stamp-ticket-Dr-B-R-Ambedkar
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1) संविधान सभा में जाने के लिए, बाबासाहेब अंबेडकर जी, जोगेन्द्रनाथ मंडल की मदद से, 17 जुलाई, 1946 को पूर्वी बंगाल के इस “जैसल-खुलना” निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव के लिए खड़े हुए । बाबासाहेब अंबेडकर 20 जुलाई, 1946 को वहां से चुनकर आएं। ।

2) संविधान सभा की पहली सभा को सुबह 9 दिसम्बर 1946 (सोमवार 11 बजे) को संविधान सभागृह दिल्ली में शुरू हुईं ।

3) संविधान सभा में बाबासाहब अंबेडकर जी ने अपना पहला भाषण 17 दिसम्बर 1946 को दिया जो की 10 मिनट की अवधि का था।

4) बाबासाहेब अम्बेडकर जी जिस निर्वाचन क्षेत्र से संविधान सभा में गए थे, वह निर्वाचन क्षेत्र पाकिस्तान में सम्मिलित होगा, अर्थात् बाबासाहेब अम्बेडकर जी पाकिस्तान की संविधान सभा में जा सकते थे। लेकिन बाबासाहेब अम्बेडकर ने इस कांग्रेसी साजिस अंग्रेजों के को बताई। तब अंग्रेजों ने कांग्रेस को धमकी दी कि अगर बाबासाहेब अम्बेडकर को संविधान सभा में नहीं लाया गया, तो हम भारत को स्वतंत्रता नहीं देंगे और अंग्रेजों ने कांग्रेस के सामने दो शर्तें रखीं।

क) जैसल-खुलसा प्रदेश को दोबारा भारत में सामिल किया जाए ।

ख) किसी भी सदस्य का ईस्तिफा लेकर  संविधान सभा में लिया जाए ।
(काँग्रेस ने जैसल-खुलसा प्रदेश भारत में सामिल नही किया बल्कि संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ०राजेन्द्र प्रसाद इन्होंने मुंबई के पुर्व मुख्यमंत्री बी०जी०खेर इन्हें 30 जून 1947 को खत भेजकर बाबासाहब को संविधान सभा में दोबारा लाओ ऐसा कहाँ था । बाद में काँग्रेस ने पुना के बॅरि०जयकर जो मुंबई से संविधान सभा में चुनकर गए थे उन्हें अपना ईस्तिफा देने को कहाँ और बाबासाहब अंबेडकर जी को मजबूरन संविधान सभा में लिया गया।)

5) बाबासाहब अंबेडकर जी को जुलाई 1947 को दोबारा संविधान सभा पर चुना गया ।

6) 15 अगस्त 1947 को पंडित जवाहरलाल नेहरू ने बाबासाहेब अम्बेडकर को अपने मंत्रिमंडल में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया। बाबासाहेब अम्बेडकर जी को वह निमंत्रण मिला और वह भारत के कानून मंत्री बने।

7) 29 अगस्त, 1947 को संविधान सभा ने एकमत से बाबासाहेब अम्बेडकर को मसौदा समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया।

8) मसौदा समिति की बैठक 27 अक्टूबर, 1947 के बाद हर दिन हुई। प्रारूप समिति के 7 सदस्य थे।

9) समिती की मिटिंग 13 फरवरी 1948 तक कुल 44 दिन हुईं ।

10) मसौदा समिती ने संविधान का पहला मसौदा 21 फरवरी 1948 को संविधान सभा के अध्यक्ष के सामने पेश किया ।

11) यह मसौदा 8 महीनों के लिए लोगो के चर्चा लिए उपलब्ध था। द गजट ऑफ इंडिया (26 फरवरी, 1948) में प्रकाशित।

12) यह मसौदा 4 नवंबर, 1948 को संविधान सभा में प्रस्तुत किया गया। संविधान सभा भारत की संविधान सभा, नई दिल्ली में हुआ।

13) 4 नवंबर, 1948 को इस मसौदे की प्रस्तुति के बाद चर्चाएँ शुरू हुईं। यह चर्चा को फर्स्ट रिडिंग कहाँ गया? 

14) संविधान के सेकेंड रिडिंग की शुरूवात 15 नवम्बर 1948 को हुई । यह चर्चा 17 अक्तूबर 1949 को समाप्त हुईं ।

15) उसके बाद, इसका तीसरा वाचन 14 नवंबर, 1949 को शुरू हुआ और सत्र 26 नवंबर, 1949 को समाप्त हुआ। इसके बाद संविधान स्विकारा गया और संविधान सभा के अध्यक्ष द्वारा हस्ताक्षरित किया गया।
नवंबर 1949 में जब संविधान समाप्त हुआ, तो संविधान सभा के सदस्यों की कुल संख्या 324 थी।   

*** संविधान सभा के सदस्यों में उपकुलपती, प्रसिद्ध वकील, शिक्षाविद्, उद्योगपति तथा व्यापारी, चिकित्सक, श्रमिकों के प्रतिनिधि, लेखक और पत्रकार आदि सभी थे ।

*** संविधान सभा की पहली बैठक में 207 सदस्यों ने हिसा लिया और बिहार के वयोवृद्ध नेता डॉ० सचिदानंद सिन्हा अस्थायी अध्यक्ष बने।
*** 11 दिसंबर, 1946 को, डॉ० राजेंद्रप्रसाद को सर्वसम्मति से सदन का स्थायी अध्यक्ष चुना गया और अंत तक वे संविधान सभा के अध्यक्ष बने रहे।
*** 2 साल 11 महिने 17 दिन लगे भारत का संविधान तैयार करने के लिए ।
*** इस दौरान संविधान सभा के कुल 11 सत्र और 165 बैठकें हुईं।
*** संविधान सभा का तीन वर्ष में जो व्यय हुआ वह अधिक न था । 22 नवम्बर 1949 तक 63, 96, 729 रूपये व्यय किए गए ।
*** संविधान सभा को प्रस्तुत संविधान के पहले मसौदे में 315 अनुच्छेद और 8 अनुसूचियाँ शामिल थी।
*** अन्तिम रूप में संविधान में 395 अनुच्छेद तथा 8 अनुसूचियाँ थी ।
*** संविधान के प्रारूप में 7,635 प्रस्तावित संशोधन थे। इनमें से, सदन में कुल 2,473 संशोधन पेश किए गए।
*** संविधान सभा में 10 से ज्यादा महिलाएँ थी । संविधान सभा में श्रीमती सरोजिनी नायडू, विजयलक्ष्मी पंडित, राजकुमारी अमृता कौर यह महिलाओं की प्रतिनिधित्व करती थी ।
*** 24 जनवरी 1950 को संविधान की तीन प्रतियों का प्रारूप संविधान सभा सदन की मेज पर हस्ताक्षर करने के लिए रखा गया था। एक अंग्रेजी प्रति हस्तलिखित और चित्रकारों के कारीगरों द्वारा तैयार की गई थी। एक पत्र अंग्रेजी में छपा था और एक पत्र हिंदी में हस्तलिखित था। चैंबर के अध्यक्ष ने सभी सदस्यों से इन तीन पुरस्कारों पर हस्ताक्षर करने के लिए कहा और सभी सदस्यों ने इस पर हस्ताक्षर किए। 26 जनवरी 1950 से, भारतीय संविधान का पालन किया जाने लगा। 

*** डॉ० राजेंद्र प्रसाद, संविधान सभा के अध्यक्ष की राय बाबासाहेब के बारे में ,
” संविधान प्रारूप समिति के अध्यक्ष डॉ० अंबेडकर ने यह काम ख़राब सेहत के बावजूद (संविधान लिखने का कम किया) कुशलतापूर्वक किया। संविधान सभा द्वारा इस तरह का सटीक निर्णय इससे पहले कभी नहीं लिया गया था और डॉ० अम्बेडकर ने चुनाव की यथार्थता को सिद्ध किया, इतना ही नहीं, उन्होंने जो कार्य किया उसे उन्होंने एक तरह की तेजस्विता ही कहा जाए । “
– डॉ०राजेन्द्र प्रसाद (संविधान सभा के अध्यक्ष और भारत के पहले राष्ट्रपति)  

T.T.Krishnamachari, a colleague of his in the Drafting Committee said in one of his speeches in the Constituent Assembly: “The House is perhaps aware that of the seven members nominated by you, one had resigned from the House and was replaced. One was away in America and his place was not filled up, and another person was engaged in State affairs, and there was a void to that extent. One or two people were far away from Delhi and perhaps the reason for health did not permit them to attend. So it happed ultimately that the burden of drafting this Constitution fell upon Dr. Ambedkar and I have no doubt that we are grateful to him for having achieved this task in a manner that is undoubtedly commendable. “
**अमित इंदूरकर**


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