हसदेव अरण्य, हसदेव अरण्य क्षेत्र

पलारी बलौदाबाजार (छत्तीसगढ़), 28 अप्रैल 2022: प्रसिद्ध हसदेव अरण्य जंगल का काला हीरा, यानि अमूल्य कोयला, जिसे सरकार ने अडानी समूह को मंजूरी दी है, जिसका स्थानीय जनजातियों द्वारा वर्षों से विरोध किया गया था, यहां तक ​​कि 300 किलोमीटर पैदल चलकर सरकार का ध्यान आकर्षित करने का पैदल भी किया। सरकार ने इसे नजरादाद किया, लेकिन अनुसूचित जनजातियों के लिए विरोध की आग जलती रही। संविधान के अनुच्छेद 244 (1) की पांचवीं अनुसूची के क्षेत्र में होने के बावजूद जंगल के 4 लाख 50 हजार पेड़ अदानी के लिए काट दिए जाएगे। हसदेव अरण्य एक घना जंगल है जिसमे कई जीव-जन्तु, पशु-पक्षी,जगली-जानवर के साथ-साथ कोयतूर रहते है जो 1,500 किमी क्षेत्र में फैला है। यह क्षेत्र छत्तीसगढ़ के जनजाति समुदायों का घर है। इस घने जंगल के नीचे अनुमानित पांच अरब टन कोयले के दबे होने से क्षेत्र में खनन बड़ा व्यवसाय बन गया है, जिसका स्थानीय लोग विरोध कर रहे हैं।

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छत्तीसगढ़ राज्य सरकार ने आखिरकार 6 अप्रैल, 2022 को हसदेव अरण्य क्षेत्र के परसा कॉल ब्लॉक और परसा ईस्ट केते बासन ब्लॉक के विस्तार को आधिकारिक रूप से मंजूरी दे दी। पिछले एक दशक से हसदेव अरण्य में कोयला खदानों के संरक्षण की दृष्टि से लगातार विरोध हो रहा है एवं इसमें भारत के घने, समृद्ध वन्य जीवन और जैव विविधता और शुद्ध पर्यावरण है। पांचवें अनुबंध क्षेत्र में शामिल इस क्षेत्र के महत्वपूर्ण जनजाति समुदायों के लिए भी इस जंगल के बिना अपने जीवन की कल्पना करना मुश्किल है। राहुल गांधी ने कहा था कि जब उनकी सरकार आई थी तो वह किसी भी हाल में उद्योग नहीं लगाने देंगे लेकिन सरकार आ गई है और अडानी की कंपनी भी आ गई है, अब इसका असर अगले चुनाव पर पड़ता है या नहीं यह तो वक्त ही बताएगा. ऐसा इसलिए कहते हैं क्योंकि छत्तीसगढ़ राज्य की जनजातियाँ समूह वाला प्रदेश है, जनजातियाँ बहुत अधिक संख्या में हैं और जनजातियाँ ही हैं जो किसी भी सरकार को उखाड़ फेंकने और उसके गठन में प्रमुख भूमिका निभाते हैं; 15 साल में कांग्रेस की सरकार को सत्ता में वापस लाने का श्रेय केवल जनजातियो को जाता है।

हसदेव के जंगल

प्रदेश आदिवासी सेना अध्यक्ष दीनू नेताम पूरे राज्य में सोशल मीडिया के माध्यम से अपना विरोध व्यक्त कर रहे हैं, बलौदा बाजार जिला अध्यक्ष काशी ध्रुव ने मीडिया के माध्यम से सरकार को एक अल्टीमेटम दिया है, हसदेव अरण्य क्षेत्र संविधान के अनुच्छेद 244 (1) के अंतर्गत आता है, यदि वह विस्तार की मंजूरी को वापस नहीं लिया तो उन्हें सत्ता से हटा देगे, जैसे भाजपा सरकार को हटाया था। इस अभियान में जिला काशी से अध्यक्ष ध्रुव, नोहरी मंडावी, जगदीश छेड़िया, सम्मोहन, दामेश, ​​सोहन नेताम, पप्पू ध्रुव, हेमंत ध्रुव, ओंकार ध्रुव, मदन ध्रुव, दगेश्वर ध्रुव, गेदलाल ध्रुव, भूपेंद्र ध्रुव, हर्ष ध्रुव और सभी आदिवासी सेना दल।


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