1969 only.

Even in 1950 the lease would be granted only for 19 years”.

ऊपर दिये गये पेराग्राफ मे स्पष्ट रूप से बताया गया है की 1870 मे दि गयी लिज सिर्फ 99 साल के लिये रहेगी,और 1900 मे लिज का दूसरा प्लॉट* भी दिया जाता है तो भी लिज 1969 तक ही रहेगी।

और 1950 मे भी लिज दि जाती है तो भी सिर्फ 1969 तक ही रहेगी।

मतलब 1870 की 99 साल की लिज 1969 मे हर हालत मे खत्म हो जाती है।

जब बाहरी विदेशी इमिग्रंट्स लोगो की लिज ही 1969 मे खत्म होती है तो साथ मे उनका बनाया संविधान भी 1969 मे खत्म हो जाता है।

Bharat-Sarkar-Kutumb-Pariar
Bharat-Sarkar-Kutumb-Pariar

President, Prime Minister, Salianadar, Raja – Maharaja, Speaker, Chief Justice, Justice, Supreme Court, High Court, Captain, Colonel, Lieutenant, General, Major, Commander-in-chief, Inspector General, Deputy Inspector General, Commissioner, Superintendent of Police, Inspector, Governor, Collector, Mamlatdar, Patel, Talati, Sarpanch, Kamdar up to Peon all are Coole, Servant, Sevak (Their Generations) O. I. G. S / On India Government Service..

When all these are O. I. G. S. (On India Government Service)

Then who is the Owner of India?

Then who is Government of India?

1 Rupee Note
1 Rupee Note

1 रूपए के नोट में भारत सरकार लिखा हुआ है। 2 रूपए और इससे अधिक के नोट में रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया लिखा रहता है।

?अब यह जानते है की भारत सरकार और केंद्र सरकार क्या है।

भारत सरकार देश का मालिक है और देश का हर आदिवासी भारत सरकार परिवार है, मालिक है।

तो केंद्र सरकार राज्य सरकार नोकर है। इसीलिये केंद्र सरकार और राज्य सरकार के चपरासी से लेके राष्ट्रपती तक के सभी नोकर लोग पगार लेते है और मालिक को पगार के बदले सेवा देते है।

सभी के सभी OIGS मतलब On India Government Service मतलब भारत सरकार सेवार्थ है।

जिन्हें सबूत देखना हो वो

British High Commission, Delhi

या ग्राम कटासावन, ता-व्यारा, जिल्हा तापी, गुजरात जाके देख सकते है।

सेवा जोहर ???


दादा हीरा सिंह मरकाम का जीवन परिचय

भारत में कुल 5 प्रकार के क्षेत्र पाए जाते है

कोयतूर भारत के सरकारी रिकॉर्ड मे हिन्दू कब बना | आदिवासी जनगणना

30 COMMENTS

    • सेवा जोहार जानकारी बहुत अच्छी है लेक़िन इसे धरातल पर लाने में कई कठनाइयों का सामना करना पड़ेगा

  1. आदिवासी ओ कबतक सांत बैठे राहोगे जागो
    (मंदिर मे जाना बंद करो
    विदेशी भगाओ
    देश बचाओ).

  2. dearsir i live in mumbai so i have joint for our a/c bharat parivar
    so pls help for jionning
    i need help for membership
    and my contact number as 7900031603
    and email id
    [email protected]
    thank &regard
    shriram jayram ghule
    7900031603

  3. Sir ,
    I am yogesh bondarde I got information about ac kuvar keshree singhji and Ac bharat sarkar parivar from youtube.
    I want to joint the parivar.
    Can you please provide information how I joint ac bharat sarkar parivar

  4. We are adivasi that’s mean we belongs to Ac bharat sarkar parivar
    Then why we have to fight for justice
    Then why we always have to give proof of adivasi.
    Everything is mention buy the justice then why we have to give justification

  5. 100%.Bharat Sarkar(Adivasi) ka matlab Samjhme aya..Very nice information.I am proud of it.Ham sab OIGS ko sarkar samajte the.

  6. Sir nice information that is really important for me and all india mulnivashi ( adivashi )
    How to join the ac kutum pariwar…
    From Panvel Navi Mumbai.

  7. उलगुलान जारी रहे
    हम अपना हक़ अधिकारी लेकर रहे डे
    जय बिरसा मुंडा
    जय टंट्या भील
    जय जयपालसिंह मुंडा
    स्वकर्ता पितु की जय

  8. હું જયેન્દ્ર ‌‌પટેલ ભારત કુટુંબ પરિવાર નો સદસ્ય છું પણ‌ મહારાષ્ટ્ર માં આવું વર્ચસ્વ વધારવા બહુ મુશ્કેલ આવી રહી છે ત્યારે તમે મને માગૅદશૅન ‌‌‌‌‌‌‌‌આપો મોબાઇલ નંબર ૯૮૬૭૦૯૨૧૮૫

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